विपक्ष के खेमे में मौजूद गहरी दरारों को उजागर करते हुए, AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उनके साथ गठबंधन करने से ‘एलर्जी’ है, लेकिन साथ ही वह यह भी उम्मीद करती है कि सड़क पर उनकी पार्टी उन्हें समर्थन दे.
ओवैसी की यह तीखी टिप्पणी दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की मेगा-रैली के संदर्भ में आई है. उन्होंने साफ तौर पर खुद को इस रैली से अलग कर लिया है और कहा है कि “इससे मेरा कोई लेना-देना नहीं है.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के मुद्दे पर उनकी लड़ाई अदालत में चल रही है, न कि किसी राजनीतिक मंच पर.
कांग्रेस ने बार-बार AIMIM के साथ समझौते से किया इनकार
ओवैसी के गुस्से की मुख्य वजह कांग्रेस का विरोधाभासी रवैया है. कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने बार-बार AIMIM के साथ किसी भी तरह के चुनावी समझौते से इनकार किया है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने तो साफ तौर पर कहा है कि ओवैसी का “80:20 फॉर्मूला” और उनके राजनीतिक बयान, कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष लड़ाई के साथ मेल नहीं खाते. इसके बावजूद, यही नेतृत्व उम्मीद कर रहा था कि ओवैसी रामलीला मैदान की रैली में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों.
कांग्रेस को ओवैसी से है ‘एलर्जी’
ओवैसी ने सवाल किया, “आपको मेरे साथ गठबंधन करने से ‘एलर्जी’ है, और फिर भी आप उम्मीद करते हैं कि मैं सड़कों पर उतरूं और आपके साथ खड़ा रहूं? यह कैसी तर्कहीन बात है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में कोई भी बातचीत या काम केवल “समानता और आपसी सम्मान” के आधार पर ही हो सकता है. उन्होंने कांग्रेस के दोहरे मापदंडों पर कटाक्ष करते हुए एक तीखी कहावत का जिक्र किया: “जब आप कुछ करते हैं, तो उसे सच्ची निष्ठा माना जाता है, लेकिन अगर हम कुछ कह दें, तो हमारे चरित्र पर ही सवाल उठा दिए जाते हैं.”
दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित ‘कदीमी मस्जिद’ का विवाद
इसके अलावा, वक्फ संपत्ति से जुड़े विवाद पर बात करते हुए, ओवैसी ने केंद्र सरकार के उस नैरेटिव पर कड़ा प्रहार किया, जो दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित ‘कदीमी मस्जिद’ से जुड़ा है. उन्होंने बताया कि यह मस्जिद दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी बनने से बहुत पहले से मौजूद है और फल-फूल रही है. यहाँ तक कि अंग्रेजों ने भी ‘लुटियंस दिल्ली’ का विकास करते समय इस इलाके की मस्जिदों को सुरक्षित रखा था.
उन्होंने सवाल किया, “जब इसे एक रजिस्टर्ड वक्फ संपत्ति के रूप में मान्यता प्राप्त है, तो इसे सरकारी संपत्ति बताकर लोगों को गुमराह क्यों किया जा रहा है?” उन्होंने लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) के उस दावे पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि सरकारी कार्यालय परिसर के भीतर कोई स्थायी धार्मिक ढांचा, सरकारी संपत्ति के ‘धर्मनिरपेक्ष चरित्र’ के अनुकूल नहीं है.
ओवैसी ने मांग की कि अगर कोई इसके वक्फ दर्जे पर सवाल उठाना चाहता है, तो उसे ट्रिब्यूनल के पास जाना चाहिए, न कि हर मौके पर मस्जिदों को निशाना बनाना चाहिए या उन्हें नुकसान पहुंचाना चाहिए. उन्होंने पूछा, “बीजेपी सरकार के मन में मस्जिद के प्रति इतनी दुश्मनी क्यों है?” उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि सरकार ‘पुनर्विकास’ (रीडेवलपमेंट) के नाम पर जानबूझकर अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को निशाना बना रही है.
कांग्रेस और AIMIM के बीच भरोसे की कमी
ओवैसी के इस बयान के राजनीतिक महत्व को कम करके नहीं आंका जा सकता. यह ऐसे समय में आया है जब ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन बीजेपी के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में कांग्रेस द्वारा AIMIM को शामिल करने से इनकार करने के कारण यह गठबंधन कमजोर हो गया है. सरकार की SIR के खिलाफ कांग्रेस के विरोध का समर्थन करने के बावजूद, ओवैसी का ‘रामलीला रैली’ में शामिल न होना, दोनों के बीच भरोसे की कमी को दर्शाता है.
AIMIM केवल एक ‘वोट बैंक’ बनकर नहीं रहेगी
उन्होंने साफ कर दिया है कि AIMIM कांग्रेस के लिए केवल एक ‘वोट बैंक’ बनकर नहीं रहेगी जिससे यह उम्मीद की जाए कि वह बिना किसी सम्मान या सीट-बंटवारे के समझौते के अपना समर्थन देती रहे. वक्फ मस्जिद के मुद्दे को गठबंधन से मिली उपेक्षा के साथ जोड़कर, ओवैसी ने खुद को मुसलमानों के हितों की रक्षा करने वाली एकमात्र विश्वसनीय आवाज के रूप में पेश किया है, जबकि कांग्रेस को ‘मौकापरस्त’ और बीजेपी को ‘दुश्मन’ के तौर पर चित्रित किया है.
