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क्या 20 जुलाई के बाद खत्म हो जाएगा CJP आंदोलन? कुंडली बता रही है, लड़ाई अभी लंबी है


20 जुलाई का संसद मार्च रुक सकता है. जंतर-मंतर की भीड़ कुछ दिनों बाद कम भी हो सकती है. पुलिस बैरिकेड लगा सकती है, लोगों को हिरासत में लिया जा सकता है और सरकार बातचीत का आश्वासन देकर फिलहाल दबाव टाल सकती है. लेकिन क्या इन सबके बाद कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का आंदोलन खत्म हो जाएगा?

CJP की उपलब्ध स्थापना कुंडली, स्वतंत्र भारत की कुंडली, मौजूदा ग्रह स्थिति, दशा और सर्वाष्टकवर्ग को साथ रखकर देखें तो जवाब है, नहीं. आंदोलन खत्म नहीं होगा, उसका चेहरा बदलेगा.

कभी यह सड़क पर दिखाई देगा, कभी सोशल मीडिया पर. कभी मामला संसद में उठेगा और कभी अदालत की देहरी तक पहुंचेगा. कुछ समय के लिए इसकी आवाज धीमी पड़ सकती है, लेकिन जिन सवालों ने इसे जन्म दिया है, पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी, भर्ती में देरी और युवाओं की जवाबदेही, वे इतनी जल्दी पीछे जाते नहीं दिख रहे.

इस बात का ध्यान रखना होगा कि धरना खत्म होना और आंदोलन खत्म होना, दोनों अलग बातें हैं.

CJP की कुंडली का आधार

यह भविष्यवाणी 16 मई 2026, रात 11 बजकर 37 मिनट, नई दिल्ली के समय पर बनी CJP की कुंडली पर आधारित है. इस समय मकर लग्न, वृषभ राशि और कृत्तिका नक्षत्र बनता है.

किसी संगठन की कुंडली के लिए उसकी औपचारिक स्थापना, नाम की सार्वजनिक घोषणा या पहले आधिकारिक अभियान के समय को आधार बनाया जाता है. यदि उपलब्ध समय किसी दूसरी घटना से संबंधित है तो भाव आधारित परिणाम बदल सकते हैं. इसलिए इस अध्ययन को निश्चित राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि उपलब्ध गणना से निकलती दिशा के रूप में पढ़ा जाना चाहिए.

फिर भी कुंडली की राशि, ग्रहबल, दशा और मौजूदा गोचर आंदोलन के स्वभाव के बारे में काफी कुछ स्पष्ट कर देते हैं.

मकर लग्न: जल्दी शुरू नहीं होता, जल्दी खत्म भी नहीं होता

CJP की कुंडली का लग्न मकर है और इसका स्वामी शनि है. मकर लग्न किसी आंदोलन को अचानक मिली लोकप्रियता से अधिक उसकी सहनशक्ति के बारे में बताता है.

शनि की प्रकृति है, देरी, दबाव, परीक्षा और फिर संगठन. इस लग्न वाले संगठन को शुरुआती दौर में प्रशासनिक रोक, अनुमति की समस्या, कानूनी विवाद और नेतृत्व पर सवालों का सामना करना पड़ता है.

लेकिन यदि संगठन इन दबावों के बीच अपना ढांचा बना ले, तो वह लंबे समय तक बना रह सकता है. यही CJP की पहली ताकत है. यह कुंडली एक दिन का शोर पैदा करके तुरंत शांत हो जाने वाली नहीं है.

इसका कमजोर पक्ष भी कम गंभीर नहीं. मकर लग्न संगठन को जिद्दी और जरूरत से अधिक केंद्रीकृत बना सकता है. अगर फैसले कुछ चेहरों तक सीमित रहे या संवाद के सभी रास्ते बंद कर दिए गए, तो यही शनि आंदोलन को धीमा कर देगा. शनि संघर्ष लंबा करता है, पर हर संघर्ष को जीत में नहीं बदलता.

