त्योहारों के सीजन में रेलवे कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है. केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पात्र गैर-राजपत्रित (नॉन-गैजेटेड) रेल कर्मचारियों को 78 दिन की सैलरी के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) देने की मंजूरी दी है. इस फैसले से रेलवे के करीब 11.40 लाख कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, बोनस की रकम की गणना कर्मचारियों की वास्तविक सैलरी के बजाय सरकार की ओर से तय की गई वेतन सीमा के आधार पर की जाती है.
दरअसल, बोनस की गणना के लिए अधिकतम मासिक वेतन सीमा 7,000 रुपये तय है. इसी आधार पर 78 दिनों के बोनस की अधिकतम रकम निकाली जाती है. ऐसे में आइए समझते हैं कि कर्मचारियों के खाते में कितने रुपये आएंगे और 78 दिन के बोनस का पूरा गणित क्या है.
कैसे तय होता है 17,951 का बोनस?
रेलवे कर्मचारियों के बोनस की गणना के लिए सरकार ने अधिकतम मासिक वेतन की सीमा 7,000 रुपये रखी है. यानी अगर किसी कर्मचारी की वास्तविक सैलरी इससे ज्यादा है, तब भी बोनस की गणना इसी तय सीमा के आधार पर की जाती है.
- अधिकतम मासिक वेतन: 7,000 रुपये
- एक दिन का वेतन: 7,000 ÷ 30.4 = करीब 230.26 रुपये
- 78 दिन का बोनस: 230.26 × 78 = करीब 17,951 रुपये
निर्धारित नियमों के तहत कर्मचारियों को 78 दिनों के बोनस की अधिकतम पेमेंट रकम 17,951 रुपए मिल सकती है.
किन रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा बोनस?
- ट्रैक मेंटेनर
- लोको पायलट
- पॉइंट्समैन
- ट्रेन मैनेजर यानी गार्ड
- स्टेशन मास्टर
- सुपरवाइजर
- टेक्नीशियन
- टेक्नीशियन हेल्पर
- मिनिस्ट्रियल स्टाफ
- अन्य पात्र ग्रुप C कर्मचा
7,000 की वेतन सीमा बढ़ाने की क्यों हो रही मांग?
रेलवे कर्मचारी यूनियनें की ओर से लंबे समय से बोनस की गणना के लिए तय 7,000 रुपए की मासिक वेतन सीमा में बदलाव की मांग की जा रही है. कर्मचारियों का तर्क है कि सातवें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए होने के बावजूद बोनस की गणना पुरानी सीमा के आधार पर की जाती है. ऐसे में अगर 18,000 रुपए को आधार मानकर 78 दिन के बोनस की गणना की जाए, तो रकम करीब 46,184 रुपए ही बैठती है.
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