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‘आज कहीं न कहीं…’, दिल्ली में स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थन में विरोध प्रदर्शन


दिल्ली के जंतर-मंतर पर नाबालिग छात्रा के पिता के साथ हुई मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर उनके समर्थकों ने विरोध जताया है. समर्थकों ने पुलिस की कार्रवाई को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारद्वाज पर गलत आरोपों में केस दर्ज किया गया है. उनका कहना है कि मामले में कार्रवाई एकतरफा तरीके से की जा रही है.

दिल्ली में स्वतंत्र भारद्वाज के एक समर्थक ने कहा, “आपने वीडियो और पॉडकास्ट के आधार पर स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया, तो नाबालिग छात्रा के पिता की भी वीडियो चल रही है, जिसमें वह कह रहे हैं कि अगर पुलिस दो मिनट तक नहीं आती, तो हम स्वतंत्र भारद्वाज का क्या हाल करते.”

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समर्थक ने आगे कहा, “अपने बचाव का अधिकार मुझे संविधान देता है. जब 15-20 लोगों की भीड़ उन्हें जान से मारने के लिए आ रही थी, उस भीड़ से बचने के लिए अगर गलती से किसी को चोट लग गई, तो इसका मतलब आप उन पर SC/ST Act लगा देंगे? आप POCSO लगा देंगे?”

समर्थकों ने उठाया जाति का मुद्दा

इस दौरान स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थकों ने मामले को जातिगत नजरिए से भी जोड़ते हुए सवाल उठाए. एक समर्थक ने कहा, “आज कहीं न कहीं वही वाली बात याद आती है कि SC/ST की बात हो रही है, OBC की बात हो रही है, मगर जनरल समाज की बात कोई नहीं कर रहा. मुझे बताइए, क्या स्वतंत्र भारद्वाज की यही गलती है कि वह ब्राह्मण समाज से आते हैं? आज कोई भी ब्राह्मण नेता उनका साथ देने नहीं आ रहा.”

उन्होंने आगे कहा, “सौरभ दास ने जब सरकार से अपील की थी कि NEET प्रोटेस्ट की आड़ में जितने भी छात्रों और प्रदर्शनकारियों के ऊपर FIR दर्ज हुई हैं. सरकार उन सभी मामलों को वापस लेगी. सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई गई. आज मुझे बताइए कि स्वतंत्र भारद्वाज पर दर्ज मामला क्यों वापस नहीं लिया गया?”

UAPA को लेकर भी सरकार से सवाल

समर्थक ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “उन लोगों पर भी कार्रवाई कीजिए, जिन्होंने देश में सरकार को गाली दी, मोदी जी को गाली दी, देश विरोधी नारे लगाए और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का कृत्य किया. उन सब पर UAPA लगाइए ना. क्यों नहीं लगा रहे? सरकार किस वजह से डर रही है?”

उन्होंने सरकार से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की मांग की. समर्थक ने कहा, “हम सरकार से यही कहना चाहते हैं कि स्वतंत्र भारद्वाज पर लगाए गए इस तरह के जो भी केस और झूठे आरोप हैं, उन सभी को वापस लिया जाए. नहीं तो ब्राह्मण समाज अब सड़क पर उतरेगा.”

समर्थक ने आगे कहा, “हमें पता है कि ब्राह्मण समाज को दबाने के लिए सरकार हर वो पैंतरे अपना रही है, लेकिन ब्राह्मण समाज दबेगा नहीं. स्वतंत्र की आवाज अब पूरे भारत में गूंजेगी और हर उस सरकार के खिलाफ विरोध किया जाएगा, जो ब्राह्मणों के विरोध में कोई कानून लेकर आएगी.”

दूसरे समर्थक ने पूछा- लोकतंत्र है या भीड़तंत्र?

स्वतंत्र भारद्वाज के एक और समर्थक ने कहा, “क्या यह लोकतंत्र है या भीड़तंत्र? मेरा मतलब है कि यहां 400-500 लोग इकट्ठा होते हैं, पुलिस पर दबाव बनाते हैं और फिर सिर्फ किसी का सरनेम और टाइटल देखकर, यह देखकर कि वह भारद्वाज है, उसके खिलाफ SC/ST का मामला दर्ज करने की मांग करते हैं.”

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उन्होंने आगे कहा, “जब प्रदर्शन खत्म नहीं हुआ था, तब उन्होंने SC/ST के तहत मामला दर्ज करने की मांग क्यों नहीं की? प्रदर्शन को खत्म हुए इतने दिन हो चुके हैं और मारपीट व विवाद की घटना को भी दो महीने हो चुके हैं. फिर उन्हें अचानक अब SC/ST की याद क्यों आई? नहीं, ऐसा इसलिए है क्योंकि अब उन्हें पता चला है कि उसका सरनेम भारद्वाज है.”





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