- घर के मध्य में सीढ़ियां: ऊर्जा प्रवाह बाधित, करें समाधान.
Vastu tips for New Home: घर का मतलब केवल दीवारें और ईंटें नहीं होता, यह सपनों का साकार होना, परिवार की खुशियां और खुशियों से भरा जीवन होता है. हालांकि कभी कभी खूबसूरत घर में भी अस्थिरता देखने को मिल सकती है, सेहत प्रभावित हो सकता है और आर्थिक परेशानियां एकाएक बढ़ सकती है. शायद इसका असल कारण वास्तु दोष हो सकता है, यानी घर की ऊर्जाओं का असंतुलन होना.
वास्तु शास्त्र, भवन निर्माण का पारंपरिक विज्ञान है, जो घर को प्रकृति की शक्तियों के साथ सामंजस्य बिठाने में मदद करता है, जिससे शांति, समृद्धि और सेहत प्राप्त होता है. अनजाने में ही ज्यादातर लोग वास्तु संबंधी छोटी छोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिसके कारण उन्हें बुरे परिणाम का सामना करना पड़ सकता है.
घर खरीदते समय की जाने वाली 5 बड़ी वास्तु गलतियां
मुख्य द्वारा गलत दिशा में होना
मुख्य द्वारा घर का प्रवेश द्वारा होता है, जिससे एनर्जी अंदर आती है और पूरे घर में फैलती है. अगर यह गलत दिशा में हो तो बुरी ऊर्जा प्रवेश करती है और नकारात्मक एनर्जी उत्पन्न करती है. मुख्य द्वारा की सही दिशा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होनी चाहिए.
यह परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, विकास और शांति लाने का काम करती है. वहीं दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा मुख्य द्वार के लिए अशुभ मानी जाती है, क्योंकि इससे झगड़े, तनाव और सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.
यदि मुख्य द्वारा वास्तु के अनुरूप नहीं है, तो आपको द्वार के फ्रेम पर वास्तु पट्टी लगानी चाहिए. आप द्वार के ठीक सामने नहीं, बल्कि उसके सामने अंदर की एक दर्पण भी लगा सकते हैं. इसके साथ ही आप द्वार पर ओम या स्वास्तिक जैसे चिन्हों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
उत्तर-पूर्व कोने में शौचालय
घर का उत्तर-पूर्व भाग पवित्र माना जाता है और यह जल, शांति और ज्ञान से जुड़ा है. उत्तर पूर्व कोने में शौचालय होने से ऊर्जा अवरुद्ध होती है. लेकिन अगर आपको पहले से बना हुआ घर मिलता है जिसमें शौचालय इस कोने में है, तो आप बाथरूम को साफ और रोशनदान करके वास्तु दोष की समस्या से बच सकते हैं.
लोग नकारात्मकता को दूर करने के लिए एक कटोरे में समुद्री नमक का भी इस्तेमाल करते हैं. दरवाजे पर वास्तु पिरामिड या पीतल की मूर्ति लगाने से वास्तु दोष दूर करने में काफी सहायता मिलती है.
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रसोई गलत जगह पर स्थित
रसोई घर के दक्षिण-पूर्व कोने में होनी चाहिए. गलत दिशा में रसोई होने से गुस्से और सेहत संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. वास्तु विशेषज्ञ संजीत कुमार मिश्रा का कहना है कि, घर में रसोई के लिए सबसे अच्छी जगह दक्षिण पूर्व (अग्नि कोण) दिशा है.
आपको रसोई को घर के उत्तर या उत्तर-पूर्व कोने में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे परिवार और महिलाओं के सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.
अगर रसोई घर गलत जगह पर बनी है, तो ऊर्जा को संतुलन करने के लिए रसोई घर की दीवारें लाल या नारंगी रंग की होनी चाहिए. इसके साथ ही गैस-चूल्हे को दक्षिण-पूर्व कोने में रखने से भी काफी मदद मिलती है, लेकिन खाना बनाते समय दक्षिण दिशा की ओर मुंह करने से बचना चाहिए.
घर के बीच में सीढ़ियां
घर के केंद्र को ब्रह्मस्थान भी कहा जाता है, और इसे हमेशा खाली और साफ रखना सही माना जाता है. यहां सीढ़ी होने से ऊर्जा का प्रवाह बाधित होता है, जिससे परेशानी होती है. सीढ़ी के पास शीशा लगाकर ऊर्जा को परावर्तित करके इसे ठीक किया जा सकता है.
स्थान को संतुलित करने के लिए तांबे या पीतल के पिरामिड का इस्तेमाल करना चाहिए. ज्योतिष के जानकार संजीत कुमार मिश्रा बताते हैं कि, घर के बीच में भारी सामान या फर्नीचर रखने से बचना चाहिए.
कम गुणवत्ता वाली जमीन को खरीदना
आपकी भूमि का आकार ऊर्जा के प्रवाह पर असर डालता है. जिन भूखंडों में कोने गायब हों या अतिरिक्त कोने हों, वे जमीन के सामंजस्य को बिगाड़ देते हैं, जिससे वहां रहने वाले व्यक्ति के जीवन में बड़ी परेशानियां आती हैं.
जमीनों के लिए आदर्श और सर्वोत्तम आकार वर्गाकार या आयताकार होते हैं. अनियमित आकार या दक्षिण-पश्चिम दिशा में कटे हुए भूखंडों से बचें.
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