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तेल $108 पार, सामने Putin-क्या मोदी निकाल पाएंगे भारत को महंगाई से बचाने का रास्ता?


दिल्ली में Vladimir Putin का विमान उतर चुका है. उसी सुबह बाजार की स्क्रीन पर एक दूसरा आंकड़ा चमक रहा था Brent Crude 108 डॉलर प्रति बैरल के पार. रुपया फिसला. शेयर बाजार तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंच गया.

अब नजर उस कमरे पर है, जहां प्रधानमंत्री Narendra Modi और पुतिन आमने-सामने बैठेंगे.

सवाल यह नहीं कि इस मुलाकात के अगले दिन पेट्रोल सस्ता हो जाएगा या नहीं. असली सवाल बड़ा है. महंगे तेल और घटते रूसी उत्पादन के बीच क्या भारत अपने लिए सस्ती कीमत, सुरक्षित भुगतान और लगातार सप्लाई का रास्ता निकाल पाएगा?

भारत, रूस और पुतिन की कुंडलियां बातचीत की मजबूत जमीन दिखा रही हैं. लेकिन सितारे यह नहीं कहते कि मॉस्को अपनी कमाई छोड़कर भारत को खुली छूट दे देगा. रास्ता निकल सकता है, मगर उसकी शर्तें आसान नहीं होंगी.

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बैठक से पहले बाजार ने बजा दी खतरे की घंटी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री रास्तों पर मंडराते खतरे के बीच 11 सितंबर को Brent Crude 108 डॉलर से ऊपर चला गया. एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमत करीब 13 प्रतिशत बढ़ी है.

इसका असर भारत पर तुरंत दिखा. Sensex और Nifty तीन महीने के निचले स्तर तक पहुंच गए. डॉलर के मुकाबले रुपया 95.79 तक कमजोर हुआ. मुद्रा बाजार के कारोबारियों के अनुसार रुपये को संभालने के लिए RBI को दखल देना पड़ा.

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेश से खरीदता है. इसलिए महंगा तेल सिर्फ पेट्रोल पंप की समस्या नहीं है. इससे देश का Import Bill बढ़ता है. रुपया कमजोर होता है. माल ढोना महंगा पड़ता है. फिर यही बोझ खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान तक पहुंचता है.

इसीलिए आज की मोदी-पुतिन मुलाकात BRICS की औपचारिक तस्वीर से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

क्या Russian Oil अभी भी सस्ता है?

कहानी में असली मोड़ यहां आता है. रूस भारत को लगभग 25 से 26 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल दे रहा है. लेकिन हाल की बाजार रिपोर्ट में Urals Crude को Brent के मुकाबले करीब एक डॉलर महंगा बताया गया है. यानी कभी भारत को बड़ा फायदा पहुंचाने वाला Russian Discount फिलहाल अपने पुराने रूप में दिखाई नहीं दे रहा.

इसलिए PM मोदी के सामने केवल ज्यादा तेल मांगने का सवाल नहीं होगा. असली बातचीत इन बातों पर टिक सकती है-

  • रूस कितने समय तक सप्लाई की गारंटी देगा?
  • तेल की कीमत किस Formula से तय होगी?
  • Shipping और Insurance का खर्च कितना पड़ेगा?
  • प्रतिबंधों के बीच भुगतान किस रास्ते से होगा?
  • क्या भारत को Long-term Contract पर बेहतर शर्त मिलेगी?

दोस्ती अपनी जगह है. तेल का हिसाब अलग है.

रूस के पास तेल है, लेकिन उत्पादन पर बढ़ रहा दबाव

कीमत ही अकेली मुश्किल नहीं है. रूस की सप्लाई पर भी दबाव बढ़ रहा है.

IEA ने 11 सितंबर को रूस के तेल उत्पादन का अनुमान फिर घटा दिया. अगस्त में रूसी उत्पादन करीब 83.6 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. यह जुलाई से दो लाख बैरल और जनवरी से 9.4 लाख बैरल प्रतिदिन कम है.

IEA ने 2026 के लिए रूस के औसत उत्पादन का अनुमान 1.25 लाख बैरल प्रतिदिन घटाकर करीब 87 लाख बैरल कर दिया है. यूक्रेनी हमलों से रूसी Refinery और Energy Infrastructure को हुए नुकसान को इसके पीछे बड़ी वजह माना गया है.

इसका अर्थ साफ है. भारत को पुतिन से केवल बेहतर कीमत नहीं चाहिए. उसे यह भरोसा भी चाहिए कि अगले कई महीनों तक तेल बिना बड़ी रुकावट के मिलता रहेगा.

रूस के पास कच्चा तेल है, मगर उसका उत्पादन और Refining Network दबाव में है. इसलिए मॉस्को ऊंची कीमत का फायदा उठाना चाहेगा. साथ ही वह भारत जैसे बड़े और भरोसेमंद खरीदार को हाथ से भी नहीं जाने देना चाहेगा.

यही वह जगह है, जहां PM मोदी के लिए सौदे की गुंजाइश बनती है.

8 सितंबर को रूस की दशा में क्या बदला?

रूस की उपलब्ध कुंडली 12 जून 1990, दोपहर 1 बजकर 41 मिनट, मॉस्को की है. इसमें कन्या लग्न और मकर राशि का चंद्रमा है. जन्म नक्षत्र श्रवण है.