युवाओं और शिक्षा का भाव क्यों इतना महत्वपूर्ण है?

CJP की कुंडली के पंचम भाव में सूर्य, उच्च का चंद्रमा और बुध बैठे हैं. पंचम भाव विद्यार्थियों, शिक्षा, परीक्षा, विचारधारा और युवा नेतृत्व से जुड़ा माना जाता है. यही इस आंदोलन की असली जमीन है. उच्च का चंद्रमा इसे भावनात्मक जनसमर्थन देता है.

यही कारण है कि परीक्षा या भर्ती की गड़बड़ी से प्रभावित छात्र ही नहीं, उनके माता-पिता और सामान्य परिवार भी आंदोलन की बात से जुड़ सकते हैं. बुध ने इसकी भाषा को पारंपरिक राजनीतिक नारों से अलग बनाया है. सोशल मीडिया, मीम, व्यंग्य और छोटे वीडियो इसके प्रमुख हथियार बने हैं.

लेकिन इस भाव में बैठा सूर्य एक और कहानी कहता है. मकर लग्न के लिए सूर्य अष्टम भाव का स्वामी है. अष्टम भाव उन गड़बड़ियों का है, जो लंबे समय तक व्यवस्था के भीतर छिपी रहती हैं और फिर अचानक बाहर आकर संकट पैदा करती हैं.

अष्टमेश सूर्य का विद्यार्थियों के भाव में होना बताता है कि परीक्षा, पेपर लीक, परिणाम या भर्ती व्यवस्था से जुड़े विवाद बार-बार इस आंदोलन को नया कारण दे सकते हैं. जब तक समस्या जीवित है, आंदोलन को खत्म करना केवल भीड़ हटाने से संभव नहीं होगा.

आंदोलन की असली आग चौथे भाव में है

CJP की कुंडली में मंगल मेष राशि के चौथे भाव में अपनी ही राशि में बैठा है. षड्बल की गणना में भी मंगल 9.14 रूप के साथ सबसे शक्तिशाली ग्रह है.

चौथा भाव जनता, राजधानी, सड़क, भूमि और जनभावना का है. यहां बैठा शक्तिशाली मंगल लोगों को घर से बाहर निकालता है. वह विरोध को पोस्ट और हैशटैग तक सीमित नहीं रहने देता.

यही मंगल बताता है कि एक मार्च रुकने के बाद दूसरी तारीख घोषित हो सकती है. दिल्ली में रास्ता बंद हो तो आंदोलन किसी दूसरे शहर में उठ सकता है. नेतृत्व को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया जाए तो कोई दूसरा चेहरा सामने आ सकता है.

लेकिन इसी मंगल से आंदोलन को सबसे अधिक सावधान रहने की जरूरत है.

अगर भीड़ का अनुशासन टूटा, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई या किसी तरह की हिंसा हुई तो सरकार को कठोर कार्रवाई का आधार मिल जाएगा. दूसरी ओर, प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और उस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग हुआ, तो सहानुभूति आंदोलन के पक्ष में जा सकती है. CJP के लिए मंगल शक्ति भी है और सबसे बड़ा जोखिम भी.

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शनि बता रहा है, आंदोलन नेटवर्क में बदलेगा

जन्मकुंडली का शनि मीन राशि में तीसरे भाव में है. तीसरा भाव अभियान, संचार, मीडिया, यात्राओं और स्वयंसेवकों के नेटवर्क का है. मौजूदा समय में गोचर का शनि भी मीन राशि में चल रहा है. यानी जन्मकालीन और गोचर का शनि एक ही क्षेत्र को सक्रिय कर रहे हैं.

यह स्थिति बड़े जनसैलाब से अधिक धीरे-धीरे फैलने वाले संगठन की है. आंदोलन का अगला चरण शायद रोज जंतर-मंतर पर दिखाई न दे, लेकिन छोटे शहरों, छात्र समूहों और डिजिटल नेटवर्क में उसकी मौजूदगी बनी रह सकती है.

