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Explained: रील लाइफ खत्म तो मौत को लगा रहे गले… शौहरत की कमी कैसे मार देती?


सबसे पहले यह 5 बड़े नाम पढ़िए…

  • मिषा अग्रवाल: 24 साल की इन्फ्लूएंसर. अप्रैल 2025 में आत्महत्या की. इंस्टाग्राम पर 3.5 लाख फॉलोअर्स थे, लेकिन सपना था- 10 लाख फॉलोअर्स. बहन मुक्ता ने बताया कि फॉलोअर्स घटने लगे तो वो डिप्रेशन में चली गई.
  • RJ सिमरन: दिसंबर 2024 में 25 साल की इन्फ्लूएंसर गुरुग्राम फ्लैट में मृत मिलीं. इंस्टाग्राम पर 7 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे और वो ‘जम्मू की धड़कन’ के नाम से मशहूर थीं. परिवार ने कहा कि वो कुछ समय से उदास थीं.
  • सिया कक्कर: जून 2024 में 16 साल की इन्फ्लूएंसर ने आत्महत्या की. टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर उनके 10 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे.
  • प्रतीक पटेल: 1 अप्रैल 2025 प्रतीक ने अपने घर के पास वाले क्रिकेट ग्राउंड में जहर पी लिया. 3 अप्रैल को डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया.सूरत के 21 साल के प्रतीक के फॉलोअर्स 7,923 पर ही अटक गए थे.

और अब 16 लाख फॉलोअर्स वाली ‘मिस प्रिटी इंडिया’ ने भी खुदकुशी कर ली. मध्य प्रदेश के सिंगरौली में 30 साल की इन्फ्लुएंसर निधि तिवारी की मौत ने एक बार फिर वो सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब ढूंढे नहीं मिलता. आखिर लाखों फॉलोअर्स वाले ये डिजिटल सितारे खुद को क्यों खत्म कर रहे हैं?

इन्फ्लूएंसर्स की खुदकुशी की वजहें क्या हो सकती हैं?

इसका जवाब एक नहीं, कई परतों में छिपा है. सबसे गहरी परत है जब पूरी पहचान, इनकम और सेल्फ-वर्थ एक ही नंबर पर टिकी हो और वो नंबर गिरने लगे, तो बचने के लिए कुछ नहीं बचता.

  • फॉलोअर्स गिरना: क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट निशिता श्रीवास्तव के मुताबिक, क्रिएटर्स को लाइक्स और अप्प्रिसिएशन से वैसा ही ‘हाई’ मिलता है, जैसा नशे से मिलता है. जब वो हाई फीका पड़ने लगता है, तो इंसान और ज्यादा वैलिडेशन के पीछे भागता है. नतीजतन, सेल्फ-एस्टीम और मूड पूरी तरह इस बात पर निर्भर हो जाता है कि कंटेंट कैसा परफॉर्म कर रहा है. इसी को साइकोलॉजिस्ट ‘आइडेंटिटी क्राइसिस’ कहते हैं. यानी जब आपकी पहचान ‘मैं कौन हूं’ से हटकर ‘मेरे कितने फॉलोअर्स हैं’ बन जाए.
  • एल्गोरिदम की मूड स्विंग्स: इंस्टाग्राम और यूट्यूब का एल्गोरिदम पल-पल बदलता है. आज जो रील वायरल, कल वो ही 10 लोगों तक नहीं पहुंचती. साइकोलॉजिस्ट राशि गुरनानी इसे ‘द एल्गोरिदम्स मूड स्विंग्स’ कहती हैं. क्रिएटर हर वक्त हाइपरविजिलेंट रहता है कि अगला पोस्ट चलेगा या नहीं.
  • पैसे की चाहत: भारत में 4.5 करोड़ से ज्यादा क्रिएटर्स हैं. कोफ्लुएंस 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से सिर्फ 4.5 से 6 लाख ही कमाई कर पाते हैं. 88% क्रिएटर्स अपनी आमदनी का 25% से भी कम सोशल मीडिया से कमाते हैं. 1,000–10,000 फॉलोअर्स वाले नैनो क्रिएटर्स की एक रील पर कमाई 500 रुपये से 5,000 रुपये तक ही होती है.
  • ऑनलाइन हिंसा: साइबरबुलिंग सीधे जान ले रही है. जम्मू की इन्फ्लूएंसर रोनिशा सत्ती ने आत्महत्या की कोशिश की और आरोप लगाया कि पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई नहीं की. टीन फैशन इन्फ्लूएंसर प्रांशु यादव ने दिवाली रील में साड़ी पहनने पर मास बुलिंग के बाद आत्महत्या की. 18 साल की न्जान प्यारू ने जून 2024 में साइबरबुलिंग के बाद जान दी. उनके 112K फॉलोअर्स थे.

