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November Weather 2026: नवंबर में बारिश और ठंड कब बढ़ेगी?


November Weather 2026 India: नवंबर 2026 में भारत का मौसम एक जैसा नहीं रहने वाला. उत्तर भारत में ठंड धीरे-धीरे जोर पकड़ेगी, जबकि दक्षिण और पूर्वी तट पर बारिश पूरी तरह खत्म होती नहीं दिख रही. भारत की कुंडली और मेदिनी ज्योतिष की गणना को साथ रखें तो महीने के बीच और आखिर में मौसम तेजी से पलटने के संकेत मिलते हैं.

सबसे ज्यादा नजर 10 से 12 नवंबर, 17 से 22 नवंबर और 28 से 30 नवंबर के बीच रखनी होगी. यह मौसम विभाग का पूर्वानुमान नहीं, बल्कि पारंपरिक मेदिनी ज्योतिष से निकला संकेत है.

भारत की कुंडली क्यों खास है?

स्वतंत्र भारत की कुंडली 15 अगस्त 1947, रात 12 बजे, नई दिल्ली की है. इसमें वृषभ लग्न और कर्क राशि है. कर्क जल तत्व की राशि मानी जाती है और भारत की जन्मकुंडली में सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि इसी राशि में हैं.

मेदिनी ज्योतिष में जब जल राशियों पर एक साथ कई ग्रह सक्रिय होते हैं तो नमी, बादल, बारिश और मौसम में अचानक बदलाव की संभावना बढ़ती मानी जाती है. नवंबर में यही स्थिति कई बार बन रही है.

10 से 12 नवंबर क्यों अहम?

इस दौरान चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा, मंगल कर्क के आखिरी हिस्से में होगा और शनि मीन में. कर्क, वृश्चिक और मीन तीनों जल राशियां हैं.

इसलिए मेदिनी ज्योतिष के हिसाब से यह नवंबर की पहली मजबूत वर्षा वाली खिड़की बनती है. अगर उस समय बंगाल की खाड़ी में कोई कम दबाव का क्षेत्र मौजूद हुआ तो तमिलनाडु, पुडुचेरी और तटीय आंध्र प्रदेश में बारिश बढ़ सकती है.

इसे चक्रवात की निश्चित भविष्यवाणी नहीं कहा जा सकता, लेकिन समुद्री मौसम के सक्रिय होने के संकेत जरूर बनते हैं.

13 नवंबर के बाद मौसम का मिजाज बदलेगा

मंगल कर्क छोड़कर सिंह राशि में चला जाएगा. यानी जल तत्व से अग्नि तत्व की ओर बदलाव. इससे कुछ दिनों के लिए मौसम ज्यादा अस्थिर हो सकता है. कहीं तेज धूप, कहीं बादल, कहीं अचानक बारिश और तेज हवा जैसी स्थिति बन सकती है.

16 नवंबर के आसपास गुरु और मंगल बेहद करीब होंगे. केतु भी पास रहेगा. इसका संकेत लंबे समय तक चलने वाली बारिश से ज्यादा तेज और अचानक मौसम बदलाव की ओर जाता है.

17 से 22 नवंबर सबसे संवेदनशील

16 नवंबर के बाद सूर्य वृश्चिक में आ जाएगा और शनि पहले से मीन में रहेगा. 20 नवंबर के आसपास चंद्रमा भी मीन में पहुंचेगा. यानी जल तत्व फिर मजबूत होगा. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार यह महीने का सबसे संवेदनशील दौर दिखाई देता है.

अगर बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत सिस्टम बनता है तो दक्षिण और पूर्वी तट पर इस दौरान बारिश, तेज हवा या समुद्री हलचल बढ़ सकती है. तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश और आसपास के तटीय क्षेत्रों पर खास नजर रहेगी.

उत्तर भारत में क्या होगा?

उत्तर भारत की तस्वीर अलग है. दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नवंबर के दूसरे हिस्से से रात का तापमान तेजी से गिर सकता है.

बारिश से ज्यादा यहां सुबह की ठंड, धुंध और कुहासा बढ़ने के संकेत हैं. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में 17 से 22 नवंबर और फिर महीने के आखिरी दिनों में बर्फबारी के मौके बढ़ सकते हैं, लेकिन इसके लिए पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना जरूरी होगा.

28 से 30 नवंबर फिर बदल सकता है मौसम

महीने के आखिर में चंद्रमा फिर कर्क राशि में आएगा. उसी समय सूर्य वृश्चिक और शनि मीन में होगा. यानी एक बार फिर तीन जल राशियां सक्रिय होंगी. इससे दक्षिण और पूर्वी तट पर बारिश का एक और दौर बन सकता है. वहीं उत्तर भारत में ठंड और सुबह की नमी और बढ़ सकती है.

नवंबर का सीधा संकेत क्या है?

मेदिनी ज्योतिष नवंबर को पूरे भारत के लिए भारी बारिश वाला महीना नहीं दिखाता. तस्वीर ज्यादा साफ है कि दक्षिण और पूर्वी तट पर रुक-रुककर बारिश और समुद्री हलचल, मध्य और पश्चिम भारत में अपेक्षाकृत सूखा मौसम और उत्तर भारत में महीने के दूसरे हिस्से से बढ़ती ठंड.

अगर नवंबर में बंगाल की खाड़ी कोई बड़ा सिस्टम बनाती है, तो 10-12, 17-22 और 28-30 नवंबर सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली तारीखें होंगी.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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