दिल्ली में नेताओं को रोक दिया गया. प्रदर्शनकारियों के पहुंचने पर पाबंदियां लगीं. लेकिन विरोध की खबरें दूसरे शहरों से भी आईं. अभिजीत दीपके और CJP के सामने अब सवाल है कि आंदोलन को आगे कैसे ले जाएं. मोदी सरकार के लिए चुनौती है कि प्रदर्शन रोकने के बाद उठ रहे सवालों का जवाब कैसे दे.
10 से 13 अक्टूबर की ज्योतिषीय तस्वीर में CJP को पहचान मिलने की गुंजाइश है, लेकिन आयोजन की मुश्किलें भी हैं. भाजपा के लिए स्थिति संभालने के संकेत हैं, मगर विरोध से आसानी से छुटकारा मिलने की तस्वीर नहीं बनती.
प्रदर्शन जारी रहेगा या तरीका बदलेगा?
CJP की कुंडली में सूर्य की महादशा में गुरु की अंतर्दशा और गुरु का प्रत्यंतर चल रहा है. गुरु संघर्ष वाले छठे भाव में है. उसका संबंध मेहनत और खर्च से भी है. यह मेल कोशिश जारी रहने के साथ रास्ते में बाधाएं दिखाता है.
वहीं, शुक्र अपनी तुला राशि में दसवें भाव से गुजर रहा है. यह सार्वजनिक पहचान बढ़ने का संकेत देता है. संगठन को चर्चा मिल सकती है, भले ही वह तय जगह पर अपना कार्यक्रम न कर पाए.
दिल्ली में पहुंचने की पाबंदियों के बीच विरोध का तरीका बदलने की गुंजाइश है. अलग-अलग शहरों में छोटे प्रदर्शन, नेताओं की रिहाई की मांग और ऑनलाइन अभियान आगे के संभावित रास्ते हैं. इससे संगठन अपनी बात चलती रख सकता है.
लेकिन शुक्र वक्री है. समर्थक केवल हिरासत की खबर नहीं, अगली योजना भी जानना चाहेंगे. CJP ने साफ संदेश नहीं दिया, तो चर्चा के बावजूद लोगों की भागीदारी घट सकती है.
मोदी सरकार को किस तरह का दबाव झेलना पड़ सकता है?
भाजपा की वर्षकुंडली में लग्नेश मंगल और दसवें-ग्यारहवें भाव के स्वामी शनि का इत्तशाल बनता है. ताजिक ज्योतिष में इत्तशाल का मतलब है कि ग्रह किसी संबंध को पूरा करने की ओर बढ़ रहे हैं.
लेकिन यहां दोनों बारहवें भाव में हैं. शनि सूर्य के करीब भी है. इसलिए इस संबंध में बाधाएं जुड़ती हैं. इसकी व्याख्या है कि भाजपा स्थिति संभालने की कोशिश कर सकती है, लेकिन उसे अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है.
अभी सरकार के सामने दो मुद्दे हैं. वोटर लिस्ट पर शिकायतें और प्रदर्शन रोकने की कार्रवाई. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और जंतर-मंतर की सीमित क्षमता का हवाला दिया है. CJP ने नेताओं की हिरासत का विरोध किया है.
हिरासत की खबरें चर्चा में बनी रहीं, तो भाजपा नेताओं और प्रवक्ताओं को बार-बार बताना पड़ सकता है कि इतनी पाबंदियां क्यों जरूरी थीं. विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने का नया मौका मिल सकता है. संभावित सियासी दबाव बार-बार सफाई देने और कार्रवाई का बचाव करने में दिख सकता है.
11 अक्टूबर: टकराव के साथ आगे की तैयारी
रविवार को मंगल और वक्री शुक्र का वर्ग संबंध सटीक होता है. ज्योतिष में इसे खींचतान और मतभेद का संकेत माना जाता है.
CJP के लिए अगले कार्यक्रम के तरीके पर अलग-अलग राय सामने आ सकती है. कुछ समर्थक तुरंत जुटना चाहेंगे. दूसरे स्थानीय कार्यक्रम या नेताओं की रिहाई का इंतजार करने की बात कर सकते हैं.
नेतृत्व ने एक जैसा संदेश दिया, तो कोशिश आगे चल सकती है. अलग-अलग घोषणाएं हुईं, तो तैयारी में देरी और समर्थकों में उलझन बढ़ सकती है.
12 अक्टूबर: समर्थन दिखेगा, लेकिन तालमेल की परीक्षा होगी
सोमवार को चंद्रमा वक्री शुक्र से मिलता है. इसके बाद मंगल से वर्ग बनाता है. इसलिए इस दिन को केवल शुभ ताराबल देखकर पूरी तरह अनुकूल नहीं कहा जा सकता.
CJP को समर्थन के संदेश और संपर्क बढ़ाने का अवसर मिल सकता है. लेकिन कार्यक्रम की जगह, समय और तरीके पर खींचतान भी हो सकती है.
इस दिन चर्चा को आगे की तैयारी में बदलना चुनौती होगा. समर्थकों को साफ दिशा मिली, तो संगठन बिखरे संपर्क जोड़ सकता है. दिशा नहीं मिली, तो सक्रियता के बावजूद कोई ठोस कार्यक्रम तय होने में मुश्किल रहेगी.
13 अक्टूबर: विरोध को टिकाए रखने की चुनौती
मंगलवार का विशाखा नक्षत्र CJP के लिए प्रत्यक तारा पड़ता है. यह प्रयास के सामने बाधा का सहायक संकेत है. इससे अकेले समर्थकों के पीछे हटने का फैसला नहीं निकाला जा सकता.
इस दिन संगठन के लिए जरूरी होगा कि सहयोगी समूहों की भूमिका और अगला कदम साफ करे. स्थानीय कार्यक्रम आगे बढ़े, तो विरोध जारी रह सकता है. तैयारी अधूरी रही, तो सड़क पर उसकी रफ्तार धीमी पड़ सकती है.
राहुल गांधी और विपक्ष इस विवाद को सरकार के खिलाफ उठा सकते हैं. हालांकि राहुल की वर्षकुंडली में राजनीतिक लाभ से जुड़ा सीधा ताजिक संबंध मजबूत नहीं मिला. इसलिए चर्चा में अवसर और उससे मिलने वाला वास्तविक लाभ अलग-अलग देखना होगा.
अगले तीन दिनों के संकेतों में CJP की पहचान बढ़ने की गुंजाइश है, लेकिन कार्यक्रम को आगे ले जाने में बाधाएं हैं. भाजपा स्थिति संभाल सकती है, मगर उसे विरोध और पुलिस कार्रवाई, दोनों पर जवाब देना पड़ सकता है.
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