आखिर फैम कम क्यों होती है?

इसकी सबसे बड़ी वजह है एल्गोरिदम. इंस्टाग्राम और फेसबुक का एल्गोरिदम लगातार बदलता रहता है. एक दिन आपकी रील वायरल होती है, अगले दिन वही कंटेंट 10 लोगों तक नहीं पहुंचता.

Ikigai Law की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 4 मिलियन से ज्यादा क्रिएटर्स में से 80% हफ्ते में कम से कम एक बार भारी तनाव महसूस करते हैं, 62% बर्नआउट रिपोर्ट करते हैं और 52% को काम से जुड़ी एंग्जायटी रहती है.

इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म Quroz की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इन्फ्लुएंसर्स की संख्या 4 साल में 322% बढ़ी है. 2020 में 9.6 लाख से 2024 में 40.6 लाख. यानी मार्केट में भीड़ बढ़ रही है, लेकिन पैसा और अटेंशन सबको नहीं मिल रहा.

Ipsos Market Essentials (जुलाई 2025) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेंटल विटैलिटी टॉप हेल्थ कंसर्न है, जिसे 59% लोग प्राथमिकता मानते हैं. इसमें लो एनर्जी (32%), मेंटल हेल्थ स्ट्रगल (29%), फटीग (16%) और इनसोम्निया (13%) शामिल हैं.

लाइक्स और फॉलोअर्स… ये नशा है

इंडियन जर्नल ऑफ साइकोलॉजिकल मेडिसिन में छपी एक स्टडी के मुताबिक, भारतीय किशोरों और युवाओं में सोशल मीडिया वैलिडेशन की भूख सीधे तौर पर कम सेल्फ-एस्टीम से जुड़ी है. यानी जितना ज्यादा आप लाइक्स और कमेंट्स के पीछे भागेंगे, उतना ही आपकी अपनी कीमत कम होती जाएगी.

साइकोथेरेपिस्ट डॉ. रागिनी सिंह के मुताबिक, सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि कई युवाओं के लिए जरूरत बन गया है. डॉ. नाहिद डेव कहती हैं कि इन्फ्लुएंसर की जिंदगी में वैलिडेशन कम होने पर मेंटल हेल्थ पर सीधा असर पड़ता है.

तो आखिर बचने का रास्ता क्या है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ नहीं बदलेगा अगर सिर्फ फॉलोअर्स और लाइक्स को जीवन का पैमाना माना जाएगा. लेकिन इन्फ्लुएंसर्स के लिए मेंटल हेल्थ सपोर्ट, प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही और फॉलोअर्स की संख्या किसी की कीमत तय नहीं करती जैसी बातें समझाना बेहद जरूरी है.

मिषा की बहन ने जो लिखा था, वो हर क्रिएटर को याद रखना चाहिए, ‘इंस्टाग्राम असली दुनिया नहीं है और फॉलोअर्स असली प्यार नहीं हैं.’

अगर आप या आपका कोई जानने वाला मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो Tele Manas (14416) या iCALL (9152987820) पर कॉल करें. ये नंबर मुफ्त और 24 घंटे उपलब्ध हैं.



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