एकजुटता और आक्रोश दिखाते हुए, दलित ईसाई समूहों, नागरिक समाज संगठनों और राजनीतिक दलों ने बुधवार को हैदराबाद के बडांगपेट चौराहे पर एक बड़ा प्रदर्शन किया. उन्होंने दो युवतियों पर हुए बर्बर हमले की निंदा की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. इस प्रदर्शन में भारी भीड़ जुटी, जिसमें न्याय, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और इलाके में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के नारे लगाए गए.
यह प्रदर्शन एक वायरल वीडियो के सामने आने के बाद हुआ है, जिसमें अल्मासगुडा में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा के पास कुछ लोगों का एक समूह दो महिलाओं पर हमला करता दिख रहा है. आरोप है कि यह हमला ‘धर्मांतरण’ के मुद्दे को लेकर किया गया था.
अल्पसंख्यक महिलाओं की असुरक्षा
प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर गुस्सा जताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो सबूत सामने आने के बावजूद पुलिस ने तुरंत कोई कार्रवाई नहीं की. उन्होंने अल्पसंख्यक महिलाओं की असुरक्षा की ओर ध्यान दिलाया और राज्य सरकार से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की. यह हमला पिछले महीने हुआ था, लेकिन हाल ही में चर्चा में आने के बाद इसकी व्यापक निंदा हो रही है.
बडांगपेट में प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि वे इस तरह की हिंसा को चुपचाप नहीं देखेंगे और उन्होंने इसमें शामिल सभी लोगों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की. सामुदायिक संगठनों के साथ राजनीतिक दलों की मौजूदगी ने इस घटना के राजनीतिक पहलू को भी उजागर किया है, जिसमें कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस हमले के खिलाफ आवाज उठाई है.
बडांगपेट चौराहे पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात
कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रखने के लिए बडांगपेट चौराहे पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और प्रदर्शन के दौरान इलाके में यातायात को नियंत्रित किया गया.
पुलिस का कहना है कि वे वायरल वीडियो की जांच कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर खुद संज्ञान (suo motu) लेंगे, क्योंकि शुरुआती रिपोर्टों के समय पीड़ितों या उनके परिवारों की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी. यह प्रदर्शन इस बात की याद दिलाता है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में पुलिस और प्रशासन पर सख्त कार्रवाई करने के लिए जनता का दबाव बढ़ रहा है.
हमले की निंदा
इस घटना और इसके बाद हुए प्रदर्शन ने हैदराबाद में महिलाओं की सुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव जैसे बड़े मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है. वीडियो के वायरल होने और BRS विधायक सबिता इंद्रा रेड्डी समेत कई राजनीतिक नेताओं द्वारा इस हमले की निंदा किए जाने के बाद, यह मामला एक बड़ा मुद्दा बन गया है.
दलित ईसाई समूहों और राजनीतिक दलों द्वारा न्याय की मांग, जवाबदेही तय करने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा की सामूहिक पुकार को दर्शाती है. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, सबकी नज़रें पुलिस और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि क्या वे आरोपियों के खिलाफ त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करते हैं, और क्या प्रदर्शनकारी समूहों द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान किया जाता है.
