छात्रों में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) से जुड़ी चुनौतियों और आत्महत्या के मामलों को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि छात्रों को मानसिक और भावनात्मक सहयोग देने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए गए हैं. मंत्रालय का कहना है कि स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम को लगातार मजबूत किया जा रहा है.
लोकसभा में दिया जवाब
लोकसभा में एक लिखित जवाब में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि छात्रों की आत्महत्या से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) अपनी सालाना Accidental Deaths and Suicides in India (ADSI) रिपोर्ट में जारी करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रों की आत्महत्या के पीछे पारिवारिक समस्याएं, प्रेम संबंध, बीमारी और परीक्षा में असफलता जैसे कारण प्रमुख हैं.
नई शिक्षा नीति का दिया हवाला
मंत्रालय ने बताया कि नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में छात्रों के Overall Development पर जोर दिया गया है. इसका उद्देश्य केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस, भावनात्मक संतुलन और नैतिक मूल्यों को भी मजबूत करना है, ताकि पढ़ाई का दबाव कम किया जा सके.
मनोदर्पण पहल की भी दी जानकारी
शिक्षा मंत्रालय की ‘मनोदर्पण’ पहल के तहत छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन, प्रशिक्षित काउंसलरों की सुविधा, ऑनलाइन काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. ‘सहयोग’ और ‘परिचर्चा’ जैसे Interactive sessions भी नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं.
यूजीसी ने दिए हैं ये निर्देश
उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यूजीसी (UGC) ने 2023 में Mental Health और Suicide Prevention से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए थे. इनमें संस्थानों से काउंसलिंग सेवाएं बढ़ाने, छात्रों पर अकादमिक दबाव कम करने, खेल और दूसरी गतिविधियों को बढ़ावा देने और जरूरतमंद छात्रों की समय रहते पहचान कर उन्हें मदद देने को कहा गया है.
उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए फ्रेमवर्क जारी
शिक्षा मंत्रालय ने जुलाई 2023 में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक Framework भी जारी किया, जिसमें Crisis Management, Suicide Prevention SOP, Student Support Network और मजबूत शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया. वहीं, जनवरी 2024 में कोचिंग सेंटरों के लिए जारी Guidelines में काउंसलिंग की सुविधा, पारदर्शी फीस व्यवस्था और छात्रों पर अनावश्यक दबाव डालने वाली प्रथाओं पर रोक लगाने जैसे प्रावधान शामिल किए गए.
टीचर्स को भी दी जा रही ट्रेनिंग
मंत्रालय ने बताया कि शिक्षकों को भी छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को समय रहते पहचानने और उनकी मदद करने के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है. मई 2024 से अब तक 4000 से ज्यादा शिक्षक अलग-अलग ट्रेनिंग प्रोग्राम, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप में हिस्सा ले चुके हैं.
सरकार के मुताबिक, सभी IIT, IIM, NIT और IIIT में अब समर्पित Mental Health या Counselling Centre मौजूद हैं, जहां छात्र जरूरत पड़ने पर Professional Counsellors और Clinical Psychologists की मदद ले सकते हैं. इसके साथ ही छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए Skill Development, Internship और Apprenticeship जैसे कार्यक्रमों का भी विस्तार किया जा रहा है.
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