भारत में दिन की गर्मी तो सबको पता है, लेकिन अब सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है. रातें पहले से कहीं ज्यादा गर्म हो गई हैं और यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि महाराष्ट्र और तेलंगाना के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे देश में न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने वाला है. कई जगहों पर न्यूनतम तापमान सामान्य से 6.4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा हो गया है. IMD के अनुसार, जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री ज्यादा होता है तो उसे ‘वार्म नाइट’ कहते हैं और 6.4 डिग्री से ज्यादा को ‘सीवियर वार्म नाइट’. ये गर्म रातें अब आम हो गई हैं, लेकिन क्यों और कैसे? एक्सप्लेनर में समझते हैं…
सवाल 1: भारत में रात में गर्मी क्यों बढ़ती जा रही है?
जवाब: रातें अब देश की हीट क्राइसिस का बड़ा हिस्सा बन गई हैं. इसके दो बड़े कारण हैं. एक वैश्विक जलवायु परिवर्तन और दूसरा शहरों में बढ़ता शहरीकरण. कंक्रीट, एस्फॉल्ट और शीशे दिन भर सूरज की गर्मी सोख लेते हैं और रात में धीरे-धीरे गर्मी छोड़ते हैं. ऊंची-ऊंची इमारतें हवा का रुख रोक लेती हैं, जिससे गर्मी जमीन के पास ही फंस जाती है.
गर्मी पर रिसर्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, शहरों में रात के तापमान में होने वाले 60 प्रतिशत बढ़ोतरी का कारण यही स्थानीय गर्मी रोकना है, जबकि 40 प्रतिशत ग्रीनहाउस गैसों के कारण है. इसके साथ नमी भी बढ़ रही है. उत्तर भारत में 2012-2022 के बीच शहरों में नमी 30-40 प्रतिशत से बढ़कर 40-50 प्रतिशत हो गई.
दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर और लखनऊ में यह बढ़ोतरी 6-9 प्रतिशत तक रही. ज्यादा नमी से पसीना सूखता नहीं और शरीर ठंडा नहीं हो पाता. एयर कंडीशनर चलाने से बाहर और गर्मी निकलती है, जो एक फीडबैक लूप बना रही है. एलनीनो के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है. इस साल एलनीनो विकसित हो रहा है, इसलिए 2026 की सर्दियां और 2027 की गर्मियां खासतौर पर नजर रखने वाली हैं.
सवाल 2: कितनी तेजी से बढ़ रही हैं गर्म रातें?
जवाब: 2025 में ScienceDirect ने 1980-2020 के बीच यानी 40 सालों की एक स्टडी की. इसके मुताबिक, गर्म रातें हर दशक में 2 से 8 दिन बढ़ गई हैं, खासकर पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत में. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (CEEW) की 2025 जिला-स्तरीय रिपोर्ट कहती है कि 734 जिलों में से 417 जिले यानी आधे से ज्यादा हाई या वेरी हाई हीट रिस्क जोन में हैं. इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश शामिल हैं.
पूरे देश की 76 प्रतिशत आबादी इन हाई रिस्क जोनों में रहती है. 2012-2022 के बीच बड़े शहरों में गर्म रातों की संख्या बढ़ी है. मुंबई में हर गर्मी में 15 अतिरिक्त बहुत गर्म रातें, बेंगलुरु में 11, भोपाल और जयपुर में 7-7 और दिल्ली में 6 हो गई हैं. CEEW रिपोर्ट के मुताबिक, गर्म रातें गर्म दिनों से भी तेजी से बढ़ रही हैं.
शहर अब रात में ‘ओवन’ जैसा महसूस होता है. खराब शहरी प्लानिंग, कम हरियाली, सूखते जल स्रोत, कंक्रीट बढ़ना और तीन लैंडफिल ने गर्मी बढ़ा दी है. मुंबई, बेंगलुरु, भोपाल, जयपुर, चेन्नई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में गर्म रातें सबसे ज्यादा बढ़ी हैं. स्मार्ट सिटी स्टडी (2001-2024) में श्रीनगर में दिन और कंपाउंड हीटवेव सबसे ज्यादा, गुजरात के दाहोद में सबसे तीव्र कंपाउंड हीटवेव और वाराणसी में सबसे तीव्र नाइट-टाइम हीटवेव दर्ज हुई.
सवाल 3: क्यों कहते हैं कि गर्म रातें दिन से भी ज्यादा खतरनाक हैं?
जवाब: मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं कि दिन में गर्मी पड़ती है तो रात में शरीर ठंडा होकर रिकवर करता है, लेकिन गर्म रातों में यह राहत नहीं मिलती. इससे डिहाइड्रेशन, नींद खराब होना, हाई ब्लड प्रेशर, थकान, चिड़चिड़ापन और हीट-स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. बुजुर्ग, बच्चे और दिल-फेफड़ों के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.
मुंबई के ग्लेनीगल्स हॉस्पिटल की डॉ. मंजुषा अग्रवाल कहती हैं, ‘यह डिहाइड्रेशन, नींद की समस्या, हाई ब्लड प्रेशर और हीट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ाता है. बार-बार गर्म रातें थकान, चिड़चिड़ापन और लगातार हीट स्ट्रेस बढ़ाती हैं.’
गर्म रातों की वजह से सिरदर्द, चक्कर, थकान, मांसपेशियों में ऐंठन, डिहाइड्रेशन और नींद की कमी आम हो गई है. इससे याददाश्त कम होना, एकाग्रता की समस्या, चिंता और डिप्रेशन भी हो सकता है. 1998-2017 के बीच दुनिया में 1.66 लाख लोगों की मौत हीटवेव से हुई थी. भारत में 2023 में 48,000 हीटस्ट्रोक केस और 159 मौतें दर्ज हुईं, लेकिन असली संख्या ज्यादा है.

सवाल 4: रोजमर्रा की जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है?
जवाब: गर्म रातों से काम की क्षमता घट रही है. CSE रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक भारत में ग्लोबल वार्मिंग से 5.8 प्रतिशत वर्किंग ऑवर्स (करीब 3.4 करोड़ फुल-टाइम जॉब्स) गंवाने का अनुमान है. रात में AC चलाने से बिजली की मांग बढ़ती है और बाहर गर्मी निकलने से समस्या और बढ़ती है. मजदूरों और आउटडोर वर्कर्स को दिन-रात दोनों समय गर्मी झेलनी पड़ रही है.
सवाल 5: तो क्या वो चांदनी में ठंडी रातें कभी लौट कर नहीं आएंगी?
जवाब: 2015-2100 के बीच एक 2025 मॉडलिंग स्टडी के अनुसार, गर्म रातें हर दशक में 10 से 13 दिन बढ़ सकती हैं. कंपाउंड हीटवेव और आम होंगे. बचाव के लिए शहरों में कूल रूफ, रिफ्लेक्टिव पेवमेंट, ज्यादा पेड़, बेहतर हवा के रास्ते और कम कंक्रीट जरूरी है. सरकार और शहरों को शहरी प्लानिंग सुधारनी होगी. IMD अब रात के तापमान की भी चेतावनी दे रहा है. कुल मिलाकर अगर इंसान अपने दिनचर्या के तरीके सुधार ले, तो पर्यावरण सुधरेगा जिससे ठंडी चांदनी रातें लौट सकती हैं.
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