शनि का संदेश साफ है, भीड़ से संगठन बनाओ, चेहरे से व्यवस्था बनाओ और भावनाओं को जिम्मेदारी में बदलो.

यदि CJP राज्य और जिला स्तर पर जिम्मेदारियां बांटती है तो वह टिक सकती है. यदि पूरा आंदोलन कुछ लोगों की लोकप्रियता पर टिका रहा, तो वही शनि इसे थका भी देगा.

सर्वाष्टकवर्ग में 38 अंक का क्या अर्थ है?

शनि के गोचर को केवल सामान्य फलादेश मानकर निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होगा. यहां कुंडली का सर्वाष्टकवर्ग सबसे मजबूत आधार देता है. CJP की कुंडली में मीन राशि को 38 अंक मिले हैं. मीन इस कुंडली का तीसरा भाव है. सामान्यतः 28 से अधिक अंक सहयोगी माने जाते हैं. 38 अंक अभियान, संचार और संगठन के लिए असाधारण शक्ति दिखाते हैं.

इसका अर्थ है कि आंदोलन की सड़क पर मौजूदगी कम होने के बाद भी उसकी आवाज और नेटवर्क बने रह सकते हैं. तुला राशि को 35 और मकर को 34 अंक मिले हैं. तुला राजनीतिक प्रतिष्ठा तथा सार्वजनिक विस्तार का क्षेत्र है, जबकि मकर स्वयं संगठन की पहचान को दर्शाता है. ये दोनों स्थितियां CJP को चर्चा से पूरी तरह बाहर होने से बचाती हैं.

लेकिन सिंह राशि में केवल 19 अंक हैं. सिंह सत्ता, नेतृत्व और अधिकार से जुड़ा है. यही वह बिंदु है, जहां आंदोलन और उसकी राजनीतिक सफलता के बीच अंतर दिखाई देता है.

CJP आंदोलन के रूप में टिक सकती है, लेकिन सरकार से तुरंत इस्तीफा लेना या अपनी लोकप्रियता को सत्ता में बदलना आसान नहीं होगा.

मिथुन राशि में भी केवल 24 अंक हैं. यह CJP का छठा भाव है. इसका अर्थ है कि मुकदमे, सरकारी प्रक्रिया और विरोधियों से निपटने में जरूरत से ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी. यानी आवाज मजबूत है, लड़ाई लंबी है और जीत का रास्ता सीधा नहीं है.

सूर्य-गुरु की दशा आंदोलन को कहां ले जाएगी?

CJP की कुंडली में सूर्य की महादशा के भीतर गुरु की अंतरदशा 28 जून 2027 तक चल रही है. गुरु की प्रत्यंतर दशा 18 अक्टूबर 2026 तक है.

सूर्य सत्ता, सरकार, प्रतिष्ठा और मंत्री पद का कारक है. गुरु शिक्षा, कानून, संसद और नीति का प्रतिनिधित्व करता है. यह संयोग अपने आप में बताता है कि आंदोलन का सीधा संबंध शिक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही से क्यों बन रहा है.

लेकिन गुरु इस कुंडली में तीसरे और बारहवें भाव का स्वामी होकर छठे भाव में बैठा है. छठा भाव संघर्ष, विरोधी, अदालत और सरकारी प्रक्रिया का है. इसलिए सूर्य-गुरु की दशा तत्काल विजय नहीं, बल्कि लंबी संस्थागत लड़ाई दिखाती है.

सड़क पर शुरू हुआ आंदोलन आगे चलकर जांच, कानूनी याचिका, संसदीय बहस या किसी समिति की मांग में बदल सकता है. प्रदर्शनकारियों को शिक्षाविदों, वकीलों और नागरिक संगठनों का सहयोग मिल सकता है, लेकिन सरकार की मशीनरी भी मामले को लंबी प्रक्रिया में ले जाने की कोशिश करेगी.

यही कारण है कि जंतर-मंतर खाली होने के बाद भी मामला खत्म नहीं होगा.

