उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बदल बदलने की राजनीति शुरू हो गई है. 2022 में अयोध्या गोसाईगंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़े अभय सिंह 14 अक्टूबर को बीजेपी में शामिल हो रहे है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बीजेपी गोसाईगंज से अभय सिंह को टिकट देगी या खब्बू तिवारी की दावेदारी पर भरोसा जताएगी?
अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा अभय सिंह और पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी को लेकर है. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर खब्बू तिवारी ने अभय सिंह को हराया था. इसके बाद 2022 के चुनाव में अभय सिंह ने बाजी पलट दी. उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी आरती तिवारी को हराया, जो खब्बू तिवारी की पत्नी हैं. अब दोनों नेताओं के एक ही पार्टी में आने से गोसाईगंज में बीजेपी बेहद दिलचस्प होगी.
अभय और खब्बू के बीच सियासी मुकाबला
वरिष्ठ पत्रकार आनंद मोहन ने बताया कि गोसाईगंज विधानसभा सीट पर हमेशा दो लोगों की ही लड़ाई रही है. जो अभय सिंह और खब्बू तिवारी के बीच है. साल 2012 में अस्तित्व में आई इस सीट पर पहले चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर अभय सिंह विधायक बने. 2017 में खब्बू तिवारी ने बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की, जबकि 2022 में अभय सिंह फिर विधायक बन गए.
जेल में रहे खब्बू पत्नी ने लड़ा था चुनाव
खब्बू तिवारी को फर्जी मार्कशीट मामले में 2021 में जेल भेज दिया गया था. इसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव में खब्बू तिवारी की पत्नी आरती तिवारी को टिकट दिया गया था. चुनाव में अभय सिंह (समाजवादी पार्टी) को 1,05,863 वोट मिले थे जबकि आरती तिवारी (बीजेपी) को 92,784 वोट मिला था. हार जीत का अंतर 13,079 वोट का था. स्थानीय स्तर पर यह चर्चा रही कि अगर खब्बू तिवारी जेल से बाहर होते तो चुनाव जीत सकते थे.
ठाकुर से ज्यादा ब्राह्मण वोट
वरिष्ठ पत्रकार आनंद मोहन ने बताया कि गोसाईगंज सीट सिर्फ दो नेताओं तक नहीं सीमित हैं. जातीय समीकरण के हिसाब से इस सीट पर निषाद, कुर्मी और यादव मतदाताओं की भूमिका अहम है. इसके बाद ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव है. ठाकुर वोटबैंक कम मात्रा में है. इस सीट पर जिस प्रत्याशी को निषाद, कुर्मी और यादव मतदाताओं का साथ मिलता है, उसकी स्थिति मजबूत हो जाती है.
ब्राह्मणों के यूथ आइकॉन है खब्बू तिवारी
आनंद मोहन के मुताबिक खब्बू तिवारी ब्राह्मण वोट बैंक में यूथ आइकॉन माने जाते हैं. उनके पास गोसाईगंज विधानसभा सीट के अलावा आसपास की सीटों पर भी प्रभाव है. हर विधानसभा में 8 से 10 हजार वोट उनके खुद के हैं. खब्बू तिवारी की पहचान खासकर युवा समर्थकों के बीच ज्यादा है.
अभय के साथ जाएगा सपा का वोट बैंक?
अभय सिंह के बीजेपी में आने के बाद एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या उनके साथ समाजवादी पार्टी का वोट बैंक भी बीजेपी की ओर चला जाएगा? इस सवाल कर आनंद मोहन ने कहा कि पार्टी बदलने से सपा का पूरा परंपरागत वोट बैंक अभय सिंह के साथ स्थानांतरित हो जाएगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा. क्षेत्र में राम लोटन निषाद की सक्रियता को इसी नजरिए से देखा जा रहा है.
अंतिम संस्कार में आमने-सामने बैठे
बीजेपी नेता हरीश द्विवेदी की मां के अंतिम संस्कार में अभय सिंह और खब्बू तिवारी आमने-सामने कुर्सियों पर बैठे दिखाई दिए थे. दोनों नेताओं की एक ही कार्यक्रम में मौजूदगी के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हुई.
