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ट्रेन में TTE ने मांगा टिकट तो रोने लगी लड़की, यूजर्स बोले- मैडम ड्रामा नहीं


सोशल मीडिया पर ट्रेन के सफर से जुड़ा एक और ड्रामा वायरल हो रहा है, जिसने इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है. दावा किया जा रहा है कि रिजर्व्ड कोच में बिना टिकट सफर कर रही एक लड़की से जब TTE ने टिकट मांगा, तो नियम का पालन करने के बजाय मैडम विक्टिम कार्ड खेलने लगीं. जैसे ही टिकट चेकिंग अधिकारी ने पेनल्टी या टिकट दिखाने को कहा, लड़की अचानक इमोशनल हो गई और रुआंसी होकर बोली “ये होता है लड़कियों के साथ.” हालांकि इस पूरे मामले और वीडियो की पूरी सच्चाई की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने इंटरनेट पर जेंडर कार्ड बनाम रेलवे नियमों की बहस को हवा दे दी है.

TTE ने मांगा टिकट तो बनीं बेचारी, विक्टिम कार्ड देख सहयात्री भी हैरान

सामने आई जानकारी के मुताबिक, लड़की ट्रेन की आरक्षित बोगी में आराम से सफर कर रही थी. चेकिंग के दौरान जब टीटीई ने उनसे टिकट दिखाने का आग्रह किया, तो कोई वैध टिकट पेश करने के बजाय लड़की अचानक रोने-धोने लगी. बात इतने पर ही खत्म नहीं हुई, उसने टीटीई पर सवाल खड़े करते हुए सीधे कह दिया कि लड़कियों को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है. बोगी में मौजूद बाकी यात्री भी लड़की का यह रवैया देखकर हैरान रह गए कि जब बात सिर्फ रेलवे के नियम मानने की है, तो इसमें जेंडर कहां से आ गया.

‘रूल सबके लिए बराबर हैं’, सोशल मीडिया पर भड़के लोग

जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर छाया, यूजर्स ने लड़की की क्लास लगानी शुरू कर दी. लोग साफ तौर पर कह रहे हैं कि ट्रेन में बिना टिकट चलना गैरकानूनी है, चाहे आप लड़के हों या लड़की. इंटरनेट पर यूजर्स कमेंट कर रहे हैं कि टीटीई सिर्फ अपनी ड्यूटी निभा रहा था, लेकिन हर बात में “लड़कियों के साथ ऐसा होता है” वाला कार्ड खेलना बिल्कुल गलत है. लोगों का कहना है कि अगर नियम का पालन कराना उत्पीड़न है, तो फिर रेलवे को टिकट सिस्टम ही खत्म कर देना चाहिए.

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रेलवे नियम और पैसेंजर की जिम्मेदारी पर छिड़ी बहस

इस घटना ने एक बार फिर रेलवे में बिना टिकट यात्रा करने वालों और ऑन-ड्यूटी अधिकारियों के अधिकारों पर बड़ी बहस छेड़ दी है. नेटिजन्स का कहना है कि नियमों का पालन हर नागरिक के लिए एक समान होना चाहिए. निष्पक्षता और सम्मान दोनों तरफ से जरूरी है. अधिकारी को मर्यादा में रहकर काम करना चाहिए और यात्री को बिना किसी फालतू ड्रामे के रेलवे के कायदे-कानूनों का सम्मान करना चाहिए.

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