राहु की वापसी: आंदोलन अपनी चाल बदलता रहेगा

CJP की जन्मकुंडली में राहु कुंभ राशि के दूसरे भाव में है. वर्तमान राहु भी कुंभ राशि में जन्मकालीन राहु के पास पहुंच रहा है. इसे राहु की वापसी जैसा प्रभाव माना जा सकता है.

दूसरा भाव आवाज, बयान, धन और सार्वजनिक विश्वसनीयता से जुड़ा है. राहु यहां आंदोलन को बहुत तेजी से वायरल कर सकता है. कोई एक वीडियो, बयान या सरकारी कार्रवाई अचानक इसे फिर चर्चा के केंद्र में ला सकती है.

लेकिन राहु स्थिर गति नहीं देता. इसलिए आंदोलन कभी बहुत बड़ा दिखाई देगा और कभी अचानक शांत. यह सीधी रेखा में नहीं, लहरों में चलेगा.

राहु के दौरान असली खतरा सरकार से ज्यादा भीतर से हो सकता है. नेतृत्व विवाद, फंडिंग पर सवाल, भ्रामक संदेश, फर्जी अकाउंट और किसी राजनीतिक दल द्वारा आंदोलन को अपने कब्जे में लेने की कोशिश इसकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा सकती है. यहीं CJP की असली परीक्षा होगी.

25 जुलाई के बाद आंदोलन का नया दौर

CJP के वर्षफल में 25 जुलाई से 18 सितंबर 2026 तक राहु की अवधि शुरू हो रही है. राहु यहां दूसरे भाव से संबंधित परिणाम देगा. इस दौरान आंदोलन की आवाज तेजी से फैल सकती है. नए शहर और नए छात्र समूह जुड़ सकते हैं. लेकिन जितनी तेजी से समर्थन बढ़ेगा, उतनी ही तेजी से विवाद भी सामने आ सकते हैं.

इस अवधि में भीड़ रोज एक जैसी नहीं रहेगी. कुछ दिन ऐसा लगेगा कि आंदोलन ठंडा पड़ गया है. फिर कोई नया परीक्षा विवाद, पुलिस कार्रवाई या सरकारी बयान इसे दोबारा खड़ा कर सकता है. इसलिए जुलाई के बाद भीड़ में उतार-चढ़ाव को आंदोलन का अंत मानना जल्दबाजी होगी.

भारत की कुंडली भी शांति का संकेत नहीं दे रही

स्वतंत्र भारत की कुंडली में वृषभ लग्न और कर्क राशि है. 12 सितंबर 2025 से मंगल की महादशा चल रही है. 9 फरवरी 2026 से मंगल में राहु की अंतरदशा शुरू हुई है, जो 27 फरवरी 2027 तक रहेगी.

मंगल वृषभ लग्न के लिए सप्तम और द्वादश भाव का स्वामी है. सप्तम भाव सामने खड़ी विरोधी शक्ति और सार्वजनिक संघर्ष का है. द्वादश भाव नियंत्रण, सरकारी खर्च, बंदी और अंतरराष्ट्रीय छवि से जुड़ा है.

मंगल-राहु की अवधि में युवा असंतोष का अचानक राष्ट्रीय मुद्दा बनना, पुलिस और प्रदर्शनकारियों का आमने-सामने आना तथा सरकारी छवि का विवाद में फंसना स्वाभाविक है.

यह दशा फरवरी 2027 तक चलेगी. इसलिए 20 जुलाई को मार्च रोक देने भर से युवाओं, परीक्षा और रोजगार से जुड़ा असंतोष समाप्त नहीं होगा. एक मामला शांत होगा तो दूसरा प्रश्न उठ सकता है.

जनता मजबूत है, लेकिन सरकार भी कमजोर नहीं

भारत की कुंडली के सर्वाष्टकवर्ग में वृषभ राशि को 44 अंक मिले हैं. वर्तमान मंगल इसी राशि में गोचर कर रहा है. इससे जनता और राष्ट्रीय मनोदशा में तीव्रता आती है.

