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Sleep Tips: क्या रातभर करवटें बदलते रहते हैं? डॉक्टर से जानें गहरी नींद का राज


Why Mobile Screen At Night Disrupts Melatonin: अच्छी नींद सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप कितने घंटे बिस्तर पर रहते हैं. सोने से ठीक पहले आप क्या कर रहे हैं, इसका भी नींद की क्वालिटी पर सीधा असर पड़ सकता है. रात में बिस्तर पर जाने से पहले फोन चलाना, देर शाम चाय-कॉफी पीना या अगले दिन के काम को लेकर लगातार सोचते रहना ऐसी आदतें हैं, जो दिमाग को आराम देने के बजाय एक्टिव रखती हैं. इसका असर यह हो सकता है कि नींद आने में ज्यादा समय लगे, रात में बार-बार नींद खुले या सुबह उठने के बाद भी थकान महसूस हो.

दिल्ली के सीके बिड़ला अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. केके जिंदल के मुताबिक, अच्छी नींद के लिए शरीर की इंटरनल क्लॉक, दिमाग में नींद को नियंत्रित करने वाले केमिकल और रात में धीरे-धीरे कम होती सतर्कता का सही तालमेल जरूरी है. जब इनमें से किसी प्रक्रिया में बार-बार रुकावट आती है, तो नींद प्रभावित हो सकती है.

सोने से ठीक पहले फोन चलाना

आजकल बिस्तर पर जाने के बाद फोन चलाना लगभग हर किसी की आदत बन गई है. मैसेज देखना, सोशल मीडिया स्क्रॉल करना या वीडियो देखना दिमाग को उस समय भी व्यस्त रखता है, जब उसे धीरे-धीरे शांत होना चाहिए. फोन की तेज रोशनी भी मेलाटोनिन को प्रभावित कर सकती है. यह हार्मोन शरीर के स्लीप-वेक साइकल को नियंत्रित करने में मदद करता है. इसके अलावा, कोई रोमांचक, परेशान करने वाला या तनाव देने वाला कंटेंट दिमाग को और ज्यादा अलर्ट कर सकता है.

इससे बचने के लिए सोने से कम से कम 30 मिनट पहले फोन अलग रख दें. इस दौरान किताब पढ़ सकते हैं, कुछ शांत सुन सकते हैं या कुछ मिनट धीमी सांस लेने की एक्सरसाइज कर सकते हैं. नोटिफिकेशन बंद करना भी मददगार हो सकता है, क्योंकि बार-बार फोन चेक करने की इच्छा कम होगी.

देर शाम चाय-कॉफी पीना

रात में चाय या कॉफी पीना भी नींद के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. कॉफी, चाय, एनर्जी ड्रिंक और कुछ सॉफ्ट ड्रिंक्स में कैफीन होता है. यह एडेनोसिन नाम के केमिकल के असर को रोकता है, जो दिमाग को नींद आने का संकेत देने में मदद करता है. कैफीन का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और कुछ लोगों में यह कई घंटों तक बना रह सकता है. इसलिए शाम की कॉफी पीने के बाद शरीर थका होने के बावजूद नींद आने में दिक्कत हो सकती है.

सोने से कम से कम छह घंटे पहले कैफीन लेना बंद करने की कोशिश करें. अगर आप कैफीन के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं या पहले से नींद की समस्या है, तो चाय-कॉफी दिन में और जल्दी पीना बेहतर हो सकता है.

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बिस्तर पर जाने के बाद दिमाग में चलता रहे काम

कई लोगों का शरीर बिस्तर पर पहुंच जाता है, लेकिन दिमाग काम करता रहता है. दिनभर की बातें दोहराना, ऑफिस की डेडलाइन के बारे में सोचना या अगले दिन की प्लानिंग करते रहना दिमाग को आराम नहीं करने देता. सोने से पहले 5 से 10 मिनट निकालकर अपनी चिंताएं, जरूरी काम और अगले दिन की प्राथमिकताएं कागज पर लिख सकते हैं. इससे बार-बार उन्हीं बातों के बारे में सोचने का सिलसिला कम करने में मदद मिल सकती है.

धीमी सांस लेने की एक्सरसाइज, मांसपेशियों को रिलैक्स करने की प्रक्रिया या थोड़ी देर माइंडफुलनेस भी तनाव कम करने में मदद कर सकती है. अगर बिस्तर पर जाने के बाद भी काफी देर तक नींद न आए, तो धीमी रोशनी में कोई शांत काम करें और नींद आने पर दोबारा बिस्तर पर जाएं.

रात में भारी खाना और शराब

सोने के बहुत करीब भारी या ज्यादा खाना खाने से अपच, बेचैनी या एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है. इससे आराम से सोना मुश्किल हो सकता है. वहीं, शराब पीने से शुरुआत में नींद आने जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन बाद में यह नींद की क्वालिटी को प्रभावित कर सकती है. कोशिश करें कि सोने से दो से तीन घंटे पहले डिनर खत्म हो जाए, खासकर अगर आपको एसिड रिफ्लक्स की समस्या रहती है. रात में भूख लगे तो भारी खाने के बजाय हल्का स्नैक लिया जा सकता है. सोने के करीब शराब का सेवन कम करना भी बेहतर नींद में मदद कर सकता है.

हर दिन अलग समय पर सोना

अगर आप रोज अलग-अलग समय पर सोते हैं तो शरीर की सर्केडियन रिदम यानी इंटरनल बॉडी क्लॉक प्रभावित हो सकती है. खासकर वीकेंड पर देर रात तक जागना और फिर अगले दिन देर तक सोना इस रूटीन को बिगाड़ सकता है. इसके लिए कोशिश करें कि हर दिन लगभग एक ही समय पर उठें, यहां तक कि वीकेंड पर भी. सोने से पहले एक तय शांत रूटीन बनाना और सुबह प्राकृतिक रोशनी लेना भी शरीर की नींद-जागने की लय को मजबूत करने में मदद कर सकता है. ज्यादातर वयस्कों को रात में 7 से 9 घंटे की नींद की जरूरत होती है.

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कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

कभी-कभार नींद खराब होना सामान्य हो सकता है. लेकिन अगर अपनी आदतों में बदलाव करने के बाद भी नींद की समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे सिर्फ लाइफस्टाइल की परेशानी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर रात में तेज खर्राटे आते हैं, सोते समय सांस लेने में परेशानी या गैस्पिंग होती है, पैरों को हिलाने की तेज इच्छा होती है, रात में शरीर में असामान्य हरकतें होती हैं या दिनभर बहुत ज्यादा नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. मिर्गी या दूसरी न्यूरोलॉजिकल स्थितियों वाले लोगों के लिए नींद का ध्यान रखना और भी जरूरी है, क्योंकि कुछ मामलों में नींद की कमी दौरे को ट्रिगर कर सकती है.

सोने से पहले के आखिरी 30 मिनट दिमाग को और ज्यादा व्यस्त करने के बजाय शांत करने के होने चाहिए. फोन को दूर रखना, समय पर चाय-कॉफी बंद करना, दिमाग में चल रही बातों को लिख लेना और एक तय स्लीप रूटीन अपनाना जैसे छोटे बदलाव नींद को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं. अगर इसके बावजूद समस्या बनी रहे, तो सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

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