- उन्होंने विभिन्न अदालतों में तीन दशकों से अधिक सेवा दी है।
भारत के राजनीतिक इतिहास की सबसे असामान्य कानूनी घटनाओं में से एक में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पिछले हफ्ते दिल्ली हाई कोर्ट में अपना पक्ष खुद रखा. हालांकि, उन्होंने अपना पक्ष बहुचर्चित एक्साइज पॉलिसी मामले पर नहीं, बल्कि उस याचिका पर रखा, जिसमें उन्होंने मामले की सुनवाई कर रही जज को अलग करने की मांग की.
दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा आज सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को साढ़े चार बजे फैसला सुनाने वाली हैं कि क्या उन्हें इस मामले से खुद को अलग कर लेना चाहिए. ऐसे में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा हैं कौन, जो भारत के सबसे चर्चित कानूनी विवादों में से एक के केंद्र में आ गई हैं.
कौन हैं जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा?
दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के करियर की शुरुआत कम उम्र में ही हो गई थी. हाई कोर्ट की वेबसाइट पर मौजूद जानकारियों के मुताबिक, जस्टिस शर्मा को दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से अंग्रेजी लिटरेचर में ग्रैजुएशन के दौरान साल की सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंड स्टूडेंट ऑफ द ईयर चुना गया था. उन्होंने साल 1991 में एलएलबी और साल 2004 में एलएलएम की डिग्री हासिल की.
वहीं, साल 2025 में उन्होंने यूके, अमेरिका, सिंगापुर और कनाडा में ज्यूडिशियल एजुकेशन पर रिसर्च करते हुए अपनी पीएचडी भी पूरी की. इसके अलावा, उनके पास मार्केटिंग मैनेजमेंट, एडवरटाइजिंग और पब्लिक रिलेशंस में डिप्लोमा भी है. वह मात्र 24 साल की उम्र में ही मजिस्ट्रेट बनीं और 11 साल बाद अपने 35वें जन्मदिन के दिन ही वह सेशंस जज यानी सत्र न्यायाधीश के पद पर पहुंचीं.
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तीन दशकों में विभिन्न अदालतों में दे चुकी हैं सेवा
अपने तीन दशक के ज्यादा के ज्यूडिशियल करियर में उन्होंने दिल्ली की जिला अदालतों में फैमिली कोर्ट, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल, महिला कोर्ट, महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों की विशेष अदालत और सीबीआ की स्पेशल कोर्ट सहित कई अदालतों में अपनी सेवाएं दी हैं.
उन्हें 28 मार्च, 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट की स्थायी जज के तौर पर नियुक्त किया गया था और इसी भूमिका में अरविंद केजरीवाल से जुड़े मामले में विवाद चर रहा है.
आखिर क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ, जब जस्टिस शर्मा दिल्ली की कथित एक्साइज पॉलिसी (शराब बिक्री नीति) से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थीं. उन्होंने शुरुआत में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और के. कविता की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं, जबकि सीबीआई और ईडी इस मामले में जांच कर रहे थे.