दूसरी ओर शनि मीन राशि में भारत की कुंडली के एकादश भाव से गुजर रहा है. मीन को 35 अंक मिले हैं. एकादश भाव संसद में संख्या, राजनीतिक सहयोग और संस्थागत समर्थन का है.

यही दोनों पक्षों की वास्तविक स्थिति है. जनता का दबाव मजबूत है, लेकिन सरकार का संसदीय और प्रशासनिक बचाव भी कमजोर नहीं है. इसलिए न आंदोलन तुरंत गायब होगा और न सरकार तत्काल सबसे बड़ी मांग स्वीकार करेगी. इसलिए टकराव लंबा चलेगा और समाधान चरणों में निकलेगा.

आंदोलन आगे किस रूप में दिखाई देगा?

20 जुलाई के बाद CJP का आंदोलन पांच अलग रास्तों पर बढ़ सकता है. पहला रास्ता सोशल मीडिया का है. धरना कमजोर पड़ने के बाद वीडियो, दस्तावेज और छात्रों के अनुभव अभियान को जीवित रख सकते हैं.

दूसरा रास्ता राज्यों का है. दिल्ली में स्थायी भीड़ बनाए रखना कठिन होगा, लेकिन छोटे शहरों और विश्वविद्यालयों में स्थानीय प्रदर्शन हो सकते हैं.

तीसरा रास्ता अदालत का है. सूर्य-गुरु और छठे भाव का संबंध बताता है कि जांच, याचिका और कानूनी जवाबदेही आगे महत्वपूर्ण हो सकती है.

चौथा रास्ता संसद का है. विपक्ष इस मुद्दे को मानसून सत्र में उठाता है तो आंदोलन को राजनीतिक मंच मिलेगा. हालांकि इसी के साथ किसी दल की छाया में चले जाने का खतरा भी रहेगा.

पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण रास्ता मुद्दे का है. भविष्य में CJP कमजोर भी पड़ जाए, तब भी पेपर लीक, परीक्षा सुधार और भर्ती में देरी का सवाल किसी दूसरे छात्र संगठन के हाथ में जा सकता है. संगठन कमजोर हो सकता है, लेकिन मुद्दा बना रह सकता है.

आंदोलन कब किस मोड़ पर होगा?

20 से 24 जुलाई: रोक और राष्ट्रीय पहचान

संसद मार्च रोका जा सकता है. हिरासत या पुलिस से गतिरोध की स्थिति भी बन सकती है. सरकार तत्काल इस्तीफे की मांग स्वीकार नहीं करेगी. हालांकि ज्ञापन या प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से बातचीत का रास्ता खुल सकता है.

25 जुलाई से 18 सितंबर: विस्तार के साथ विवाद

यह आंदोलन के तेजी से फैलने का समय है. नए समर्थक जुड़ सकते हैं, लेकिन नेतृत्व, बयान और फंडिंग पर प्रश्न भी इसी दौर में उठेंगे. यही अवधि तय करेगी कि CJP भीड़ से संगठन बन पाती है या नहीं.

18 सितंबर से 18 अक्टूबर: सड़क से अदालत

इस समय प्रदर्शन की तुलना में जांच, याचिका, संसदीय समिति और औपचारिक बातचीत अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है. तुरंत बड़ी जीत नहीं मिलेगी, लेकिन मामले को संस्थागत आधार मिल सकता है.

18 अक्टूबर से 6 नवंबर: रणनीति बदलने की मजबूरी

आंदोलन को तय करना होगा कि वह लगातार धरने पर निर्भर रहेगा या स्थायी संगठन, कानूनी टीम और स्पष्ट नीति दस्तावेज तैयार करेगा.

6 नवंबर से 3 जनवरी: दोबारा संगठन का समय

CJP के वर्षफल में शनि की अवधि शुरू होगी. राज्यों में नेटवर्क, नियमित अभियान और लिखित संवाद मजबूत हो सकता है. आंदोलन नए रूप में फिर उभर सकता है.

