नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम् में चले 18वें ब्रिक्स सम्मेलन का समापन हो गया है. इस सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समापन टिप्पणी करते हुए कार्यक्रम में सक्रियता भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया. इसके अलावा उन्होंने अगले ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए चीन को भी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘दोस्तों, 18 वें ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के समापन पर में आप सभी की सक्रियता सहभागिता और मूलयवान योगदान के लिए ह्रदय से धन्यवाद देता हूं. आपके महत्वपूर्ण विचारों और सुझावों ने हमारे सहयोग को व्यापकता भी दी है और गहराई भी दी है. आपकी उपस्थिति BRICS की बढ़ती प्रासंगिकता, खुलेपन और समावेशिता का प्रमाण है. पिछले दो दिनों की हमारी चर्चाओं ने हमारा विश्वास और मजबूत किया है कि ब्रिक्स केवल देशों का समूह ही नहीं, बल्कि समाधानों का एक एक सिस्टम है.’
Sharing my concluding remarks during BRICS Session on ‘Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth.’ https://t.co/4E8aBDksfK
— Narendra Modi (@narendramodi) September 13, 2026
‘नई दिल्ली घोषणापत्र हमारी साझा सोच-सहयोग को स्पष्ट दिशा देगा’
उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि इस समिट में अपनाया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ हमारी साझा सोच और भविष्य के सहयोग के लिए एक स्पष्ट दिशा देगा. हमें सभी नतीजों को तय समय-सीमा वाले कामों में बदलना होगा, जिनका असर ज़मीनी स्तर तक दिखे. हम मिलकर यह पक्का करेंगे कि हमारा फ्रेमवर्क सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि असल जिंदगी में ठोस असर डाले.’
‘ब्रिक्स अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा’
उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश करने जा रहा है. दुनिया अब हमसे सिर्फ विचारों और वादों का नहीं, बल्कि ठोस नतीजों की उम्मीद करती है. मुझे भरोसा है कि हम अपनी सामूहिक कोशिशों से इन उम्मीदों पर जरूर खरे उतरेंगे. मैं BRICS की अगली मेजबानी के लिए चीन को एक बार फिर शुभकामनाएं देता हूं. नई दिल्ली समिट को सफल बनाने के लिए मैं आप सभी और आपकी टीमों की विशेष रूप से सराहना करता हूं. मैं आप सभी की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना करता हूं.’
इधर, सम्मेलन की समाप्ति से पहले चीन और रूस के राष्ट्रपति अपना-अपना दौरा समाप्त करके वापस अपने वतन लौट गए हैं. दिल्ली डिक्लेरेशन प्रस्ताव की स्वीकृति को सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर भारत देख रहा है.
