Kanya Pujan: नवमी पर हलवा, पूरी और चने तैयार हैं, लेकिन कन्या पूजन के लिए नौ बच्चियां नहीं मिल रहीं. आसपास के घरों में भी पूजन होने से कई बार दो-तीन बच्चियां ही आ पाती हैं. ऐसे में क्या पूजा रोककर बाकी कन्याओं का इंतजार करना चाहिए? क्या नौ की संख्या पूरी न होने से नवरात्रि की पूजा अधूरी रह जाती है?
कम कन्याओं के साथ भी कन्या पूजन किया जा सकता है. देवीभागवत महापुराण में कुमारी पूजन के लिए केवल नौ कन्याओं की बाध्यता नहीं बताई गई है. उसमें एक कन्या के प्रतिदिन पूजन सहित संख्या के अलग-अलग विकल्प मिलते हैं. इसलिए नौ बच्चियां एक साथ न जुटने को पूजा निष्फल होने का कारण मानना सही नहीं होगा. हालांकि किसी विशेष संकल्प में आपने नौ कन्याओं का पूजन तय किया है, तो वह अलग स्थिति है.
कन्याओं की संख्या पर देवीभागवत में क्या लिखा है?
देवीभागवत महापुराण के तृतीय स्कंध में कहा गया है-
एकैकां पूजयेन्नित्यमेकवृद्ध्या तथा पुनः .
द्विगुणं त्रिगुणं वाऽपि प्रत्येकं नवकं च वा ॥
नवरात्रि व्रत के इस विधान में प्रतिदिन एक कन्या के पूजन, संख्या क्रमशः बढ़ाने और नौ कन्याओं के पूजन जैसे विकल्प दिए गए हैं. इसका संदर्भ पूरे नवरात्रि अनुष्ठान से है. यह केवल नवमी पर संख्या घटाने का अलग निर्देश नहीं है, लेकिन इतना स्पष्ट करता है कि कुमारी पूजन का एक ही मान्य स्वरूप नहीं है.
इसी आधार पर सामान्य घरेलू पूजा में यह कहना उचित नहीं कि नौ से कम बच्चियां हुईं तो कन्या पूजन माना ही नहीं जाएगा.
दो, तीन या पांच कन्याएं आएं तो क्या करें?
जितनी बच्चियां उपलब्ध हों, उनका आदरपूर्वक पूजन और भोजन कराएं. केवल संख्या पूरी करने के लिए उन्हें देर तक बैठाकर रखना या अलग-अलग घरों से बार-बार बुलाना जरूरी नहीं है.
व्यावहारिक रूप से पूजन इस तरह व्यवस्थित कर सकते हैं-
– बच्चियों और उनके अभिभावकों की सहमति से उन्हें आमंत्रित करें.
– स्वच्छ आसन दें और अपनी पारिवारिक पद्धति के अनुसार पूजन करें.
– ताजा भोजन परोसें. जो बच्ची पहले भोजन कर चुकी हो, उसे दोबारा खाने के लिए मजबूर न करें.
– अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा या उपयोगी भेंट देकर सम्मानपूर्वक विदा करें.
यह सामान्य घरेलू पूजन के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन है. किसी विशेष अनुष्ठान के नियम हों तो उसका पालन कराने वाले आचार्य से व्यवस्था समझ लें.
क्या केवल एक कन्या का पूजन भी हो सकता है?
एक कन्या का पूजन भी ग्रंथ में वर्णित है. देवीभागवत में प्रतिदिन एक कन्या की पूजा का विकल्प मिलता है. इसलिए एक बच्ची का पूजन अपने आप में अमान्य नहीं कहा जा सकता.
नौ कन्याओं का संकल्प लिया हो तो?
घर में हर साल नौ कन्याएं आती रही हैं और इस बार कम आई हैं, यह एक परिस्थिति है. विधिवत संकल्प में नौ कन्याओं के पूजन का उल्लेख किया गया है, यह दूसरी परिस्थिति है.
दूसरी स्थिति में पुरोहित को बताएं कि कितनी बच्चियां उपलब्ध हैं. वे अपनाई गई पद्धति के अनुसार संकल्प पूरा करने का मार्ग बता सकते हैं. अपनी ओर से यह नियम न बना लें कि एक बच्ची को नौ बार भोजन परोसने या नौ उपहार देने से नौ कन्याओं का संकल्प स्वतः पूरा हो गया.
क्या ज्यादा खर्च करने से ही पूजन पूरा होता है?
देवीभागवत के इसी अध्याय के श्लोक 39 में अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजन करने और सामर्थ्य होते हुए कंजूसी न करने की बात कही गई है. इसका आशय अपनी क्षमता के अनुरूप सत्कार करना है. महंगे उपहार की कोई तय राशि यहां नहीं दी गई है.
भोजन, दक्षिणा और उपहार की होड़ में बच्चियों की सुविधा पीछे नहीं छूटनी चाहिए. किसी बच्ची का पेट भर चुका है तो उसका सम्मानपूर्वक स्वागत करें, खाने का दबाव न बनाएं.
नवमी पर नौ बच्चियां न मिलने से घबराकर पूजा रोकने की जरूरत नहीं है. सामान्य घरेलू पूजन में उपलब्ध कन्याओं का आदरपूर्वक पूजन करें. निश्चित संख्या का विशेष संकल्प लिया है तो उसके समापन की विधि आचार्य से पूछें.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
