केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बयान के बाद यूपी चुनाव से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर नई सियासी बहस छिड़ गई है. भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में अमित शाह के यूपी में यूसीसी लागू करने वाले बयान के बाद इसके संभावित प्रभावों और नफा-नुकसान पर चर्चा तेज हो गई है. खास तौर पर शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में होने वाले बदलावों को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
सियासी जानकारों के मुताबिक यूसीसी लागू होने की स्थिति में अलग-अलग धर्मों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति से जुड़े अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय समान कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं. इसका असर मुस्लिम समुदाय के पारिवारिक और सामाजिक नियमों पर भी पड़ने की संभावना है. उत्तराखंड में लागू यूसीसी को इसका उदाहरण माना जा रहा है.
एक से अधिक शादी पर लगेगी रोक
यूसीसी लागू होने पर मुस्लिम पुरुष एक से अधिक शादी नहीं कर सकेंगे. उत्तराखंड के यूसीसी में दूसरी शादी की अनुमति तभी है, जब पहली पत्नी जीवित न हो. हालांकि, निकाह और धार्मिक रीति-रिवाज से विवाह करने पर रोक नहीं होगी, लेकिन विवाह की कानूनी शर्तें सभी समुदायों के लिए समान होंगी.
इसके साथ ही शादी के लिए लड़कों की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और लड़कियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित होगी. शादी के 60 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. यह नियम सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होगा.
तलाक के तरीकों में आएगा बदलाव
मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक के अलग-अलग तरीकों के बजाय समान कानूनी प्रक्रिया लागू होगी. इसके साथ ही तलाक के बाद उसी व्यक्ति से दोबारा शादी करने के लिए किसी तीसरे व्यक्ति से विवाह करने की शर्त भी नहीं होगी.
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संपत्ति में हिस्सेदारी के नियम होंगे समान
यूसीसी के आने से संपत्ति की हिस्सेदारी और उत्तराधिकार के मामले में भी असर प़ सकता है. संपत्ति के बंटवारे के लिए सभी धर्मों में समान नियम लागू होंगे. मुस्लिम महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी भी समान उत्तराधिकार प्रावधानों के आधार पर तय होगी.
इसके अलावा वसीयत में केवल एक-तिहाई संपत्ति तक की सीमा भी समाप्त हो सकती है. यूसीसी के दायरे में आने वाले जोड़ों को लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण कराना होगा. इसके लिए भी कानून में निर्धारित शर्तों का पालन करना पड़ेगा.
