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बंगाल का ‘काउंटिंग संग्राम’ पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, TMC की अर्जी खारिज, AIUDF बोला- चुनाव आयोग पर अब भरोसा नहीं


पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती को लेकर मचा घमासान अब सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है. चुनाव आयोग द्वारा मतगणना के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती के फैसले के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से पार्टी को कोई खास राहत नहीं मिली है. इस पूरे घटनाक्रम पर AIUDF नेता रफीकुल इस्लाम ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं.

“बंगाल के लिए अलग नियम क्यों?”

सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिप्पणी करते हुए रफीकुल इस्लाम ने कहा कि टीएमसी को अदालत से कोई विशेष राहत नहीं मिली है. उन्होंने शिकायत के लहजे में कहा, “चुनाव आयोग ने बंगाल में गिनती के लिए केंद्र और राज्य दोनों के कर्मचारियों को लगाया है. ऐसा दूसरे राज्यों में नहीं होता, लेकिन बंगाल में आयोग कुछ अलग ही कर रहा है. हमने यह चुनाव के दौरान भी देखा और अब गिनती के वक्त भी देख रहे हैं.” इस्लाम ने साफ तौर पर कहा कि यही वजह है कि टीएमसी अब चुनाव आयोग पर भरोसा नहीं कर पा रही है. उन्होंने उम्मीद जताई कि 4 जून को होने वाली मतगणना स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न होगी.

अदालत ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने टीएमसी की याचिका पर कोई भी नया निर्देश देने से साफ इनकार कर दिया. अदालत ने चुनाव आयोग के 13 अप्रैल के उस सर्कुलर को बरकरार रखा है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारियों की संयुक्त तैनाती की बात कही गई थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि आयोग के पास अधिकार है कि वह दोनों में से किसी भी समूह के कर्मचारियों को मतगणना के लिए नियुक्त कर सके. आयोग की ओर से पेश वकील डी. एस. नायडू ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस सर्कुलर का पूरी तरह और सही भावना के साथ पालन किया जाएगा.

असम में ‘मिशन 10-12’: बीजेपी को रोकने की तैयारी

पश्चिम बंगाल के साथ-साथ रफीकुल इस्लाम ने असम की राजनीति पर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि AIUDF असम में बदलाव चाहती है और राज्य में एक गैर-भाजपा सरकार का गठन उनका लक्ष्य है. उन्होंने अपनी रणनीति साझा करते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि हम 10 से 12 सीटें जीतेंगे. अगर असम में गैर-भाजपा सरकार बनाने के लिए किसी को हमारे समर्थन की जरूरत पड़ी, तो हम पूरा सहयोग करेंगे.” इस्लाम के इस बयान ने मतगणना से पहले ही असम के सियासी समीकरणों को गरमा दिया है.

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