पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने अपने 27वें स्थापना दिवस के अवसर पर जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए संवैधानिक गारंटियों को बहाल करने की मांग की है. साथ ही, पार्टी ने 5 अगस्त को राज्य भर में जिला स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. यह दिन आर्टिकल 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर के बंटवारे की 8वीं बरसी का भी दिन है.
ये घोषणाएं आज PDP पार्टी मुख्यालय में हुई वर्किंग कमेटी की बैठक में एक प्रस्ताव पास होने के बाद की गईं. इस बैठक में पार्टी के सभी बड़े नेता मौजूद थे. हालांकि, जम्मू इलाके में अचानक आई बाढ़ में लोगों की मौत और कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के कारण सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए पार्टी ने सभी जश्न वाले कार्यक्रम टाल दिए थे.
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PDP प्रदेश में करेगी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन
PDP के प्रस्ताव में कहा गया है, “पार्टी ने 5 अगस्त को पूरे जम्मू-कश्मीर में जिला स्तर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का भी फैसला किया है. इसके जरिए पार्टी इस क्षेत्र की संवैधानिक स्थिति को बहाल करने और शांतिपूर्ण व संवैधानिक तरीकों से लोकतांत्रिक और संघीय सिद्धांतों की रक्षा करने के अपने संकल्प को दोहराती है.”
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अपनाए गए प्रस्ताव के जरिए पार्टी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के विजन और आदर्शों को फिर से मजबूत करने का काम किया गया है. सुलह, बातचीत, सम्मान और समावेशी विकास की उनकी राजनीति आज भी पार्टी की दिशा तय करती है.
आर्टिकल 370, आर्टिकल 35A के बहाली की मांग
इस प्रस्ताव के जरिए आर्टिकल 370, आर्टिकल 35A और उन संवैधानिक गारंटियों को बहाल करने की मांग की गई है, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर की अनोखी पहचान और स्वायत्तता की रक्षा की थी. इसके साथ ही इस प्रस्ताव में राजनीतिक कैदियों और नजरबंद लोगों की तुरंत रिहाई, प्रिवेंटिव डिटेंशन कानूनों के दुरुपयोग को रोकने और लोकतांत्रिक अधिकारों, नागरिक स्वतंत्रता और कानून के शासन की रक्षा करने की भी मांग की गई है.
PDP ने जम्मू-कश्मीर को दक्षिण और मध्य एशिया को जोड़ने वाले गेटवे में बदलने की मांग की है. इसके लिए ऐतिहासिक सड़कों, LoC-पार के रास्तों और पारंपरिक व्यापार और यात्रा लिंक को फिर से खोलने की मांग की. PDP ने यह भी कहा कि वह कश्मीरी पंडितों और सभी विस्थापित समुदायों की सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास के अपने संकल्प पर कायम है.
शारदा कॉरिडोर की मांग
महबूबा मुफ्ती ने कहा, “हम भारत सरकार से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और कश्मीर के दोनों हिस्सों के बीच सभी व्यापारिक रास्ते फिर से खोलने की मांग करते हैं. इसमें कश्मीरी पंडितों के लिए शारदापीठ जाने का कॉरिडोर बनाना भी शामिल है.”
इसके अलावा लोगों की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए भी PDP ने इस प्रस्ताव में मांगे रखी हैं. इसमें एक लाख से अधिक सरकारी खाली पदों को पारदर्शी और योग्यता के आधार पर समय पर भरने की मांग गई है. इसके साथ ही इसमें जम्मू-कश्मीर के प्राकृतिक संसाधनों का समान इस्तेमाल, पीर पंजाल और चिनाब इलाकों के लिए बेहतर प्रशासनिक न्याय और महिलाओं के लिए बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की गई है.
पीर पंजाल और चिनाब घाटी को डिवीजनल दर्जा देने की मांग
जम्मू-कश्मीर के इतिहास के सबसे मुश्किल दौर में महबूबा मुफ्ती ने पीर पंजाल और चिनाब घाटी को डिवीजनल दर्जा देने की मांग की है. इस मांग ने एक बार फिर से क्षेत्रीय असंतुलन पर बहस को बढ़ावा दिया है. PDP के प्रस्ताव में लोगों की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी, योग्यता-आधारित और समय-सीमा वाली भर्ती प्रक्रिया, जम्मू-कश्मीर के प्राकृतिक संसाधनों का समान इस्तेमाल और महिलाओं के लिए बेहतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की गई है.
महबूबा मुफ्ती ने कहा, “ऐसे समय में जब जम्मू-कश्मीर अपने हालिया इतिहास के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है, PDP इस व्यापक प्रस्ताव के जरिए ‘सम्मान के साथ शांति’ के सिद्धांत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है. यह सिद्धांत ही स्थायी शांति का एकमात्र टिकाऊ रास्ता है, जिसमें सभी पक्षों के बीच बातचीत, सुलह, भरोसा बढ़ाने और सार्थक लोकतांत्रिक भागीदारी की वकालत की गई है.”
प्रस्ताव के आखिर में, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों, लोकतांत्रिक आजादी, संघीय मूल्यों और सम्मान की बहाली के लिए अपना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया.
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