अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ इस साल रिकॉर्ड के तीसरे सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है. वैज्ञानिक इसे बड़ी समस्या बता रहे हैं. 14 सितंबर 2026 को बर्फ का क्षेत्रफल 17.59 मिलियन वर्ग किलोमीटर पर पहुंचा. 1979 से सैटेलाइट निगरानी शुरू होने के बाद पिछले 4 सालों में सर्दियों की बर्फ का सबसे कम अधिकतम स्तर दर्ज हुआ है.
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग इसका मुख्य कारण है. मोनैश यूनिवर्सिटी की डॉ. आरियान प्यूरिच ने कहा है कि अब यह एक बार की घटना नहीं रही. लगातार कम सर्दियां दिखाती हैं कि जलवायु गर्म होने से समुद्री बर्फ का व्यवहार बदल गया है. समुद्री बर्फ पिघलने से समुद्र का स्तर सीधे नहीं बढ़ता क्योंकि यह पहले से तैर रही होती है. अगर अंटार्कटिका की विशाल बर्फ की चादर समुद्र में गिरे तो वैश्विक समुद्र स्तर कई मीटर बढ़ सकता है.
समुद्र की बर्फ सबसे निचले लेवल पर
वैज्ञानिकों ने पुष्टि की है कि अंटार्कटिका में सर्दियों के दौरान समुद्र की बर्फ का स्तर रिकॉर्ड पर तीसरे सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो लंबे समय के औसत से 10 लाख वर्ग किलोमीटर या लगभग 400,000 वर्ग मील कम है. इस स्तर की पुष्टि का मतलब है कि इस महाद्वीप पर समुद्र की बर्फ जो समुद्री जीवन के लिए बहुत जरूरी है उसके रिकॉर्ड में सबसे कम स्तर पिछले चार सालों में ही दर्ज किए गए हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर के सीनियर साइंटिस्ट डॉ. वॉल्ट मीयर ने कहा कि सेंटर ने अधिकतम स्तर की घोषणा करने में देरी की क्योंकि महाद्वीप के समुद्री बर्फ चक्र के इस चरण में काफी उतार-चढ़ाव की संभावना थी. उन्होंने बताया कि 14 सितंबर के बाद से समुद्री बर्फ का स्तर गिर रहा है और अब उन्हें लगता है कि अधिकतम स्तर तक पहुंचा जा चुका है.
हर साल होता है उतार-चढ़ाव
अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ में हर साल बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है. गर्मियों में यह पिघलकर फरवरी में 2 मिलियन वर्ग किलोमीटर से भी कम हो जाती है और फिर सर्दियों में बढ़कर सितंबर में 17 मिलियन वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो जाती है, लेकिन हाल के सालों में सर्दियों और गर्मियों दोनों मौसमों में समुद्री बर्फ के सबसे कम स्तर के रिकॉर्ड टूटे हैं, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ऐसा हो सकता है.
एक्सपर्ट ने क्या कहा
मेलबर्न में मोनाश यूनिवर्सिटी में दक्षिणी महासागर की एक्सपर्ट डॉ. एरियान पुरिच ने कहा, “पिछली चार सर्दियों में समुद्री बर्फ का अधिकतम स्तर रिकॉर्ड के हिसाब से सबसे कम रहा है यह एक ऐसे सिस्टम का संकेत है जो बदल चुका है.” उन्होंने बताया कि समुद्री बर्फ अब महासागर के उतने बड़े हिस्से को नहीं ढकती, जितना पहले ढकती थी. हम लगातार सर्दियों में बर्फ का स्तर कम होते देख रहे हैं और इससे पता चलता है कि समुद्री बर्फ का व्यवहार अलग हो गया है क्योंकि हमने अपनी जलवायु को गर्म कर दिया है.
जून में अंटार्कटिक में हीटवेव चली, जिसमें तापमान सामान्य से 20 डिग्री सेल्सियस ज्यादा था, जबकि वैज्ञानिकों ने फ्रांस के आकार के बराबर खुले समुद्र का एक ऐसा इलाका देखा जहां बर्फ होनी चाहिए थी. अगस्त की शुरुआत में जब समुद्री बर्फ को लगातार बढ़ना चाहिए था, तब प्रशांत महासागर के दक्षिण में अमंडसेन सागर के एक बड़े इलाके से बर्फ गायब हो गई.
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