दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेंट स्टीफंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती को लेकर छिड़ा विवाद अब एक गंभीर मोड पर पहुंच गया है. पूर्व प्रिंसिपल जॉन वर्गीस के कार्यकाल के आखिरी दिनों में मई 2026 में हुई 25 असिस्टेंट प्रोफेसर्स की नियुक्तियों में बड़ी गड़बड़ी सामने आने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. वहीं इस मामले की अंदरूनी जांच के बाद कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए हिंदी और केमिस्ट्री विभाग के दो असिस्टेंट प्रोफेसर को नौकरी से हटा दिया है. यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद की ओर से गठित प्रोफेसर इंद्र मोहन कपाही जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि कॉलेज ने अपने पसंदीदा और पात्र उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए डीयू के तय भर्ती नियमों और प्रक्रिया का उल्लंघन किया है.
शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में मनमानी और धांधली के आरोप लगने के बाद एड-हॉक फैकल्टी के शिक्षकों ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. 13 मई 2026 को इस मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी. अदालत का मानना था कि भर्ती प्रक्रिया से कई ऐसे जरूरी और नीतिगत सवाल जुड़े हैं, जिनकी गहन जांच जरूरी है. अदालत ने सख्त निर्देश दिए की चयन समिति की सिफारिश को बिना कोर्ट की अनुमति के लागू नहीं किया जाएगा. यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक हाई कोर्ट मामले की अगली सुनवाई और जांच के आधार पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देता.
समिति की रिपोर्ट में हुए बड़े खुलासे
प्रोफेसर इंद्र मोहन कपाही की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय समिति की रिपोर्ट में सेंट स्टीफंस कॉलेज प्रशासन की कई मनमानियां सामने आई है. रिपोर्ट में सामने आया है कि डीयू के नियमों के तहत अनारक्षित कैटेगरी के लिए न्यूनतम एकेडमी स्कोर 55 अंक होना चाहिए था, लेकिन कॉलेज ने इसे गैर कानूनी तरीके से घटाकर 50 अंक कर दिया. डीयू एसओपी के अनुसार पहली रिक्ति पर 40 और प्रत्येक अगली रिक्ति पर 20 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाना चाहिए था. इसके विपरीत कॉलेज ने प्रति सीट 70 से ज्यादा उम्मीदवारों को इंटरव्यू में बुला लिया. वहीं यूजीसी केयर या स्कोपस लिस्टेड जर्नल्स के बजाय सामान्य पीयर रिव्यूड जर्नल्स के लिए भी अंक बांटे गए. इंटरव्यू के दौरान डीयू के एक सब्जेक्ट एक्सपर्ट ने फाइनल स्कोर शीट पर यह आरोप लगाते हुए दस्तखत करने से मना कर दिया कि गैर विशेषज्ञ सदस्य अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को मनमाने अंक दे रहे थे. वहीं 29 अप्रैल 2026 को डीयू के रजिस्ट्रार ने कॉलेज को नियुक्ति पत्र जारी न करने की सख्त सलाह दी थी, इसके बावजूद कॉलेज ने 9 मई को रिजल्ट घोषित कर दिया और 11 मई को उम्मीदवारों को जॉइनिंग दे दी.
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दो असिस्टेंट प्रोफेसर की गई नौकरी
सेंट स्टीफंस कॉलेज की नई प्रिंसिपल सुसान एलियास की ओर से कराई गई, आंतरिक जांच और 29 सितंबर 2026 को गवर्निंग बॉडी की बैठक के निर्णय के आधार पर दो शिक्षकों पर भी कार्रवाई की गई. इसमें केमिस्ट्री विभाग के एक टीचर पर शैक्षणिक योग्यता और पात्रता में कमी पाई जाने के बाद उनसे इस्तीफा मांगा गया, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि उन्हें बाद में गेस्ट फैकल्टी के रूप में रखा गया. वहीं हिंदी विभाग से जुड़े शिक्षक के मामले में भी ऐसी ही गड़बड़ी सामने आई.
कॉलेज का तर्क और डीयू का रूख
इस मामले में सेंट स्टीफंस कॉलेज का तर्क है कि वह एक अल्पसंख्यक संस्थान है, इसलिए उसे अपनी चयन प्रक्रिया और मानदंड तय करने का अधिकार है. दूसरी और दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्पष्ट रूख है कि कॉलेज चाहे अल्पसंख्यक ही क्यों ना हो, उसे डीयू की वैधानिक संस्थाओं की ओर से अनुमोदित भर्ती नियमों, यूजीसी दिशा निर्देशों और स्वीकृति एसओपी का पालन करना अनिवार्य है.
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