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इजरायल चुनाव: किसी पार्टी को बहुमत नहीं, अरब पार्टियां करेंगी ‘खेला’, नेतन्याहू का क्या होगा?


इजरायल में संसदीय चुनावों की मतगणना पूरी कर ली गई है. वोटों की गिनती पूरी होने के बाद किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों के आंकड़े तक कोई नहीं पहुंचा है. नेतन्याहू गुट के पास 53 सीटें हैं. नेतन्याहू-विरोधी गुट आइसेनकोट के पास 48 और अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं. कुल मतदान 77.9% रहा, जिसमें कुल 5,716,665 वोट डाले गए. 

केंद्रीय चुनाव समिति ने फिर दोहराया है कि कथित चुनावी धांधली की जांच का अंतिम नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. कुल मतदान 77.9% रहा, जो पिछले कई दशकों में सबसे अधिक है और इस दौरान कुल 5,716,665 वोट डाले गए. केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) ने शुक्रवार तड़के 2026 के राष्ट्रीय चुनावों के अंतिम नतीजे जारी किए. नेतन्याहू-समर्थक गुट की पार्टियों के पास पिछली संसद में 68 सीटें थीं. इस बार सीटों की संख्या में भारी गिरावट आई है.

किसे कितनी सीटें
CEC बुधवार को राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग के सामने आधिकारिक नतीजे पेश करेगी. इसके बाद राष्ट्रपति हर्ज़ोग हर पार्टी के नेता से मुलाकात करेंगे, जो उन्हें अपनी सिफारिश देंगे कि उनके अनुसार किसे अगली सरकार बनानी चाहिए. अंतिम नतीजों के अनुसा लिकुद पार्टी को 27 सीटें, यशार को 21, बी’याचाद को 12, जॉइंट लिस्ट को 11, द डेमोक्रेट्स को 8, रा’अम को 8, यिसराएल बेतेनु को 7, यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म को 7, ओत्ज्मा येहुदित को 7, शस को 6 और रिलीजियस ज़ायोनिज्म को 6 सीटें मिली हैं. 

अरब पार्टियों के हाथ में सत्ता की चाबी 
अरब-नेतृत्व वाली पार्टियां (‘जॉइंट लिस्ट’ और ‘राअम’) ने कुल 19 सीटें जीतीं. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और उनकी मौजूदा 10 सीटों से लगभग दोगुना है. अगर ‘द डेमोक्रेट्स’ को छोड़कर जायोनी गुट के बाकी सभी सदस्यों ने ‘राअम’ या ‘जॉइंट लिस्ट’ के साथ सहयोग करने से इनकार न किया होता, तो यह संख्या नेतन्याहू-विरोधी गुट को स्पष्ट बहुमत दिलाने के लिए काफी होती.

केंद्रीय चुनाव समिति का बयान
शुक्रवार तड़के जारी एक बयान में CEC ने गुरुवार को कार्यवाहक निदेशक डीन लिवने की बातों को दोहराया. उन्होंने बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के दावों को खारिज कर दिया. ये दावे ऐसे समय में सामने आए थे, जब खबरें थीं कि कतर ने मतदान को प्रभावित करने के लिए कोई अभियान चलाया हो सकता है. लिवने ने कहा, “दिन भर छपीं रिपोर्टें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं.” उन्होंने स्पष्ट किया कि चल रही जांच का राष्ट्रपति को सौंपे जाने वाले अंतिम नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही इसका संबंध आबादी के किसी खास वर्ग से है.

ऐसे में इजरायल में अगली सरकार बनाने में काफी दिक्कतें आएंगी और 2 महीने से ज्यादा का समय लग सकता है. फिलहाल कोई भी पक्ष 61 सीटों के जरूरी बहुमत के आंकड़े के करीब नहीं है, फिर भी 10 नवंबर को नेसेट (संसद) में शपथ ग्रहण होना तय है.

राष्ट्रपति की अपील
हर्ज़ोग ने बुधवार को पार्टी नेताओं से अपील की कि वे एक और चुनाव से बचने के लिए हर संभव कोशिश करें. उन्होंने कहा, “खासकर कल के घटनाक्रम के बाद हमें एक और चुनाव से बचने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए. इसलिए, मेरी उम्मीद है कि जो भी यहां आए, वह खुले दिमाग से आए.” इस सबके बावजूद नेतान्याहू और आइसेनकोट दोनों ने ही दावा किया है कि अगली सरकार वही बनाएंगे.

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