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आलू बेचें तो घाटा, स्टोर में रखें तो खर्च! यूपी के किसानों पर दोहरी मार


Potato Farmers UP: उत्तर प्रदेश में आलू की खेती करने वाले किसानों की मुश्किल बढ़ गई है. पहले किसानों ने खेतों में मेहनत करके आलू उगाया, फिर अच्छे दाम मिलने की उम्मीद में कोल्ड स्टोर में रख दिया. लेकिन अब बाजार में भाव इतना नीचे है कि, आलू बेचकर उसका किराया निकालना भी मुश्किल हो रहा है. बाजार में मंदी होने के कारण आलू का थोक भाव 200 से 240 रुपये प्रति क्विंटल बताया जा रहा है, जबकि कोल्ड स्टोर में एक क्विंटल आलू रखने का किराया करीब 250 से 280 रुपये है. यानी किसान के सामने अपनी फसल बेचने पर भी नुकसान उठाने की नौबत आ गई है.

उत्तर प्रदेश के इटावा में इस साल 58 कोल्ड स्टोर में करीब 6.13 लाख मीट्रिक टन आलू रखा गया था. 15 अक्टूबर तक इसमें से लगभग आधा आलू ही बाहर निकाला जा सका था. पिछले साल इसी समय तक 60 फीसदी से ज्यादा आलू निकल चुका था. अब 31 अक्टूबर तक आलू निकालने की समयसीमा नजदीक आ रही है, लेकिन कम भाव के कारण किसान परेशान हैं.

किराया ही नहीं, खेती की लागत निकालना भी मुश्किल

मान लीजिए किसान को एक क्विंटल आलू बेचने पर 220 रुपये मिल रहे हैं, जबकि उसे कोल्ड स्टोर का किराया 250 रुपये देना है. ऐसे में सिर्फ किराये के मुकाबले ही उसे 30 रुपये कम मिलेंगे. इसमें खेती और ढुलाई का खर्च शामिल नहीं है. यही वजह है कि कुछ किसान कम दाम पर आलू बेचने के बजाय उसे स्टोर में ही छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं. इसका असर कोल्ड स्टोर संचालकों पर भी पड़ता है. आलू बाहर नहीं निकलने से जगह खाली नहीं होती और किराया भी अटक जाता है.

सरकारी मदद, लेकिन हर किसान को फायदा नहीं

आलू भंडारण शुल्क अनुदान योजना के तहत पात्र किसानों को निजी कोल्ड स्टोर में आलू रखने पर 100 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता दी जाती है. एक किसान को अधिकतम 20 हजार रुपये तक अनुदान मिल सकता है. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बटाई पर जमीन लेकर खेती करने वाले कई किसान इस मदद से बाहर रह जाते हैं. जिले में ऐसे किसानों की हिस्सेदारी 50 फीसदी से ज्यादा बताई गई है.

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किसानों को किस राहत की जरूरत है?

किसानों की सबसे बड़ी मांग है कि आलू का उचित दाम मिले और कोल्ड स्टोर का खर्च कम करने में मदद की जाए. जुलाई 2026 में आगरा में भी किसानों को 250 रुपये प्रति क्विंटल भंडारण सहायता देने की मांग उठी थी. अगर बाजार में भाव लागत से नीचे बना रहता है, तो अच्छी पैदावार के बावजूद किसानों की कमाई नहीं हो पाती. फिलहाल इटावा के किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आलू बेचकर नुकसान कम करें या भाव बढ़ने की उम्मीद में इंतजार करें.

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