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क्या है बिकनी पहन गंगा जी में स्नान करती दिखी महिला की हकीकत, हो जाएंगे हैरान


गंगा के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आती है. कोई गंगा में डुबकी लगाकर पूजा करता है तो कोई दूर-दूर से सिर्फ इस पवित्र नदी के दर्शन करने पहुंचता है. ऐसे में जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें एक महिला को गंगा में बिकनी पहनकर स्नान करते हुए दिखाया गया. देखते ही देखते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और कमेंट सेक्शन में बहस शुरू हो गई. लोग धार्मिक आस्था से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं. और महिला की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन इस पूरे मामले में ऐसा मोड़ है जिसकी असलियत जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

 हरिद्वार का बताकर वायरल किया गया महिला का वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को हरिद्वार का बताया जा रहा है. इसमें एक महिला गंगा के पानी में स्नान करती नजर आती है और वीडियो में उसके कपड़े बिकनी जैसे दिखाई दे रहे हैं. और लोग इस पहनावे को लेकर सवाल उठाने लगे. लेकिन असल वीडियो में महिला ने पीले रंग का सूट पहने डूबकी लगाती हुई नजर आती है. कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में महिला का नाम सोनम यादव भी बताया गया और वीडियो को हालिया घटना के तौर पर शेयर किया गया. इसी वजह से देखते ही देखते वीडियो पर लोगों की नजर पड़ने लगी और बहस शुरू हो गई.

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असल में बिकनी वाला वीडियो AI से बदला गया

मामले की जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा बिकनी वाला वीडियो असली नहीं है. इसमें AI एडिटिंग की मदद से महिला के कपड़ों को बदल दिया गया है. यानी जिस वीडियो को देखकर लोग महिला के पहनावे पर सवाल उठा रहे थे, उसमें ही डिजिटल तरीके से बदलाव किया गया. वायरल क्लिप के पीछे मौजूद असली  वीडियो में महिला की . असली फुटेज में वह गंगा के पानी में रेलिंग के पास खड़ी नजर आती है और पीले रंग के पारंपरिक कपड़े पहने हुए है. आसपास दूसरे लोग भी मौजूद हैं. वह सामान्य तरीके से गंगा में स्नान करती दिखाई देती है.  सोशल मीडिया पर वायरल किए गए वीडियो में उसके कपड़ों को बदलकर पूरी स्थिति को अलग तरीके से पेश किया गया.

वीडियो की असलियत सामने आने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं

वीडियो की सच्चाई सामने आने के बाद कमेंट सेक्शन में लोगों का गुस्सा अब वीडियो में दिख रही महिला के बजाय AI के गलत इस्तेमाल पर नजर आ रहा है. कई यूजर्स का कहना है कि किसी महिला के कपड़ों और वीडियो के साथ इस तरह छेड़छाड़ करना बेहद गलत है. लोगों ने कहा कि AI का इस्तेमाल किसी की प्राइवेसी और सम्मान को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं होना चाहिए. कई यूजर्स ने यह भी सवाल उठाया कि अगर तकनीक इतनी आसानी से किसी की तस्वीर या वीडियो बदल सकती है, तो ऐसे मामलों में फेक कंटेंट बनाने वालों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए.

वायरल वीडियो देखकर तुरंत न बनाएं अपनी राय

यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि AI के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली हर चीज को सच मान लेना कितना मुश्किल हो गया है. किसी वीडियो को देखकर तुरंत गुस्सा करने या किसी व्यक्ति पर टिप्पणी करने से पहले यह देखना जरूरी है कि वीडियो असली है या उसमें किसी तरह की एडिटिंग की गई है.खासकर किसी महिला की तस्वीर या वीडियो से जुड़ा मामला हो तो बिना जांच के उसे शेयर करना उसकी छवि और सम्मान को नुकसान पहुंचा सकता है.

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