26 नवंबर से 23 जनवरी: सरकार पर असली दबाव

भारत के वर्षफल में आठवें भाव से संबंधित शनि की अवधि रहेगी. जांच, प्रशासनिक संकट या छिपी हुई जानकारी सामने आने से किसी अधिकारी अथवा संस्था पर कार्रवाई हो सकती है. यदि तब तक गंभीर प्रमाण सामने आते हैं तो मंत्रालय पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ेगा.

23 जनवरी से 27 फरवरी 2027: पहले परिणाम का समय

भारत की मंगल-राहु अंतरदशा अपने अंतिम चरण में होगी. इस समय तक पता चलेगा कि सरकार ने सुधार का रास्ता चुना है या युवा असंतोष अगले राजनीतिक अभियान का आधार बन चुका है.

शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं मिला तो क्या आंदोलन समाप्त जाएगा?

अभी शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की संभावना मजबूत नहीं है. सरकार सबसे बड़ी राजनीतिक मांग को रोकते हुए कुछ प्रशासनिक मांगें स्वीकार कर सकती है. जांच समिति, परीक्षा सुरक्षा के नए नियम, प्रभावित छात्रों के लिए राहत या किसी अधिकारी को हटाने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं.

यहीं आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा हो सकता है. एक पक्ष इसे जीत मानेगा, जबकि दूसरा मंत्री के इस्तीफे तक संघर्ष जारी रखना चाहेगा. सरकार की सबसे प्रभावी रणनीति आंदोलन को पूरी तरह खारिज करना नहीं, बल्कि आंशिक राहत देकर उसके भीतर दो राय पैदा करना हो सकती है.

CJP का सबसे बड़ा खतरा क्या है?

CJP को केवल सरकारी कार्रवाई खत्म नहीं करेगी. उसके सामने अधिक गंभीर खतरे भीतर से हैं:

  • नेतृत्व का टकराव.
  • आर्थिक पारदर्शिता पर सवाल.
  • हिंसा या उग्र बयान.
  • स्पष्ट मांगपत्र का अभाव.
  • किसी राजनीतिक दल का नियंत्रण.
  • समर्थकों का भरोसा टूटना.
  • आंशिक सरकारी राहत के बाद संगठन में विभाजन.

राहु भ्रम पैदा कर सकता है और मंगल उग्रता. इन दोनों को शनि के अनुशासन से नियंत्रित करना होगा.

भीड़ कम होगी, मुद्दा नहीं

CJP की कुंडली में मकर लग्न, चौथे भाव का शक्तिशाली मंगल, तीसरे भाव का शनि, पंचम भाव में शिक्षा और युवाओं से जुड़े ग्रह तथा सूर्य-गुरु की दशा आंदोलन के तुरंत समाप्त होने का संकेत नहीं देते.

सर्वाष्टकवर्ग में तीसरे भाव की मीन राशि को मिले 38 अंक इसका सबसे ठोस आधार हैं. वहीं भारत की मंगल-राहु दशा फरवरी 2027 तक युवा असंतोष और सत्ता से टकराव को जीवित रख सकती है.

सीधी बात यह है कि 20 जुलाई के बाद जंतर-मंतर की भीड़ कम हो सकती है. संसद मार्च रोका जा सकता है. आंदोलन कुछ दिनों के लिए कमजोर भी दिखाई दे सकता है. लेकिन लड़ाई खत्म नहीं होगी.

25 जुलाई से सितंबर तक आंदोलन डिजिटल और राजनीतिक रूप से फैल सकता है. सितंबर-अक्टूबर में इसका कानूनी और संस्थागत चरण शुरू हो सकता है. नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच यह नए संगठन और नए दबाव के साथ फिर उभर सकता है.

CJP स्वयं कितना टिकेगा, यह उसके नेतृत्व, पारदर्शिता और अनुशासन पर निर्भर करेगा. लेकिन जिस युवा असंतोष ने इसे जन्म दिया है, उसके फरवरी 2027 से पहले पूरी तरह शांत होने के संकेत नहीं हैं.

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