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‘शिंदे गुट ने दल-बदल का भरपूर फायदा उठाया’, उद्धव गुट की दलील


महाराष्ट्र का सियासी सत्ता संघर्ष और असली ‘शिवसेना’ (Shiv Sena) की कानूनी लड़ाई पर देश की सर्वोच्च अदालत में जोरदार बहस जारी है. गरुवार (20 अगस्त) को उद्धव ठाकरे (UBT) गुट ने सुप्रीम कोर्ट में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गुट पर तीखा कानूनी प्रहार किया. ठाकरे गुट ने अदालत में दलील दी कि शिंदे गुट अभी भी “दल-बदल से मिले अनुचित फायदों” का पूरा आनंद उठा रहा है, क्योंकि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में हुई देरी का उन्हें सीधा लाभ मिला है.

प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की विशेष पीठ के समक्ष लगातार सातवें दिन इस मामले की सुनवाई हुई. यह सुनवाई निर्वाचन आयोग (Election Commission) के उस विवादित फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर हो रही है, जिसमें आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को ही असली शिवसेना मानते हुए पार्टी का मूल नाम और ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न उन्हें सौंप दिया था.

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दल-बदल का भरपूर उठाया फायदा- देवदत्त कामत

ठाकरे गुट की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत को बताया कि निर्वाचन आयोग का आदेश पूरी तरह से विधानसभा में मौजूद विधायकों के बहुमत की कसौटी पर आधारित था. उन्होंने कहा, “शिंदे गुट ने दल-बदल का भरपूर फायदा उठाया है. अदालत में समय पर सुनवाई नहीं हो पाने और स्पीकर की निष्क्रियता के कारण वे आज भी उन लाभों का आनंद ले रहे हैं.”

सुप्रीम कोर्ट का सवाल और कामत का बेबाक जवाब

बहस के दौरान जब पीठ ने कामत से मांगी जा रही राहत के दायरे और ‘किस चीज से अयोग्य ठहराए जाने’ को लेकर सवाल किया, तो वरिष्ठ वकील ने स्पष्ट कानूनी पक्ष रखा. कामत ने जवाब दिया, “अयोग्य ठहराया जाना दल-बदल के कृत्य से उत्पन्न होने वाला एक सीधा कानूनी परिणाम है. जिस तारीख को सदस्य ने अपनी मूल पार्टी से बगावत कर दल-बदल किया, कानूनी रूप से उसी तारीख से उसने अपनी सदस्यता खो दी थी.”

उन्होंने शीर्ष अदालत के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए याद दिलाया कि संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत संवैधानिक व्यवस्था को विधानसभा अध्यक्ष (Speaker) की निष्क्रियता के कारण कमजोर नहीं होने दिया जा सकता. कामत ने दावा किया कि विधानसभा अध्यक्ष का वह आदेश पूरी तरह अवैध था जिसने शिंदे गुट को मान्यता दी और उसी का सीधा असर चुनाव चिह्न के फैसले पर भी पड़ा.

वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल का तंज

इससे ठीक एक दिन पहले, बुधवार को ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी जोरदार बहस की थी. सिब्बल ने कड़े शब्दों में कहा था कि दल-बदल करने वाले शिंदे गुट को ‘असली’ पार्टी के तौर पर मान्यता देना एक “संवैधानिक पाप” को बड़ा इनाम देने के समान है.

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे गुट ने अपनी सभी दलीलें पूरी कर ली हैं. अब 2 सितंबर से एकनाथ शिंदे गुट अपना पक्ष और अंतिम दलीलें अदालत के सामने रखना शुरू करेगा, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं.

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