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यूपी: SIR में कटे 85854 वोटरों के नाम? आयोग ने इस मामले पर दी सफाई


उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के दौरान 85, 854 मतदाताओं के नाम ऑटोमैटिक सॉफ्टवेयर के जरिए फॉर्म-7 से काटे जाने का दावा एक रिपोर्ट में किया गया था, जिसका खंडन अब मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा किया गया है. जिसमें खबर को पूरी तरह भ्रामक बताया गया है और चुनाव आयोग की छवि खराब करने वाला बताया है.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा इसको लेकर एक विस्तृत प्रेस नोट जारी किया गया है. जिसमें SIR प्रक्रिया का पूरी पारदर्शिता से पालन करने का दावा किया जा रहा है और खबर में उठाए गए बिन्दुओं पर अपनी आपत्ति जाहिर की गई है.

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खबर में क्या है दावा ?

निर्वाचन आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि जो खबर प्रसारित की गयी, उसमें दावा किया जा रहा है,”SIR प्रक्रिया के तहत बिना कारण के ऑटोमैटिक जनरेटेड फॉर्म-7 के द्वारा 85,854 मतदाताओं के नाम डिलीट कर दिए गए.” जबकि आयोग का दावा है कि UP SIR प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शिता के साथ की गयी हिया, जिसमें 27 अक्टूबर 2025 को चुनाव के निर्देश के मुताबिक. इसलिए रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज किया जा रहा है.

तीन करोड़ 26 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे 

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बताया कि 6 जनवरी 2026 को अंतिम प्रकशित मतदाता सूची में 12 करोड़ 55 लाख मतदाता शामिल थे. इस्न्में से लगभग टीन करोड़ 26 लाख मतदाताओं को नो मैपिंग और अन्य गलतियों के लिए नोटिस जारी किए गए थे. आयोग के मुताबिक इन सभी मतदाताओं को 27 मार्च 2026 आवश्यक दस्तावेजों के साथ सुनवाई का मौका दिया गया था. उसके बाद इनके सूची में रहने और डिलीट करने का निर्णय लिया गया.

जिन लोगों के दस्तावेजों के आधार पर सही पाए गए उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया और जिन व्यक्तियों को शामिल होने लायक नहीं समझा गया, उन्हें सूची में शामिल नहं किया गया. इसलिए ड्राफ्ट मतदाता सूचित से हटाने के लिए सॉफ्टवेयर में फॉर्म-7 जनरेट करने की व्यवस्था थी. इस व्यवस्था से भविष्य में पता चल सकेगा कि किसी व्यक्ति का नाम कब और क्यों हटाया गया. इसलिए प्रकाशित खबर में 85,854 उन्ही मतदाताओं की संख्या है जो अयोग्य पाए गए.

तरबगंज और पीलीभीत में विशेष समुदाय के नाम कटवाने को नकारा 

निर्वाचन अधिकारी द्वारा बताया गया है कि तरबगंज एवं पीलीभीत विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में एक आवदेक द्वारा अनेक मतदाताओं का नाम कटवाने हेतु फार्म-7 भरने का उदाहरण देते हुये रिपोर्ट में यह कहा गया कि उत्तर प्रदेश के SIR-2026 के दौरान समुदाय विशेष के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटवाने का प्रयास हुआ.

इस सम्बन्ध में स्पष्ट किया जाता है कि उपर्युक्त दोनों विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में जिन प्रकरणों के उदाहरण रिपोर्ट में दिये गये हैं, उन सभी में ऐसे समस्त फार्म-7 निरस्त किये गये थे. इस प्रकार बल्क में फार्म-7 भरने की कोशिश भी सफल नहीं होने दी गयी.

198 मामले पाए गए बल्क फॉर्म- 7 वाले 

निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि यह खबर स्वयं बताती है कि हमारी वेबसाइट पर लाखों की संख्या में उपलब्ध फॉर्म-7 की सूचनाओं को अच्छी तरह से खंगालने के बाद मात्र 198 ऐसे मामले पाये गये जहां एक ही व्यक्ति द्वारा 10 से ज्यादा फार्म-7 भरे गये. रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे सभी प्रकरणों में कुल मिलाकर 4740 व्यक्तियों के नाम काटने का प्रयास हुआ. उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में लाखों की संख्या में प्राप्त फार्म-7 में से केवल मात्र 198 ऐसे मामलों का पाया जाना, जहां बल्क में फार्म-7 दिये गये हों, इस बात का द्योतक है कि राज्य में बल्क में फार्म-7 सामान्यतः नहीं प्राप्त किये गये.

इस खबर में किया गया दावा कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण की प्रक्रियाओं के संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, पूर्णतया असत्य है। भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर Instructions Tab में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा दिनांक 27-10-2025 को जारी दिशा-निर्देश आज भी उपलब्ध है, जिसके आधार पर उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया पूरी की गयी थी.

तीन घंटे में मांगे गए थे जवाब 

निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि आयोग को जो प्रश्न भेजे गए 8 अक्टूबर को दोपहर 3:32 बजे उनका जवाब शाम 7 बजे तक विस्तृत रूप से मांगा गया था. इसलिए महज तीन घंटे में इतनी जानकारी दे पाना संभव नहीं था. यही नहीं निर्वाचन कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी प्रदेश में MLC चुनाव में भी व्यस्त हैं. इसलिए रिपोर्ट में उत्तर जानने की कोई चेष्टा नहीं थी.और यह खबर चुनाव आयोग की छवि खराब करने के लिए प्रकाशित की गयी है.

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