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नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब, राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार


बॉलीवुड एक्टर नाना पाटेकर के निधन की खबर ने 8 अक्तूबर की सुबह लोगों की नींद ही उड़ा. उनकी मौत से परिवार ही नहीं बल्कि देशभर के लोग और उनके चाहने वाले काफी इमोशनल हो गए हैं. लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी. इसी के साथ ही उनके अंतिम दर्शन के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ गई है. 

नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार पुणे में किया जाएगा. लेकिन इसके पहले गोवा में भी उनके अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को रखा गया था, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ गई थी. उनके चाहने वालों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी है.

हर वक्त पिता के पार्थिव शरीर के पास रहे बेटे मल्हार

पिता नाना पाटेकर के निधन के बाद मल्हार को काफी इमोशनल और सदमे में देखा गया. वो अंतिम दर्शन के दौरान पिता के पार्थिव शरीर के पास हर पल खड़े दिखे. इस दौरान इन्हें व्हाइट कुर्ता पायजामा में देखा गया और उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार ही सिर भी मुंडवा लिया था. ये पल बेहद ही भावुक कर देने वाला था. नाना पाटेकर के करीबी और चाहने वाले उनके अंतिम दर्शन कर खुद को रोक नहीं पाए. उनका पार्थिव शरीर देखकर हर किसी की आंखों से आंसू छलक गए.

पुणे में भी राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

गोवा में अंतिन दर्शन के साथ नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर पुणे में स्थित उनके फार्म हाउस में लाया गया, जहां पर अंतिम यात्रा के लिए खास तैयारियां की गई है. पुणे में ही उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहां से फोटोज और वीडियोज भी सामने आई हैं. इसमें पुलिस बल को भी तैनात किया गया है. क्योंकि यहां भी उनके चाहने वालों की कमी नहीं है. उनके अंतिम दर्शन के लिए लोग पहले ही पहुंच गए हैं. 

नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जन सैलाब, राजकीय सम्मान से होगा अंतिम संस्कार

अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ियां जमा कर रखी है…

गौरतलब है कि नाना पाटेकर ने सितंबर 2023 में ‘द वैक्सीन वॉर’ के प्रमोशन के दौरान आज तक’ को दिए गए एक इंटरव्यू में अपनी अंतिम घड़ी से जुड़ी चीजों को शेयर किया था. एक्टर ने इस दौरान जानकारी दी थी कि वो मौत में यकीन रखते हैं और जानते हैं कि एक दिन उन्हें जाना ही होगा. अपने अंतिम संस्कार के बारे में बात करते हुए अभिनेता ने बताया था कि उनिहोंने पहले ही 12 मन सूखी लकड़ियां जमा कर रखी हैं क्योंकि उनका मानना था कि अगर गीली लकड़ियों को जलाया जाएगा तो इससे धुआं उठेगा और वहम हो जाएगा कि लोग उनके लिए रो रहे हैं. तो वो जाते समय कोई वहम लेकर नहीं जाना चाहते.



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