दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव की बहाली को लेकर हो रहे प्रदर्शन के बीच ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजील इमाम’ के नारे लिखे जाने पर विवाद हो गया है. जिस पर मुस्लिम धर्मगुरू साजिद रशीदी की प्रतिक्रिया सामने आई हैं. उन्होंने इन नारों के पीछे सीजेपी के अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को ज़िम्मेदार बताया और कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए.
मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि “जामिया के स्टूडेंट्स अपनी छात्रसंघ यूनियन को बहाल करने के लिए धरना दे रहे हैं. क्योंकि 2006 से इस पर कोई तवज्जो नहीं दे रहा है. छात्रों का मानना है कि इसको बहाल किया जाए और 2026-27 के चुनाव में इसका ऐलान किया जाए. उन्होंने छात्रों और उनके प्रदर्शन पर हो रही कार्रवाई को भी खत्म करने की माँग की.”
विवादित नारों पर साजिद रशीदी का बयान
जामिया में लगे विवादित नारों पर मौलाना साजिद ने कहा कि आज वहां जो नारे लगे हैं, दीवार पर जो लिखा गया है, ये हैरान करने वाला है. क्योंकि वो बच्चे तो इस काम को नहीं कर सकते और मुसलमान भी ये नहीं कर सकते. पिछले कई दशकों से कश्मीर से भी ऐसा कोई नारा नहीं आ रहा है. इसका मतलब है कि आज जो नए लोग देश में पैदा हुए हैं, जो देश को तोड़ने के लिए, दंगा फैलाने के लिए और जिनको मैंने पहले एक बार यह भी कहा था कि ये आतंकवादी लोग हैं.
नेहा बोरा और अभिजीत दिपके पर आरोप
मौलाना ने अमेरिकी गायिका का नाम लेकर कहा कि उन्होंने भी कहा था कि यहां कुछ ऐसे लोग हैं जो देश को तोड़ने का काम कर रहे हैं और फंडिंग करते हैं. अभिजीत दिपके को भी यही लोग फंडिंग कर रहे हैं. वहीं नेहा बोरा ने भी कहा कि वो 2025 में बांग्लादेश के प्रदर्शन से प्रेरणा लेती है. इसका सीधा मतलब है कि नेहा बोरा और अभिजीत दिपके की टीम इसमें शामिल हैं. जो कश्मीर और शरजील इमाम का नाम लेकर देश को दंगे की आग में झोंकना चाहते हैं.
उन्होंने कहा कि शरजील इमाम बहुत सालों से जेल में बंद है. किसी मुसलमान ने उसके लिए आवाज़ नहीं उठाई, वो बस ये कहते हैं कि कम से कम कानूनी कार्रवाई शुरू होनी चाहिए. उमर खालिद 5-6 साल से बंद है और उसका अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हुआ. कोई ये नहीं कहता कि ये बिल्कुल दूध के धुले हैं और इन पर कोई बात ना हो.
10वें दीपोत्सव में लाखों दीपों से जगमगाएगी अयोध्या, स्वदेशी ड्रोन से होगा भव्य शो
पीएम मोदी से की जांच की मांग
जामिया में ‘फ्री कश्मीर’ और ‘फ्री शरजिल इमाम’ के नारों पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि ये नारे इन्हीं लोगों ने लगाए हैं. इसलिए मैं प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से आग्रह करता हूं कि इन नारों की जांच की जाए और पता लगाया जाए कि इनकी मंशा क्या है? ये छात्रों के प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए और मुसलमानों को हिंदुओं की निगाह में बुरा बनाने के लिए लिखे गए हैं.
कश्मीर और शरजील इमाम को जोड़ने वाले यही लोग हैं. नेहा बोरा और अभिजीत दीपके की टीम इसमें शामिल हैं. क्योंकि मुसलमान तो कई सालों से बिल्कुल खामोश हैं. कितने बड़े-बड़े प्रोटेस्ट हुए कोई मुसलमान नहीं गया. ये लोग जानबूझकर हिंदू-मुसलमान कराना चाहते हैं. जिससे देश में गृहयुद्ध की स्थिति हो जाए. इसकी जाँच होना जरूरी है.
