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तेजस फाइटर जेट डिलीवरी में देरी पर बोले एयर चीफ – ‘इससे भारतीय वायु सेना को…’


एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने कहा है कि “तेजस लड़ाकू विमानों को शामिल करने में हो रही ज़्यादा देरी से भारतीय वायु सेना (IAF) को नुकसान हो रहा है. यह ऐसे समय में हो रहा है, जब सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए हवाई ताकत बहुत ज़रूरी होती जा रही है. लड़ाकू जेट स्क्वाड्रन की संख्या कम हो रही है.”

वायु सेना दिवस से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, IAF प्रमुख ने यह भी कहा कि “वायु सेना को अगले कुछ वर्षों तक हर साल कम से कम 36-40 लड़ाकू जेट शामिल करने की जरूरत है.” उन्हें उम्मीद है कि देश में बने तेजस मार्क-1A विमानों और मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के तहत खरीदे जाने वाले राफेल लड़ाकू जेट के शामिल होने से स्थिति में सुधार होगा.

फ्रांस से जल्द होगी डील

एयर चीफ मार्शल सिंह ने कहा कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो भारत इस फाइनेंशियल ईयर में MRFA डील को अंतिम रूप देने पर विचार कर रहा है. भारत ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस खरीद प्रक्रिया के तहत, फरवरी में फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार (G2G) फ्रेमवर्क के तहत 114 राफेल लड़ाकू जेट खरीदने के लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी.

उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच बातचीत का ज़िक्र करते हुए कहा, “यह योजना भारतीय वायु सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने के लिए लगभग दो दशक पहले शुरू की गई थी. इस प्रोजेक्ट से जुड़ी कीमत पर बातचीत और अन्य अहम मुद्दों को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है.”

देरी से सेना को हो रहा नुकसान

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा जेट की सप्लाई में देरी के बारे में जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “इससे हमें नुकसान होगा.” फरवरी 2021 में, रक्षा मंत्रालय ने IAF के लिए 83 तेजस Mk-1A जेट खरीदने के लिए HAL के साथ 48,000 करोड़ रुपये की डील की थी. एयरक्राफ्ट का पहला सेट मार्च 2024 में डिलीवर किया जाना था. हालांकि, अब तक IAF को एक भी जेट नहीं मिला है.

IAF इन लड़ाकू विमानों को शामिल करना चाहती है, क्योंकि इसके फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या आधिकारिक तौर पर मंज़ूर 42 से घटकर 29 रह गई है. रक्षा मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में IAF के लिए 97 तेजस MK-1A लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए HAL के साथ 62,370 करोड़ रुपये की एक और डील की थी.

ज्यादा देरी हुई तो तलाशेंगे दूसरे रास्ते

एयर चीफ मार्शल ने कहा कि IAF तेजस मार्क-1A जेट, MRFA प्रोग्राम के तहत एयरक्राफ्ट, तेजस मार्क 2 और एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के तहत कॉम्बैट प्लेन मिलने का इंतज़ार कर रही है. साथ ही, उन्होंने कहा कि अगर AMCA प्रोग्राम में देरी होती है, तो IAF को किसी दूसरे प्लेटफ़ॉर्म को खरीदने पर विचार करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि रूस ने Su-57 जेट की पेशकश की है, लेकिन इस पर कोई फ़ैसला नहीं लिया गया है.

थिएटर कमांड पर सरकार करेगी फैसला

प्रस्तावित थिएटर कमांडों के प्लान पर अपना रुख साफ करते हुए वे बोले, “ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रस्तावित स्ट्रक्चर को नए नज़रिए से देखा जा रहा है. उन्होंने कहा, “मैंने साफ़ कर दिया है कि भारतीय वायु सेना थिएटर कमांड के ख़िलाफ़ नहीं है. हम इस दिशा में काम कर रहे हैं और हम लगातार चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं.” एयर चीफ मार्शल ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद थिएटर कमांडों के प्लान पर चर्चा ने थोड़ा अलग रुख़ अख्तियार किया है.”

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें कुछ प्रत्यक्ष अनुभव मिले. सरकार ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करने के लिए 2019 में थिएटर कमांडों के प्लान की घोषणा की थी. हालांकि, इसमें कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है. थिएटर कमांड के मॉडल के तहत, सरकार सेना, वायु सेना और नौसेना की क्षमताओं को एकीकृत करना चाहती है और युद्धों और ऑपरेशनों के लिए उनके संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है.

IAF प्रमुख ने कहा कि सरकार इस बात पर फ़ैसला करेगी कि थिएटर कमांड के लिए किस तरह का संगठन बनाया जाए, इसे किस क्रम में बनाया जाए, और क्या इसे एक बार में किया जाए या धीरे-धीरे. उन्होंने बिना ज़्यादा विस्तार में गए कहा, “मुझे यकीन है कि जब हम सरकार के सामने ये विकल्प रखेंगे, तो वे इस पर फ़ैसला लेंगे.” थिएटर कमांड के प्लान के तहत, हर थिएटर कमांड में आर्मी, नेवी और एयर फ़ोर्स की यूनिट्स होंगी और वे सभी एक साथ मिलकर किसी खास इलाके में सुरक्षा चुनौतियों से निपटेंगे. अभी आर्मी, नेवी और एयर फ़ोर्स के कमांड अलग-अलग हैं.

भारतीय वायु सेना तकनीक के साथ अग्रसर

एयर चीफ मार्शल सिंह ने मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात में एयर पावर की बढ़ती अहमियत पर भी ज़ोर दिया और कहा कि भारत को अपनी एयर पावर और बढ़ानी चाहिए. IAF के आधुनिकीकरण पर उन्होंने कहा कि फ़ोर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मज़बूत करना होगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अहम फ़ैसले इंसान ही लेंगे. उन्होंने कहा, “हमें AI-युक्त फ़ोर्स की ज़रूरत है.” एयर चीफ़ मार्शल ने भारत में ही फ़ाइटर जेट इंजन बनाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया.



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