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प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत का सच क्या? शरीर पर चोटें, धोती पर खून


प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य दीपक कुमार (रसिक दुलारी सरन) की संदिग्ध मौत का मामला गहराता जा रहा है. रसिक के शरीर पर ऐसे जख्म मिले हैं जिसे देखकर लगता है कि रसिक के साथ कुछ बुरा हुआ था, जो जांच के बाद ही सामने आ सकेगा. दावा है कि उनके शरीर पर कई चोटों के निशान थे और उनकी धोती पर भी खून लगा था. 

रसिक के परिजनों ने आश्रम पर आरोप लगाया है कि उन्हें उनके बच्चे से मिलने नहीं दिया जाता था. आश्रम इसे खुदखुशी बता रहा है लेकिन लोगों ने इसपर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि कोई भी कैसे खुदखुशी से पहले अपने ही प्राइवेट पार्ट को काटेगा और फिर उसे ग्राइंड करने के बाद 4 मंजिला इमारत से छलांग लगा लेगा? 

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पुलिस ने मामले पर क्या कहा?

इस मामले पर SP सिटी राजीव कुमार सिंह ने कहा, “यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे हुई. मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले रसिक बिहारी शरण (असली नाम दीपक लोधी) केली कुंज में एक भक्त के तौर पर रह रहे थे. संदिग्ध हालात में चार मंजिला रिहायशी इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई. पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और उनके कमरे और फोन समेत फॉरेंसिक सबूत इकट्ठा कर रही है. उनके परिवार वाले जबलपुर से आ गए हैं. जरूरी कार्रवाई पूरी होने के बाद शव परिवार को सौंप दिया जाएगा.

उन्होंने बताया कि इस मामले में पुलिस को एक लिखित शिकायत भी मिली है और जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.  शुरुआती तौर पर ऐसा लगता है कि उन्होंने इमारत से छलांग लगाई थी.  घटना के पीछे के हालात और वजहों की जांच की जा रही है और पुलिस सभी जरूरी सबूत इकट्ठा कर रही है. पुलिस को जो सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, उन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा है. 

परिजनों ने मामले पर क्या कहा?

परिजनों का दावा है कि उन्हें खबर मिली थी कि दीपक गिर गया है और ऑपरेशन चल रहा है. वो सुबह 3  बजे ही सूचना मिलते ही पहुंच गए थे, लेकिन सुबह 9 बजे तक उन्हें आश्रम में ही बिठाए रखा गया.  अब आश्रम के प्रबंधकों पर परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें रसिक से मिलने नहीं दिया गया और न देखने दिया गया. वहीं, मृतक की बहन ने कहा, “मुझे दोपहर करीब 1 बजे फोन आया कि दीपक गिर गए हैं और उनकी सर्जरी हो रही है, और मुझे जल्दी आना चाहिए. हम यहां आए और इधर-उधर देखते रहे, यह पता लगाने की कोशिश करते रहे कि क्या हुआ है, लेकिन हमें कोई जानकारी नहीं मिल सकी. मैं पिछले दो सालों से उनसे मिलने की कोशिश कर रही थी, लेकिन हमारी बात नहीं हो पाई. हमें बताया गया था कि वह किसी दूसरे आश्रम में सेवा कर रहे थे.”

परिवार का आरोप कई घंटों बिठाए रखा

वहीं, दीपक के भाई ने कहा, “असल में, हमें ज़्यादा कुछ नहीं पता कि क्या हुआ. हमें फ़ोन पर बताया गया कि वो गिर गए थे और उन्हें ऑपरेशन के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है. हम सुबह करीब 3 बजे यहां पहुंचे और प्रेमानंद महाराज के आश्रम गए. हमने उनके बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने हमें बाहर इंतजार करने को कहा. हमने सुबह करीब 8 बजे तक इंतजार किया, लेकिन किसी ने हमें कोई जानकारी नहीं दी. हम सुबह करीब 9 बजे वहां से निकले और यहां आए, लेकिन फिर भी किसी ने हमें कुछ नहीं बताया. वो 2024 से यहां रह रहे थे. गुरु दक्षिणा लेने के कारण हमें उनसे मिलने की इजाजत नहीं थी. जब भी हम उनसे मिलने जाते, वे हमें एक-दो घंटे इंतजार करने को कहते और फिर मुलाकात को टालते रहते.”

आश्रम प्रबंधक पर सवाल

बताा दें कि रसिक दुलारी सरन को लगभग तीन महीने पहले गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल पर एक कमरा आवंटित किया गया था और तबसे वो यहीं रह रहे थे. प्रेमानंद महाराज से जुड़े करीब 50 शिष्य भी इसी भवन में रहते हैं. अब इस आश्रम में हुई एस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. यही नहीं आश्रम प्रबंधकों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने परिजनों को इतनी देर तक क्यों बिठाए रखा? वहीं, इस घटना पर वृंदावन के संतों ने चिंता जाहिर की है. एक संत ने तो कहा कि कोई भी व्यक्ति अपना प्राइवेट पार्ट काटकर आत्महत्या नहीं करता है.  वहीं, पुलिस जांच कर रही है कि आखिर उस रात क्या हुआ था? क्या रसिक की मौत हो गई थी?

कौन थे रसिक दुलारी?

रसिक दुलारी मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे और करीब 2 साल पहले वो वृंदावन आये थे. वृंदावन में उन्होंने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली और अपना नाम दीपक लोधी से बदलकर रसिक दुलारी सरन रख लिया. रसिक का एक छोटा भाई और एक बड़ी बहन है. परिजनों का कहना है कि दीक्षा लेने के बाद से रसिक का अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं रहा. रसिक की मां एक साल पहले भी वृंदावन आई थी लेकिन उनका दावा है कि आश्रमवालों ने रसिक से मिलने तक नहीं दिया. परिजनों का दावा है कि आश्रमवालों ने गुरु दक्षिणा लेने के बाद से उन्हें मिलने नहीं दिया और हर बार कोई न कोई बहाना बना देते थे. 

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