ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान में विधानसभा में नेता विपक्ष नवीन पटनायक ने शनिवार (2 मई, 2026) को केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को एक पत्र लिखा है. नवीन पटनायक ने अपने पत्र में हाल ही में ओडिशा के क्योंझर जिले में सामने आई उस घटना को लेकर चिंता और दुख जताया है, जिसमें एक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत बहन के कंकाल को लेकर बैंक में उसके खाते से पैसे निकालने के लिए गया था.
निर्मला सीतारमण से पत्र में क्या बोले नवीन पटनायक?
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैं यह पत्र गहरे दुख और अत्यंत तात्कालिकता (Urgency) की भावना के साथ लिख रहा हूं, ताकि राज्य के क्योंझर जिले में स्थित ओडिशा ग्राम्य बैंक के मल्लिपोसी ब्रांच में हुई एक चौंकाने वाली घटना को आपके संज्ञान में ला सकूं.’ उन्होंने कहा, ‘एक आदिवासी नागरिक, जितु मुंडा को अपनी बहन की मौत का सबूत देने के लिए उसके कंकाल को कब्र से निकालकर बैंक तक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा, ताकि वह अकाउंट से अपनी वैध नकद राशि को निकाल सके. यह स्थिति तब उत्पन्न हुई जब उसने कई बार बैंक के चक्कर लगाए, लेकिन उसे अधिकारियों से कोई मदद नहीं मिली.’
BJD chief Naveen Patnaik writes to Union Finance Minister Nirmala Sitharaman.
“I write this letter with a sense of deep anguish and urgency to highlight a shocking incident that took place on April 27th in the Malliposi branch of the Odisha Gramya Bank in Keonjhar… https://t.co/l7417QGTCd pic.twitter.com/zhwCJWR2Ct
— ANI (@ANI) May 2, 2026
RBI के दिशा-निर्देशों का हवाला देकर किया अमानवीय व्यवहारः पटनायक
उन्होंने कहा, ‘इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक ने इस अमानवीय व्यवहार को RBI के दिशा-निर्देशों का हवाला देकर सही ठहराने की कोशिश की. यह दिखाता है कि बैंक अधिकारी प्रक्रियाओं के पीछे छिपकर उन्हीं लोगों को छोड़ रहे हैं, जिनकी सेवा करना उनका कर्तव्य है. लोकतंत्र में नियम नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए होते हैं, न कि उन्हें अपमानित करने के लिए. इस भयानक घटना ने पूरे ओडिशा में जनभावनाओं को ठेस पहुंचाई है और न्यूयॉर्क पोस्ट, बीबीसी जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान अपनी तरफ खींचा है.’
गंभीर लापरवाही की जवाबदेही की जाए तयः पटनायक
ओडिशा विधानसभा में नेता विपक्ष नवीन पटनायक ने कहा, ‘यह घटना भले ही एक अलग मामला हो, लेकिन यह हमें विशेषकर दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा मानवीय बैंकिंग व्यवस्था को लागू करने की जरूरत की तरफ संकेत देता है. इसलिए मैं सबसे पहले आपसे आग्रह करता हूं कि इस गंभीर लापरवाही के लिए तुरंत स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए. इससे सभी ग्रामीण बैंकों को यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि नागरिक-केंद्रित सेवा संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ प्रदान की जानी चाहिए.’ उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि आपके हस्तक्षेप से भविष्य में देश में कहीं भी इस प्रकार का अमानवीय व्यवहार को दोहराया नहीं जाएगा.’
