उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने पंचायत वोटर लिस्ट को लेकर एक नया नियम जारी किया. इस नियम के अनुसार अब गांव में लगातार 6 महीने रहने वाले का ही नाम पंचायत वोटर लिस्ट में शामिल होगा. अभी तक इसमें कोई अवधि तय नहीं थी. मतदाता बनने के लिए आधार कार्ड, बिजली बिल या टेलीफोन बिल से गांव के पते का प्रमाण देना अनिवार्य होगा.
दरअसल उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-9 में ग्राम पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली तैयार किए जाने की व्यवस्था है. उपधारा (3) में संबंधित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र में साधारण रूप से निवासी व्यक्ति की निर्वाचक नामावली में पंजीकरण की व्यवस्था है. उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-9 की उपधारा (3) के स्पष्टीकरण (चार) में प्रयुक्त “मामूली तौर से निवासी” (Ordinarily Resident) का निर्धारण किया जाना है.
मंत्री सुरेश खन्ना ने मामले पर क्या कहा?
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मामले पर कहा कि पहले पंचायती राज की नियमावली में इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं थी कि किसे मतदाता होने का अधिकार होगा. अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि व्यक्ति उस स्थान का सामान्य निवासी होना चाहिए. भारत निर्वाचन आयोग के नियमों में भी निवास और मतदाता बनने की योग्यता को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं.
उन्होंने आगे कहा कि हालांकि, पंचायती राज से जुड़े नियमों में सामान्य निवास की अवधि कब से मानी जाएगी, इसे लेकर स्पष्टता नहीं थी. अब यह स्पष्ट किया गया है कि जिस तारीख को मतदाता बनने की पात्रता तय की जाएगी, उस दिन व्यक्ति की उम्र 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए और उससे पहले कम से कम छह महीने से वह संबंधित स्थान पर निवास कर रहा हो.
प्रेस नोट में दी गई यह जानकारी
कैबिनेट द्वारा जारी प्रेस नोट में बताया गया कि साल 2015 के पंचायत निर्वाचन के दौरान निर्वाचक नामावली में नाम सम्मिलित किए जाने से संबंधित एक प्रकरण में यह प्रश्न उत्पन्न हुआ कि संबंधित व्यक्ति को किसी ग्राम पंचायत के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र का साधारण निवासी मानने के लिए किन आधारों पर निर्णय किया जाए.
यह भी बताया गया कि उक्त प्रकरण में दिनांक 10 नवंबर 2015 एवं 20 नवंबर 2015 को पारित प्रशासनिक आदेशों का रिट याचिका Misc. Single No. 279 of 2016, Rajesh Kumar Pandey vs State of U.P. & Others में उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी गई. इस याचिका में निर्वाचक नामावली में नाम सम्मिलित किए जाने के लिए “साधारण निवास” की अवधारणा के निर्धारण का मूल प्रश्न उठाया गया.
इसके समाधान हेतु उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारण) नियमावली, 2026 का प्रख्यापन किया जा रहा है. प्रस्तावित नियमावली के प्रख्यापन से ग्राम पंचायतों की निर्वाचक नामावली में साधारण निवास के निर्धारण हेतु प्रदेश में एक समान, स्पष्ट एवं विधिसम्मत आधार उपलब्ध होगा.
आगे बताया गया कि इससे संबंधित प्राधिकारियों को तथ्यपरक निर्णय लेने में सुविधा होगी, निर्णयों में एकरूपता एवं पारदर्शिता आएगी तथा इस विषय से संबंधित विवाद एवं न्यायालयीन वाद कम करने में सहायता मिलेगी. साथ ही, उच्च न्यायालय के 17 दिसंबर 2019 के निर्णय तथा उसके अनुपालन में वर्ष 2026 में पारित अनुवर्ती आदेशों के क्रम में अपेक्षित नियमात्मक व्यवस्था स्थापित हो सकेगी.
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