पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच कूटनीतिक कोशिशें तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का एक नया दौर सोमवार (20 अप्रैल 2026) को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में होने की संभावना है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल रविवार (19 अप्रैल 2026) को इस्लामाबाद पहुंच सकते हैं.
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है, जब पूरे क्षेत्र में युद्ध को रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. इसी बीच कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की. इस बैठक में क्षेत्र में शांति स्थापित करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया गया. कतर और तुर्किए ने इस दिशा में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना भी की है.
आसिम मुनीर का ईरान दौरा
यह बैठक तुर्किए में हुए एंटाल्या डिप्लोमेसी फोरम के दौरान हुई थी, जहां कई देशों के नेता मौजूद थे. वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने गुरुवार को तेहरान में ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ से मुलाकात की. यह मुलाकात भी अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू कराने की कोशिशों का हिस्सा मानी जा रही है. आसिम मुनीर बुधवार को तेहरान पहुंचे थे, जहां उनका स्वागत ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया. इस दौरे का मकसद दोनों देशों के बीच दूसरी दौर की बातचीत के लिए माहौल तैयार करना है, क्योंकि इससे पहले हुई बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था.
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पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत
इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल को हुई शांति वार्ता एक अहम कोशिश थी, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच 39 दिन से चल रहे युद्ध को खत्म करने की बात हुई थी. पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई यह बातचीत ऐतिहासिक तो रही, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकल सका. इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू किया गया है. इसे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि उन्होंने लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत की, जिसके बाद दोनों पक्ष इस अस्थायी युद्ध विराम पर सहमत हुए. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब इजरायल-लेबनान सीमा पर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए थे.
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