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पाक के सिंध में बच्चों में तेजी से फैला HIV, WHO का अनुमान- पूरे देश में साढ़े 3 लाख लोग ऐसे ही जीने को मजबूर


पाकिस्तान का हेल्थ सिस्टम जानें किस भरोसे चल रहा है. अब प्रमुख शहर कराची में एक सरकारी अस्पताल में फैले HIV संक्रमण के मामले में लोग पॉजिटिव पाए गए हैं. अधिकारियों ने कहा है कि हाल के हफ्तों में यह संख्या तेजी से बढ़ी है. सिंध के लेबर मिनिस्टर सईद गनी ने इस हफ्ते के शुरुआत में बताया कि सिंध एम्पलॉईज सोशल सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन की तरफ से चलाए जा रहे कुलसुम बाई वालिका अस्पताल और आसपास के 10500 से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई. इनमें 120 लोग पॉजिटिव पाए गए. सिंध प्रांत के बच्चे इस इन्फेक्शन की चपेट में आए हैं. 

अलजजीरा के मुताबिक, लांधी इलाके में इस संस्था के एक और सेंटर में स्क्रीनिंग ड्राइव चलाई गई. इसमें 10 और मामले सामने आए. यह संस्था एक ऑटोनोमस बॉडी है. यह पूरे सिंध में औद्योगिक और कमर्शियल वर्करों और उनपर निर्भर लोगों को हेल्थकेयर, मेडिकल सुविधाएं और आर्थिक मदद में सहयोग करती है. इस अस्पताल का संकट पहली बार नवंबर 2025 में लोगों की नजर आया. यहां कराची के साइट टाउन के निवासियों ने वहां इलाज कराने वाले बच्चों में इन्फेक्शन का एक ग्रुप देखा. इसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई. जब हेल्थ डिपार्टमेंट को एचआईवी के 6 मामले मिले थे.

वहीं, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने 3 जुलाई को घटिया क्वालिटी की सिरिंज पर बैन लगाने का आदेश दिया है. वहीं हेल्थ मिनिस्टर मुस्तफा कमाल ने कहा है कि देशभर में सर्जरी से पहले HIV की जांच अनिवार्य होगी.

सिंध के मुख्यमंत्री ने पूरे मामले पर क्या कहा है? 

14 जुलाई को मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने जानकारी दी कि दो इंटरनल जांच में गंभीर कमियां पाई गई हैं. इनमें इन्फेक्शन से बचने के नियमों का ठीक पालन न करना, सिक्योरिटी इक्यूपमेंट का अपर्याप्त इस्तेमाल और सिंगल यूज सिरिंज का गलत तरीके से इस्तेमाल शामिल है. पिछले साल नवंबर में 16 एचआईवी पॉजिटिव बच्चों की पहचान की गई थी. इसके अलावा 19 जून को प्रांत के लोकपाल को एक रिपोर्ट सौंपी है. इसमें 78 इन्फेक्शन और 6 मौतों की पुष्टी हुई है. इसमें हॉस्पिटल के कुछ कर्मचारियों को प्रशासनिक और सुपरवाइजरी विफलताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है. 

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तब से यह संख्या बढ़ गई है. SESSI सेंटर पर नए इन्फेक्शन की पुष्टी हुई है. मिनिस्टर गनी ने कहा है कि सभी मामले अक्टूबर 2025 से पहले संपर्क से जुड़े हैं. मामले सामने की आशंका के बावजूद स्क्रीनिंग जारी रहेगी. 3 जुलाई को 37 डॉक्टर्स और अस्पताल कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. साथ ही 14 दिन का समय दिया गया है. गनी ने कहा है कि जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा किया जाएगा. उन्हें नौकरी से निकाला जाएगा. इसके अलावा खुद गनी ने अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदारी स्वीकार की है. उन्होंने कहा है कि अगर इस संकट को सुलझाने से मदद मिलती है, तो उन्हें इस्तीफा देने में कोई आपत्ति नहीं होगी. 

सिंध हाईकोर्ट में लगाई याचिका पर क्या कहा है? 

इससे पहले सिंध हाईकोर्ट ने एक याचिका दायर की. इसमें आरोप लगाया गया था कि यह इन्फेक्शन दोबारा इस्तेमाल की गई सीरिंज की वजह से फैला है. इसपर 4 जुलाई को पत्रकारों से बात करते हुए गनी ने कहा कि संक्रमण सीरिंज के दोबारा इस्तेमाल से नहीं फैला, बल्कि केबीवी अस्पताल ऑटो डिसेबल सीरिंज का इस्तेमाल करता है. इन्हें दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. इसके अलावा कोर्ट में डाली गई याचिका में पीड़ितों की संख्या छुपाने की बात कही गई है. 

WHO और अन्य हेल्थ एजेंसी का इस पूरे मामले पर क्या रुख?

इधर, WHO और UNAIDS ने पाकिस्तान के इस संकट को WHO के पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सबसे तेजी से फैलने वाली एचआईवी महामारी में से एक बताया था. जहां 15 सालों में 200 प्रतिशत वृद्धि हुई है. पाकिस्तान में लगभग 3 लाख 50 हजार लोग एचआईवी के साथ जी रहे हैं. इनमें लगभग 80 प्रतिशत लोगों को अपनी स्थिति के बारे में नहीं पता है. इनके अलावा सिर्फ 38 प्रतिशत बच्चों को ही इलाज मिल रहा है. अब इस पूरे मामले में सिंध हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 20 जुलाई तक एक याचिका का जवाब देने को कहा है. 

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