जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए Gen-Z का आंदोलन और उनका अंदाज चर्चा में रहा. वहां रचनात्मकता के साथ साथ मीम भी देखे गए. Gen-Z ने अपने अंदाज से लोगों का ध्यान खींचा. Gen-Z के इसी अंदाज का जिक्र रोहतक से कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने लोकसभा में किया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि Gen-Z इतने प्यार से, इतनी खूबसूरत तरीके से इस्तीफा मांगते थे और कहते थे कुचु पुचु आज इस्तीफा दे दो, आज हमारा जन्मदिन है.
एंटी पेपर लीक बिल पर क्या बोले दीपेंद्र हुड्डा?
एंटी पेपर लीक बिल पर हुड्डा ने कहा कि जिन परिस्थितियों में बिल आया है, वह साबित करते हैं कि ये बिल सरकार ना तो मन, ना दिल और ना दिमाग से लाई है. क्योंकि सरकार का मन तो युवाओं की आवाज दबाने का था. लेकिन जब जब पानी नाक तक पहुंच गया, जब सरकार को यह समझ में आया कि अब सिंहासन डोल रहे हैं. जब नरेटिव नियंत्रण से बाहर हो गया तब जाकर सरकार ने आनन फानन में इस बिल की घोषणा की.
फास्ट ट्रैक कोर्ट एक जुमला है- दीपेंद्र हुड्डा
इसके आगे उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री तब इंस्टाग्राम पर आए और तब इस्तीफा भी हुआ. लेकिन मन से सरकार बिल नहीं लाई. इसके जितने प्रावधान हैं, उन प्रावधानों का हमारे मायने में कोई अर्थ नहीं है.” कांग्रेस सांसद ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट एक जुमला है. देश में 800 ट्रैक कोर्ट चल रहे हैं जिसमें ढाई लाख केस पेंडिंग हैं.”
‘संजीव मुखिया के खिलाफ 2 साल में भी CBI सबूत नहीं खोज पाई’
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2024 के पेपर लीक के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ 2 साल में भी सीबीआई सबूत नहीं खोज पाई. हुड्डा ने कहा कि अगर कानून बनाना था तो पहली पंक्ति होनी चाहिए थी कि अगली बार नीट का पेपर लीक होगा तो शिक्षा मंत्री का पहले इस्तीफा होगा. यह कानून में आना चाहिए.
युवाओं के हाथ में पत्थर नहीं संविधान था- दीपेंद्र हुड्डा
छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, ”युवाओं के हाथ में पत्थर नहीं थे. उनके हाथ में संविधान था. उनके हाथ में एक टेलीफोन था जिससे किसी ने रील बनाई, किसी ने मीम बनाया. किसी ने गीत गाया और उन्होंने दिखा दिया कि हमारे प्रजातंत्र में सवाल पूछने वाले देशद्रोही नहीं, प्रजातंत्र के पहरी हैं.”
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