अगर आप ट्रेन से लंबी दूरी का सफर करते हैं, तो आने वाले समय में आपकी यात्रा पहले से काफी बेहतर और तेज हो सकती है. केंद्र सरकार ने देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने की घोषणा की है. इन प्रस्तावित रूटों पर ट्रेन चलने से मुंबई से पुणे का सफर करीब 48 मिनट और दिल्ली से वाराणसी की यात्रा लगभग 3 घंटे 50 मिनट में पूरी होने की उम्मीद है.
इस कॉरिडोर का खास मकसद बड़े शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करना, कारोबार को बढ़ावा देना और यात्रियों को कम समय में अपनी मंजिल तक पहुंचाना है. हालांकि, ये अभी प्रस्तावित परियोजनाएं हैं और इन पर यात्रा शुरू होने की तारीख, निर्माण की प्रगति और ट्रेन के संचालन से जुड़ी जानकारी अलग-अलग हो सकती है. आइए जानते हैं किन सात रूटों पर हाई-स्पीड ट्रेन चलाने की योजना है और इनसे यात्रियों को क्या फायदा मिल सकता है.
किन 7 रूटों पर दौड़ेंगी हाई-स्पीड ट्रेनें?
- दिल्ली-वाराणसी: इस कॉरिडोर पर सफर का समय घटकर करीब 3 घंटे 50 मिनट होने की उम्मीद है. इससे दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है.
- मुंबई-पुणे: दोनों शहरों के बीच सफर का समय घटाकर करीब 48 मिनट में पूरी करने का टारगेट है. इससे नौकरी, कारोबार और अन्य कामों के लिए आने-जाने वाले यात्रियों को फायदा मिल सकता है.
- पुणे-हैदराबाद: इस रूट पर यात्रा का समय करीब 1 घंटा 55 मिनट रहने का अनुमान है. इससे महाराष्ट्र और तेलंगाना के प्रमुख शहरों के बीच सफर आसान हो सकता है.
- हैदराबाद-बेंगलुरु: इस रूट पर करीब 2 घंटे में सफर पूरी होने की उम्मीद है. इससे आईटी, सेवा और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है.
- हैदराबाद-चेन्नई: दोनों शहरों के बीच सफर का समय करीब 2 घंटे 55 मिनट होने की उम्मीद है. इससे दक्षिण भारत के प्रमुख कारोबारी केंद्रों के बीच आवाजाही आसान हो सकती है.
- चेन्नई-बेंगलुरु: इस रूट पर यात्रा लगभग 1 घंटा 13 मिनट में पूरी होगी. इससे दोनों शहरों के बीच कामकाज और कारोबार के लिए सफर करना सुविधाजनक हो सकता है.
- वाराणसी-सिलीगुड़ी: पटना के रास्ते इस कॉरिडोर पर यात्रा का समय करीब 2 घंटे 55 मिनट रहने का अनुमान है. इससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है.
हाई-स्पीड ट्रेन चलने से क्या होगा फायदा?
- बड़े शहरों के बीच यात्रा में लगने वाला समय आने वाले दिनों में पहले के मुकाबले कम हो सकता है.
- इससे कारोबार और नौकरी के लिए दूसरे शहरों में आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी.
- धार्मिक स्थलों और पर्यटन केंद्रों तक पहुंचना काफी आसान हो सकता है.
- सड़क और हवाई परिवहन पर यात्रियों का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है.
इलेक्ट्रिक एंबुलेंस चलानी है तो सरकार कितने रुपए की सब्सिडी देगी?
