शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत की ओर से दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत के संबंध में मझगांव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने BJP नेता और मंत्री नितेश राणे के खिलाफ एक जमानती वारंट जारी किया है. नितेश राणे ने 7 मई को एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि संजय राउत आने वाली 10 जून तक राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में शामिल हो जाएंगे. इस बयान के जवाब में राउत ने बाद में मानहानि का मुकदमा दायर किया.
जब मझगांव कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी, तब नितेश राणे ने सेशंस कोर्ट का रुख किया और अनुरोध किया कि मामले की सुनवाई किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित कर दी जाए.
नितेश राणे लगातार दो तारीखों पर सुनवाई के लिए नहीं हुए पेश
हालांकि, सेशंस कोर्ट ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया. इसके बाद, चूंकि नितेश राणे लगातार दो तारीखों पर सुनवाई के लिए अदालत में पेश नहीं हुए, इसलिए मझगांव कोर्ट ने अब उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है. बहरहाल, अब नितेश राणे को अदालत में पेश होना होगा और जमानत लेनी होगी.
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टीसीएस के बीपीओ में कथित धर्मांतरण पर क्या बोले नितेश राणे?
महाराष्ट्र में बीजेपी नेता और मंत्री नितेश राणे अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में रहते हैं. टीसीएस कंपनी के बीपीओ में कथित धर्मांतरण मामले में भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसकी तुलना कॉरपोरेट जिहाद से की है. राणे ने गुरुवार (16 अप्रैल) को कहा था कि इस तरह जिहादी गतिविधियों को रोकने के लिए कंपनियां भविष्य में सिर्फ हिंदुओं को नौकरी देने की पॉलिसी अपना सकती हैं.
बीजेपी नेता राणे ने चेतावनी देते हुए कहा कि हम समाज को बांटने का प्रयास नहीं कर रहे हैं, बल्कि जमीनी अनुभव के आधार पर ये बात कर रहे हैं. अगर रोजगार का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए किया जा रहा है कि तो हिंदू कर्मचारी को प्राथमिकता देना वक्त की मांग है. ‘हिंदू राष्ट्र’ को मजबूत करने के लिए ऐसा करना जरूरी है.
