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आज पेश होगा महिला आरक्षण विधेयक, अखिलेश, राहुल खिलाफ, मायावती दे रहीं पीएम मोदी का साथ, पढ़ें बड़ी बातें


Women Reservation Bill 2026: संसद में विशेष सत्र के पहले महिला आरक्षण विधेयक पर आर-पार के मूड में सरकार नजर आ रही है. इस मामले में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सरकार को घेरने के मूड में है. सरकार 16 अप्रैल यानी गुरुवार को लोकसभा में नियम 66 के प्रावधान को निलंबित करने का प्रस्ताव लाएगी. इसका मकसद महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को साथ पास कराना है. 

सरकार आज तीन बिल पेश करेगी. संविधान संशोधन 131 के तहत सीटों की संख्या बढ़ाए जाने का प्रस्ताव होगा. इसके अलावा दूसरा बिल डेलिमिटेशन बिल 2026, जिसके तहत डेलिमिटेशन कमिशन का गठन किया जाएगा. तीसरा बिल यूनियन टेरिटरी लॉज ( संशोधन) 2026 होगा.  संविधान संशोधन 131 बिल और डिलिमिटेशन बिल 2026 कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पेश करेंगे. यूनियन टेरिटरी लॉज (संशोधन) 2026 गृहमंत्री की तरफ से पेश किया जाएगा.

महिला आरक्षण को लागू करने वाले बिल से जुड़ा विधेयक लोकसभा में सूचीबद्ध

महिला आरक्षण को लागू करने संबंधी विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पेश किए जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. इस बिल में साल 2029 तक महिला आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के तीन विधेयक लोकसभा में पेश होंगे. जारी किए गए बुलेटिन के मुताबिक, ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 को बहस के लिए लोकसभा में पेश किया जाएगा. बुलेटिन में कहा गया है कि लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने बहस के लिए 18 घंटे का समय आवंटित किया है. यह (बहस) शुक्रवार को भी जारी रह सकती है. लोकसभा में पारित होने के बाद ये विधेयक राज्यसभा में जाएंगे.

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विपक्षी दलों की बैठक, परिसीमन के प्रावधानों पर पुरजोर विरोध
विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास कई विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई. इसमें यह फैसला किया गया कि इसके परिसीमन से संबंधित प्रावधानों का पुरजोर विरोध किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए.

महिला आरक्षण विधेयक से पैदा हो सकता है विभाजन: कांग्रेस नेता

कांग्रेस के नेता अनंत गाडगिलने कहा कि इससे उत्तरी और दक्षिणी राज्यों के बीच भावनात्मक विभाजन हो सकता है. उन्होंने इस कानून को लाने में केंद्र सरकार की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया. जनगणना रिपोर्ट 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है. संविधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वर्गों के लिए पर्याप्त प्रतिनिधित्व का प्रावधान पहले से ही मौजूद है. संसद का तीन दिवसीय एक विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है. इस दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पेश किए जाएंगे. इसे 2029 में लागू किया जा सके. गाडगिल ने जानना चाहा कि सरकार अद्यतन आंकड़ों की प्रतीक्षा करने के बजाय एक दशक से अधिक पुराने आंकड़ों के आधार पर 29 अप्रैल से पहले विधेयक को क्यों आगे बढ़ा रही है. 

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महिला आरक्षण के नाम पर ओबीसी का हिस्सा चोरी करना चाहते हैं प्रधानमंत्री मोदी : राहुल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिला आरक्षण के नाम पर अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) का हिस्सा चोरी करना चाहते हैं, जो राष्ट्र विरोधी गतिविधि है. राहुल ने लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किए जाने से एक दिन पहले जारी वीडियो संदेश में कहा कि अगर सरकार महिला आरक्षण लागू करना चाहती है तो वह वर्तमान नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू कर सकती है और परिसीमन भी नयी जनगणना के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि उसमें ओबीसी की आबादी का आंकड़ा होगा. 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का पूरी तरह से समर्थन करती है, लेकिन सरकार इसके नाम पर कुछ और करना चाहती है. उन्होंने दावा किया किया किअब बहुत बड़ी बेईमानी की जा रही है. प्रधानमंत्री नहीं चाहते हैं कि जाति जनगणना और नयी जनगणना के आधार पर यह (महिला आरक्षण) निर्णय लिया जाए. प्रधानमंत्री आपकी (ओबीसी) भागीदारी आप से छीन रहे हैं. वह चाहते हैं कि 2011 की जनगणना का इस्तेमाल किया जाए, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्गों की संख्या नहीं है. वह आपकी (ओबीसी) भागीदारी छीनना चाहते हैं.

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पीडीए का हक मारने की बड़ी साजिश: अखिलेश

सपा के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर महिला आरक्षण के मुद्दे पर जल्दबाजी करके जनगणना को टालने की नीयत रखने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि महिला आरक्षण विधेयक दरअसल पीडीए (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग) का हक मारने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा है. 

प्रतिभा पाटिल, मीरा कुमार और मायावती ने  किया समर्थन

पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन की पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम विधायी निकायों में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करेगा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में पाटिल ने कहा कि ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन कानून औपचारिक रूप से महिलाओं की अपार क्षमता को पहचान देगा और शासन के उच्चतम स्तर पर उनके नेतृत्व के लिए संस्थागत रास्ते तैयार करेगा.

पाटिल ने कहा, ‘मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के ऐतिहासिक कार्यान्वयन की पहल के लिए अपनी हार्दिक सराहना करता हूं. भारत की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में मैंने लंबे समय से इस विश्वास का समर्थन किया है कि वास्तविक महिला सशक्तीकरण केवल राष्ट्र को प्रभावित करने वाले निर्णयों को आकार देने के लिए उन्हें समान अवसर प्रदान करके ही प्राप्त किया जा सकता है.’ मीरा कुमार और मायावती ने भी कहा कि भले ही यह एक लंबा इंतजार रहा हो, लेकिन देश के विधायी निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कार्यान्वयन लंबे संघर्ष के बाद एक सुखद अंत होगा.

 



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