राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रदेश सचिव सह मुख्य प्रवक्ता रामपुकार सिन्हा को छह साल के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया गया है. पार्टी निर्णय के विरुद्ध वे सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी चुनाव में निर्दलीय नामांकन दाखिल किया है. इसके कारण उनपर यह कार्रवाई की गई है. क्योंकि एनडीए में जेडीयू से पुष्कर आनंद यहां से उम्मीदवार हैं. इसी के चलते यह फैसला लिया गया है.
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के तीन विधायकों (माधव आनंद,आलोक सिंह और रामेश्वर महतो) ने अपना समर्थन रामपुकार सिन्हा को दिया है. तीनों विधायक नामांकन के दिन मौजूद थे. इन तीनों के समर्थन के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया.
इन तीन विधायकों में आरएलएम के प्रदेश अध्यक्ष और दिनारा विधायक आलोक कुमार सिंह, मधुबनी विधायक माधव आनंद और बाजपट्टी विधायक रामेश्वर महतो शामिल हैं. तीनों विधायकों ने रामपुकार सिन्हा के नामांकन का समर्थन करते हुए उनके पक्ष में अपना रुख स्पष्ट किया था.
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पार्टी के भीतर टकराव के संकेत
अब निष्कासन की कार्रवाई के बाद पार्टी के भीतर टकराव और बढ़ने के संकेत हैं. आरएलएम विधायक दल के नेता और राष्ट्रीय प्रधान महासचिव माधव आनंद ने कहा है कि रामपुकार सिन्हा का समर्थन करना पार्टी का फैसला है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और विधायक किसी निर्णय पर सहमत हैं, तो इसे बगावत कैसे कहा जा सकता है? माधव आनंद ने यह भी स्पष्ट किया कि वे एनडीए के साथ हैं और आगे भी बने रहेंगे.
वहीं, उपेंद्र कुशवाहा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि आरएलएम एनडीए के साथ है और गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवार का समर्थन करेगी. रामपुकार सिन्हा के निष्कासन ने ऐसे समय में पार्टी के अंदर नेतृत्व और अनुशासन को लेकर विवाद बढ़ा दिया है, जब बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होनी है.
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