नीट पेपर लीक को लेकर जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद पूर्व शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. अब एसआईआर विवाद में ज्ञानेश कुमार को लेकर की जा रही प्रदर्शनकारियों समेत कांग्रेस की मांग पर प्रधान ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन का असली चरित्र अब उजागर है. उन्होंने एक्स पर किए पोस्ट में नेहा बोरा के बांग्लादेश प्रेरणा वाले और प्रशांत भूषण के तख्तापलट वाले बयान को अराजकता फैलाने वाला बताया है. साथ ही इसे सोची समझी साजिश करार दिया है.
पूर्व शिक्षामंत्री ने अपने बयान में कहा कि देशहित, व्यवस्था को ठीक करने के दावे और छात्रों के हितों के नाम पर शुरू हुए विरोध प्रदर्शन का असली चरित्र अब किसी से छिपा नहीं है. खुले तौर पर ‘Regime Change’ और बांग्लादेश से प्रेरणा लेने की बात करना स्पष्ट करता है कि यह छात्रों की आड़ में केवल देश में अराजकता फैलाने और राजनीतिक व्यवस्था को अस्थिर करने की सोची-समझी साजिश है.
उन्होंने कहा है कि मगर, विदेशी ताकतों के दम पर सत्ता का सपना देखने वाले ये देश विरोधी लोग समझ लें कि भारत में सत्ता परिवर्तन केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय होता है. इसलिए, भारत की जनता इस अलोकतांत्रिक सोच को कभी स्वीकार नहीं करेगी.
नफरती रवैया बेहद शर्मनाक है: धर्मेंद्र प्रधान
राहुल गांधी को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि हार का शतक लगा चुके नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बार-बार जनता के जनादेश को अपमानित करते हैं. चुनावी प्रक्रिया से मनचाहा परिणाम न मिलने पर लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने की कांग्रेस की कोशिश और राजनीतिक स्वार्थ के लिए आए दिन जनता को परेशान करना इनका हमेशा से उद्देश्य रहा है. यह उसी लोकतंत्र विरोधी कांग्रेसी मानसिकता को दिखाता है, जिसमें देशवासियों के अधिकारों को कुचल दिया गया था.
प्रधान ने कहा कि हाथ में संविधान लेकर घूमने वाले संविधान विरोधी राहुल गांधी को जनता बार-बार नकार चुकी है. फिर भी सत्ता की लालसा में अपनी जिद में जनादेश का अपमान और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर लोकतंत्र की मर्यादाओं को तार-तार किया जा रहा है. राहुल गांधी जी, लोकतंत्र के प्रति आपका यह नफरती रवैया बेहद शर्मनाक है.
