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‘हमारी पीठ पर छुरा किसने घोंपा था?’ तमिलनाडु में विजय की TVK के समर्थन को लेकर भिड़ी DMK-कांग्रेस!


DMK Congress Rift: तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) और कांग्रेस के बीच लंबे समय से चला आ रहा गठबंधन अब टूट की कगार पर दिखाई दे रहा है. कांग्रेस ने कहा है कि वह विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) को सरकार बनाने में समर्थन देगी. दोनों दलों के नेताओं के बीच लगातार तीखी बयानबाजी हो रही है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है.

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने डीएमके के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव में सिर्फ डीएमके ही नहीं हारी थी, बल्कि कांग्रेस को भी नुकसान उठाना पड़ा था. उन्होंने कहा कि डीएमके कई बार सत्ता में रही है, इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सिर्फ कांग्रेस की वजह से उन्हें नुकसान हुआ.

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने दिया जवाब

मणिकम टैगोर ने कहा कि डीएमके प्रवक्ताओं द्वारा इस्तेमाल की जा रही भाषा दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने याद दिलाया कि साल 2011 में हार के बाद भी कांग्रेस ने डीएमके का समर्थन किया था, लेकिन उसी साल डीएमके ने स्थानीय निकाय चुनाव अलग लड़ने का फैसला किया. इसके बाद 2013 में डीएमके यूपीए सरकार से भी बाहर हो गई थी.

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‘आखिर किसने किसे धोखा दिया?’

मणिकम टैगोर ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर विश्वासघात की बात की जा रही है तो आखिर किसने किसे धोखा दिया. उन्होंने कहा कि साल 2016 में सभी को यह एहसास हो गया था कि कांग्रेस के बिना डीएमके चुनाव नहीं जीत सकती. इसी वजह से दोनों दलों के बीच फिर गठबंधन हुआ और करीब 95 सीटों पर सफलता मिली. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दोस्ती निभाने के लिए काफी राजनीतिक बलिदान दिए हैं. कांग्रेस ने भी अपनी सीटें गंवाई हैं, इसलिए डीएमके के प्रवक्ताओं को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए.

डीएमके की सेक्युलर छवि का किया जिक्र

मणिकम टैगोर ने कहा कि तमिलनाडु में दो प्रमुख सेक्युलर राजनीतिक ताकतें हैं और कांग्रेस हमेशा डीएमके की सेक्युलर छवि का सम्मान करती रही है. उन्होंने डीएमके नेताओं से जिम्मेदारी के साथ बयान देने की अपील की.

टी.आर. बालू ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

वहीं डीएमके के वरिष्ठ नेता और पार्टी कोषाध्यक्ष टी.आर. बालू ने इससे पहले कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के हालिया रवैये ने उसकी असली राजनीतिक सोच को सामने ला दिया है. बालू ने आरोप लगाया कि डीएमके ने हमेशा संकट के समय कांग्रेस का साथ दिया और इसके लिए कई बार राजनीतिक नुकसान भी उठाया.

टी.आर. बालू ने कहा कि डीएमके ने हमेशा सोनिया गांधी और दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ मजबूत रिश्ते बनाए रखे. उन्होंने राहुल गांधी के साथ पार्टी के भावनात्मक संबंधों का भी जिक्र किया. बालू ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन को अपना भाई बताते थे. उन्होंने कहा कि जब मीडिया में यह खबर आई कि कांग्रेस इन पुराने रिश्तों को खत्म करने की बात कर रही है, तो उन्हें इस पर ज्यादा आश्चर्य नहीं हुआ.

2019 चुनाव में स्टालिन के समर्थन का जिक्र

टी.आर. बालू ने कहा कि जब कांग्रेस खुद राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने में हिचकिचा रही थी, तब डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ने चेन्नई से सबसे पहले राहुल गांधी के नाम का समर्थन किया था. उन्होंने कहा कि डीएमके के समर्थन की वजह से गठबंधन को दो चुनावों में बड़ी जीत मिली और तमिलनाडु से बड़ी संख्या में सांसद संसद पहुंचे.

‘समय विश्वासघात का जवाब देगा’

अपने बयान के अंत में टी.आर. बालू ने कहा कि डीएमके के लिए हार और विश्वासघात नई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर ऐसे राजनीतिक विश्वासघात का जवाब जरूर देगी.

 



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