Farming News: खेती में आज के वक्त आप किस फसल को उगा रहे हैं और आपका क्षेत्र कैसा है यह आपके लिए मुनाफा तय करता है. इसलिए किसानों को अपने एरिया के हिसाब से ही फसलें उगानी चाहिए. किसानों को पारंपरिक खेती के साथ ऐसी फसलों पर भी ध्यान देना चाहिए जिनकी लोकल बाजार में लगातार मांग बनी रहती है और जिनसे अच्छी कमाई हो सकती है. मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों की जलवायु कई तरह की नकदी और खाद्यान्न फसलों के लिए अनुकूल मानी जाती है.
अगर किसान मौसम, मिट्टी और बाजार की जरूरत को ध्यान में रखकर खेती करें तो कम लागत में भी बेहतर आमदनी हासिल की जा सकती है. इन दोनों राज्यों में कुछ ऐसी फसलें हैं जो हर सीजन में किसानों को बढ़िया मुनाफा दे सकती हैं. इन फसलों को सही तरीके से उगाकर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और पहले के मुकाबले ज्यादा कमाई की जा सकती है.
सोयाबीन और सरसों से मिल सकता है अच्छा रिटर्न
मध्यप्रदेश में सोयाबीन को किसानों की सबसे जरूरी नकदी फसलों में गिना जाता है. इसकी मांग खाद्य तेल बिजनेस और पशु आहार बनाने वाली कंपनियों में लगातार बनी रहती है. अच्छी बारिश और सही तरीकों के साथ इसकी पैदावार बेहतर होती ह जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है. वहीं राजस्थान में सरसों की खेती लंबे समय से किसानों की पसंद रही है. सरसों के तेल की घरेलू मांग हमेशा बनी रहती है.
इसलिए इसका बाजार भी मजबूत रहता है. अगर बढ़िया बीज, सही खाद और वक्त पर सिंचाई का ध्यान रखा जाए तो बढ़िया उत्पादन हो सकता है. कई किसान अब फसल की सीधी बिक्री के बजाय किसान उत्पादक संगठन या मंडियों के जरिए बेहतर दाम भी हासिल कर रहे हैं. बाजार की जानकारी के साथ की गई खेती इन दोनों फसलों को कमाई का बढ़िया जरिया बना सकती है.
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चना और गेहूं की खेती भी देती है अच्छी कमाई
रबी सीजन में चना और गेहूं दोनों राज्यों के किसानों के लिए कमाई का अच्छा ऑप्शन बनते हैं. चने की मांग लोकर बाजार के साथ दाल उद्योग में भी लगातार बनी रहती है. कम पानी में तैयार होने वाली यह फसल उन इलाकों के लिए भी बेहतर मानी जाती है, जहां सिंचाई की सुविधा कम है. दूसरी ओर गेहूं आज भी सबसे भरोसेमंद फसलों में शामिल है. अच्छी किस्मों और सही तरीके से खेती के जरिए इसकी पैदावार बढ़ाई जा सकती है.
अगर किसान समय पर बुवाई करें और खेत में पोषक तत्वों का ध्यान रखें तो उत्पादन की लागत को कम करते हुए अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. सरकारी खरीद व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा मिलने से भी किसानों को बाजार में बढ़िया दाम मिलते हैं. यही वजह है कि चना और गेहूं आज भी कम जोखिम वाली लाभदायक फसलों में गिने जाते हैं.

मसाला फसलें भी बढ़िया ऑप्शन
राजस्थान और मध्यप्रदेश के कई इलाकों में मसाला फसलों की खेती तेजी से बढ़ रही है. जीरा, धनिया और लहसुन जैसी फसलों की मांग देश के साथ विदेशों में भी बनी रहती है. इन फसलों में लागत बाकी फसलों के मुकाबले में थोड़ा ज्यादा हो सकती है. लेकिन सही उत्पादन मिलने पर मुनाफा भी काफी बेहतर होता है. मसाला फसलों की कीमतें बाजार की डिमांड के तहत बदलती रहती हैं. इसलिए सही समय पर बिक्री करना बेहद जरूरी होता है.
कई किसान अब स्टोरेज फैसेलिटी का इस्तेमाल करके अच्छे दाम मिलने तक अपनी उपज को आसानी से स्टोर कर के रख सकते हैं. अगर खेती के साथ ग्रेडिंग और साफ पैकिंग पर भी ध्यान दिया जाए तो खरीदारों से अच्छी कीमत मिल सकती है. जिन किसानों के पास सिंचाई की बेहतर व्यवस्था और बाजार तक पहुंच है उनके लिए मसाला फसलों की खेती एक्स्ट्रा इनकम आय का अच्छा ऑप्शन बन सकता है.

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