20 जुलाई 2026 को संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक 2026’ पेश होना था. लेकिन सदन को कल सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया. मुमकिन है कि बिल कल पेश होगा. यह विधेयक ‘वंदे मातरम’ के अपमान या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाने का प्रस्ताव है. सवाल यह है कि इस बिल से सरकार किस पर निशाना साधना चाहती है और सजा कैसे तय होगी?
सरकार किस पर निशाना साध रही है?
इस विधेयक का सबसे बड़ा मकसद ‘वंदे मातरम’ को वही कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, जो राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ को मिली हुई है. विधेयक का उद्देश्य वक्तव्य साफ कहता है, ‘वर्तमान में, ‘वंदे मातरम’ के गायन में अपमान को रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है.’
यह विधेयक ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम 1971’ में संशोधन करेगा. इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय ध्वज (धारा 2), राष्ट्रगान (धारा 3) और संविधान (धारा 1A) का अपमान करने पर सजा का प्रावधान है. नए विधेयक के साथ राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी इन राष्ट्रीय प्रतीकों की तरह कानूनी दर्जा मिल जाएगा.
सरकार का तर्क है कि वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय इतिहास में एक अनोखी जगह रखता है. वह अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों के समान कानूनी सुरक्षा का हकदार है. इस साल वंदे मातरम की रचना के 150 साल पूरे हो रहे हैं. बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने यह गीत 1876 में लिखा था, जो 1882 में उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में प्रकाशित हुआ. 1950 में इसे भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया.
सजा क्या होगी और कैसे साबित होगी?
प्रस्तावित विधेयक के तहत सजा का प्रावधान:
- अधिकतम सजा: 3 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों
- बार-बार अपराध: अगर कोई व्यक्ति पहले ही इस अपराध में दोषी ठहराया जा चुका है, तो हर बाद के अपराध के लिए न्यूनतम 1 साल की कैद की सजा का प्रावधान है
- वर्तमान कानून के समान: यह सजा वही है जो वर्तमान में राष्ट्रगान का अपमान करने पर दी जाती है
अपराध की परिभाषा:
विधेयक में सजा को ‘जानबूझकर’ किए गए अपराध से जोड़ा गया है. विधेयक में प्रस्तावित धारा 3 के मुताबिक, ‘जो कोई जानबूझकर (क) राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है, या (ख) ऐसे गायन में लगी किसी सभा में विघ्न डालता है, तो वह तीन साल तक के कारावास, जुर्माना, या दोनों से दंडनीय होगा.’
सजा कैसे साबित होगी?
- ‘जानबूझकर’ का मतलब: महज गलती से या अनजाने में हुई कोई हरकत इस कानून के दायरे में नहीं आएगी. अदालतों को यह साबित करना होगा कि आरोपी ने जानबूझकर और सचेत रूप से अपमान किया है.
- अपराध की परिभाषा: विधेयक के तहत अपराध में ‘राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालना, उसके गायन में खलल डालना या किसी भी रूप में उसका अपमान करना’ शामिल होगा.
- FIR दर्ज होगी: इस कानून के पास होने के बाद, पुलिस ‘वंदे मातरम’ से जुड़े अपराधों के लिए सीधे FIR दर्ज कर सकेगी.
- सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला: तीन महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ‘वंदे मातरम’ न गाने पर कोई दंडात्मक प्रावधान नहीं है. इसी के बाद सरकार यह विधेयक लाई है.
वंदे मातरम के विरोध का रानीतिक समीकरण क्या है?
CPI(M) ने इस बिल का सबसे ज्यादा विरोध किया है. राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास (CPI(M) ने रूल 67 के तहत नोटिस देकर इस विधेयक का विरोध किया. उन्होंने कहा:
- यह विधेयक ‘संवैधानिक समझौते’ का उल्लंघन करता है.
- संविधान सभा ने जानबूझकर राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को समान संवैधानिक दर्जा नहीं दिया.
- 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बयान का हवाला देते हुए, ब्रिटास ने कहा कि संविधान सभा ने इस पर कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं पारित किया. इस वजह से इस बयान का कोई संवैधानिक बल नहीं है.
- गीत के कुछ हिस्से हिंदू देवी-देवताओं का आह्वान करते हैं, इसलिए 1950 में एक ‘संवैधानिक समझौता’ हुआ था, जो गीत के ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्र की समावेशी प्रकृति दोनों को संरक्षित करता है.
- विधेयक अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 25 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा) का उल्लंघन करता है.
कांग्रेस का रुख:
- कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने इस विधेयक को ‘RSS-प्रेरित शक्ति का दुरुपयोग’ करार दिया.
- प्रियंका गांधी ने दिसंबर 2025 में हुई बहस के दौरान इस गीत के ‘कालक्रम’ का हवाला देते हुए PM मोदी पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया था.
- बीजेपी ने आरोप लगाया कि ‘कांग्रेस और पार्टी के लोग तंत्र वंदे मातरम से नफरत करता है.’
बीजेपी का पक्ष:
- बीजेपी ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत का अपमान करने का लंबा इतिहास होने का आरोप लगाया.
- PM मोदी ने दिसंबर 2025 में कहा था कि ‘गीत को छोटा करके’ कांग्रेस ने मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना को खुश करने की कोशिश की थी.
क्या वंदे मातरम बिल संसद में पास हो जाएगा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ‘वंदे मातरम’ बिल सरकार का वह कदम है, जो राष्ट्रीय गीत को राष्ट्रगान के समान कानूनी दर्जा देना चाहता है. सरकार का तर्क है कि ‘वंदे मातरम के गायन में अपमान को रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है.’ फिलहाल यह विधेयक राज्यसभा में पेश होने के लिए तैयार है.
अब इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पास होना है, फिर राष्ट्रपति की मंजूरी चाहिए. विपक्ष ने पूरी ताकत से विरोध की तैयारी कर ली है. यह देखना होगा कि क्या सरकार सर्वदलीय सहमति बना पाती है या यह विधेयक संसद के पटल पर ही ठंडे बस्ते में चला जाता है.
