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‘तिहाड़ जेल में होगा रिटायरमेंट’, महुआ मोइत्रा ने ज्ञानेश-मनोज अग्रवाल को घेरा


पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा और पार्टी नेता सागरिका घोष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं. वहीं, चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य के 24 जिला चुनाव अधिकारियों (DEO) ने ऐसे पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है, जिनके नाम छूट गए हो सकते हैं. यह अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है, जब SIR के बाद बड़ी संख्या में अपीलें लंबित होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

TMC नेता महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल पर निशाना साधा. उन्होंने दोनों पर मतदाताओं के अधिकारों को लेकर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि बंगाल में ‘वोट चोर’ ज्ञानेश और उनके साथी ‘वोट चोर’ मनोज अग्रवाल अब अपने कारनामों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं. गद्दारों, तुम बचोगे नहीं – तुम्हारा रिटायरमेंट तिहाड़ जेल में होगा.

सागरिका घोष ने भी चुनाव आयोग को घेरा

TMC नेता सागरिका घोष ने भी X पर चुनाव आयोग की आलोचना की. उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होने और BJP के सत्ता में आने के बाद आयोग ने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है. घोष ने इसे चुनाव आयोग की वर्किंग सिस्टम पर सवाल उठाने वाला मामला बताया और 2026 के विधानसभा चुनाव में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए.

24 जिलों में पात्र मतदाताओं के लिए विशेष अभियान

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के मुताबिक, चुनाव आयोग के निर्देश पर राज्य के 24 जिला चुनाव अधिकारियों ने यह अभियान शुरू किया है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता वोटर लिस्ट से बाहर न रह जाए. इसके तहत विशेष सहायता शिविर लगाए जा रहे हैं. अधिकारियों को ऐसे लोगों की पहचान करने और नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा गया है. जरूरत पड़ने पर मतदाता बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) या जिला चुनाव अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं.

SIR के बाद अपीलों को लेकर भी सवाल

पश्चिम बंगाल में SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए लोगों को अपील करने का मौका दिया गया था. इन मामलों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए. हालांकि, बड़ी संख्या में अपीलें लंबित रहने को लेकर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं. 12 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में ट्रिब्यूनल के सामने करीब 38 लाख अपीलें लंबित थीं. इनमें नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलें भी शामिल हैं. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा था कि ट्रिब्यूनल में लंबित मामलों वाले मतदाता नए सिरे से नाम जुड़वाने के अभियान का हिस्सा बन सकते हैं या नहीं.

आज कोलकाता में ममता बनर्जी की रैली

इस बीच TMC ने 13 अक्टूबर को कोलकाता में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध मार्च का ऐलान किया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च राजाबाजार से पार्क सर्कस तक निकाले जाने की योजना है. ममता बनर्जी के इसमें शामिल होने को लेकर पहले अनिश्चितता जताई गई थी. इस तरह पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची, SIR और लंबित अपीलों को लेकर राजनीतिक टकराव जारी है.



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