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Xप्लेन: नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र! पूर्व PM के बयान से क्यों गरमाई सियासत


नेपाल जो पहले हिंदू राष्ट्र था और फिर धर्मनिरपेक्ष बन गया वहां एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र के तौर पर पहचान दिलाने की मांग उठने लगी है. नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के गुट की एक कॉन्फ्रेंस इस फ़ैसले के साथ खत्म हुई कि नेपाल की राष्ट्रीय पहचान के तौर पर सनातन धर्म को बढ़ावा दिया जाएगा. यह कॉन्फ्रेंस शुक्रवार को शुरू हुई और आज खत्म हुई. इसमें पार्टी की राजनीतिक दिशा, संवैधानिक मुद्दों, अगले आम अधिवेशन और देश के मौजूदा हालात से जुड़े पांच बड़े फ़ैसले लिए गए. धर्म से जुड़ा फ़ैसला घोषणापत्र के तीसरे बिंदु में शामिल था.

हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति परंपराएं

देउबा गुट ने कहा कि नेपाल की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाएं उसकी राष्ट्रीय पहचान का अहम हिस्सा हैं. उसने कहा कि देश में लंबे समय से चली आ रही धार्मिक सहिष्णुता, सामाजिक सद्भाव और लोगों व धार्मिक समुदायों को अपनी आस्था मानने की आज़ादी की रक्षा की जानी चाहिए. घोषणापत्र में नेपाल में मौजूद हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने की भी बात कही गई.

Xप्लेन: नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र! पूर्व PM के बयान से क्यों गरमाई सियासत

इसी आधार पर, गुट ने कहा कि वह सभी समुदायों के लिए धार्मिक आज़ादी सुनिश्चित करते हुए सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान के तौर पर बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.

संवाद से संवैधानिक परिवर्तन

सम्मेलन में संविधान को भी संबोधित किया गया. इसमें कहा गया कि वर्तमान संविधान में जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप आवश्यक बदलाव किये जाने चाहिए. हालाँकि, इसमें कहा गया है कि ऐसे किसी भी बदलाव को सभी संबंधित समूहों के साथ बातचीत के माध्यम से और संविधान द्वारा पहले से ही प्रदान किए गए प्रावधानों के भीतर आगे बढ़ाया जाएगा. गुट ने कहा कि इस दृष्टिकोण का उपयोग आगे का राजनीतिक रास्ता खोजने के लिए किया जाएगा.

देउबा ने सम्मेलन में क्या कहा?

संक्षिप्त में समझें तो इस सम्मेलन में कहा गया कि देउबा किसी के विरोध में नहीं है. लेकिन उसी वक्त उनका पूरा अधिकार है कि वो खुद को हिंदू के तौर पर पहचान बताएं.उन्होंने ‘मैं हिंदू हूं’ के नारे के साथ अपनी बात रखी. उनके इस बयान को नेपाल में सनातन पहचान और हिंदू राष्ट्र को लेकर चल रही बहस के बीच अहम माना जा रहा है. बयान सामने आने के बाद देश के राजनीतिक माहौल में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

विवाद क्या है

फिर नेपाली कांग्रेस में विरोध क्यों हुआ?

नेपाली कांग्रेस के कुछ पुराने और वरिष्ठ नेताओं ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. उनका साफ कहना है कि यह उनके पुराने राजनीतिक रुख में बड़ा बदलाव माना जाएगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि नेपाली कांग्रेस खुद उस राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा रही है जिसने नेपाल को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनाया था. राष्ट्रीय सभा के दौरान इस मुद्दे पर कई नेताओं के बीच मंच पर तीखी बहस तक हुई. पूर्व उपाध्यक्ष बिमलेंद्र निधि ने प्रस्ताव की भाषा पर आपत्ति जताई और कहा कि इसे संविधान में मौजूद धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के अनुरूप होना चाहिए.

क्या देउबा खुद नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं?

नहीं, दरअसल देउबा ने सनातन पहचान की बात तो कही लेकिन यह कहीं भी नहीं कहा कि देश को हिंदू राष्ट्र बनाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि वो खुद को हिंदू बताते हुए कहा कि वह हिंदू परंपराओं का पालन करते हैं और पशुपतिनाथ मंदिर जाते हैं लेकिन धर्म को लेकर अंतिम फैसला जनता का होना चाहिए और देश में सभी को धार्मिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए.

पहले हिंदू राष्ट्र था नेपाल

नेपाल उन देशों में नहीं रहा जो हमेशा से धर्मनिरपेक्ष रहा है. पहले यह देश हिंदू राष्ट्र के तौर पर पहचाना जाता था. यहां नेपाल में लंबे समय तक हिंदू राजशाही था और दुनिया का एकमात्र आधिकारिक हिंदू राष्ट्र माना जाता था. 

Xप्लेन: नेपाल फिर बनेगा हिंदू राष्ट्र! पूर्व PM के बयान से क्यों गरमाई सियासत

एक एकजुट हिंदू राज्य के तौर पर नेपाल का इतिहास 1768 से शुरू होता है, जब राजा पृथ्वी नारायण शाह ने कई छोटे राज्यों को मिलाकर आधुनिक नेपाल की नींव रखी. शाह राजवंश के शासन में नेपाल लगभग 240 वर्षों तक हिंदू राजशाही बना रहा. देश की सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान में हिंदू धर्म की मुख्य भूमिका रही, जबकि बौद्ध धर्म और अन्य धार्मिक परंपराएं भी नेपाली समाज में गहराई से रची-बसी रहीं. राजनीतिक बदलावों के दौर में भी राजशाही बनी रही, जिसमें संवैधानिक सुधार और 1990 में बहुदलीय लोकतंत्र की स्थापना शामिल थी.

हालांकि, बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता और माओवादी विद्रोह ने आखिरकार पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दी. 2001 में शाही परिवार के नरसंहार ने राजशाही में जनता के भरोसे को और कम कर दिया. 2008 में, कई वर्षों के राजनीतिक संघर्ष और शांति प्रक्रिया के बाद, नेपाल की नवनिर्वाचित संविधान सभा ने औपचारिक रूप से राजशाही को खत्म कर दिया और देश को संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया. इस तरह, लगभग 240 वर्षों के बाद, नेपाल ने अपने राजशाही युग को समाप्त किया और सरकार की गणतंत्रात्मक प्रणाली को अपनाया.



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