रूस पर गुरु की महादशा और शनि की अंतर्दशा का प्रभाव चल रहा है. यह मेल लंबे संघर्ष, प्रतिबंध, उत्पादन में रुकावट और आर्थिक दबाव की स्थिति दिखाता है.

लेकिन 8 सितंबर के बाद बुध की प्रत्यंतर दशा सक्रिय हुई है.

कन्या लग्न की कुंडली में बुध लग्न और दशम भाव का स्वामी है. जन्मकुंडली में वह नवम भाव में सूर्य के साथ बैठा है. मेदिनी ज्योतिष में बुध व्यापार, कीमत, समझौते, दस्तावेज, बैंकिंग और भुगतान का कारक माना जाता है.

शनि तेल उत्पादन पर दबाव और पुराने ढांचे की कमजोरी दिखा रहा है. उसके बीच सक्रिय हुआ बुध संकट को खत्म नहीं करता. वह उपलब्ध संसाधन को किसी नए Contract, Price Formula या Payment व्यवस्था से संभालने की कोशिश करता है.

रूस ने BRICS Summit से पहले यह भी कहा है कि वह किसी एक मुद्रा को हटाने की मुहिम नहीं चला रहा, लेकिन स्वीकार्य भुगतान तरीकों पर बातचीत के लिए तैयार है.

इसलिए कुंडली बड़ी छूट से ज्यादा एक व्यवस्थित और लंबी अवधि के सौदे की संभावना दिखाती है.

पुतिन सौदा करेंगे, लेकिन रूस का फायदा छोड़कर नहीं

पुतिन की कुंडली 7 अक्टूबर 1952, सुबह 9 बजकर 30 मिनट, सेंट पीटर्सबर्ग की है. इसमें तुला लग्न, वृषभ राशि और कृत्तिका नक्षत्र का चंद्रमा है.

इस समय उनकी बुध-शुक्र-शुक्र दशा चल रही है. वर्षफल में भी 29 अगस्त से 19 सितंबर तक शुक्र की मुद्दा दशा सक्रिय है.

यानी जन्मकुंडली और वर्षफल, दोनों में बुध और शुक्र बातचीत के केंद्र में हैं.

शुक्र पुतिन की राशि कुंडली में तुला लग्न में अपने ही घर का है. नवांश में शुक्र मीन राशि में उच्च का और बुध कन्या में मजबूत है. दशमांश में मंगल मकर में उच्च का, शनि मकर में अपने घर का और गुरु धनु में अपने घर का है.

सरल भाषा में इसका अर्थ है-पुतिन बातचीत करने आए हैं, लेकिन किसी मजबूरी में झुकने के लिए नहीं. उनके पीछे सत्ता, रणनीति और मोलभाव की मजबूत जमीन है.

षड्बल भी यही कहानी कहता है. पुतिन की कुंडली में शुक्र का बल अनुपात 1.40 और बुध का 1.04 है. इसके उलट चंद्रमा 0.91 और शनि 0.89 पर अपेक्षाकृत कमजोर हैं.

सौदा करने की क्षमता मजबूत है. लेकिन दबाव और अविश्वास भी साथ चल रहे हैं. पुतिन भारत को सप्लाई का भरोसा दे सकते हैं. भुगतान के नए रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं. मगर रूस की कमाई घटाने वाली बड़ी छूट आसानी से देंगे, ऐसा संकेत नहीं है.

भारत की कुंडली कहां राहत और कहां खतरा दिखाती है?

भारत की प्रचलित राष्ट्रीय कुंडली 15 अगस्त 1947, रात 12 बजे, दिल्ली की है. इसका लग्न वृषभ है. तीसरे भाव में सूर्य, चंद्रमा, बुध, शुक्र और शनि का जमाव है.

देश की कुंडली में तीसरा भाव संवाद, समझौता और रणनीतिक पहल दिखाता है. कई ग्रहों का यहां होना बताता है कि भारत कठिन समय में भी बातचीत का दरवाजा खुला रखता है.

भारत के दशमांश में शुक्र तुला राशि में अपने घर का है. विदेश नीति में संबंध बनाए रखते हुए अपना हित निकालना भारत की ताकत है.

षड्बल में शुक्र का अनुपात 1.45 और मंगल का 1.44 है. यानी कूटनीति और निर्णायक कदम भारत के पक्ष में काम कर सकते हैं. लेकिन बुध 0.97 पर सीमा के करीब और गुरु 0.78 पर कमजोर है. इससे बड़े वादों और अधूरी जानकारी वाले आर्थिक प्रस्तावों को लेकर सावधानी जरूरी हो जाती है.

सबसे अहम संकेत वर्षफल में है. 15 अगस्त से 9 अक्टूबर तक राहु की मुद्दा दशा चल रही है.

राहु विदेशी सौदों में अचानक रास्ता खोल सकता है. मगर वह तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं रहने देता. कागज पर बड़ा Discount दिखाई दे सकता है, लेकिन Shipping, Insurance और Currency Conversion जोड़ने के बाद वास्तविक बचत कम निकल सकती है.

इसलिए भारत को घोषित छूट नहीं, तेल की अंतिम Landed Cost देखनी होगी.

11 सितंबर का नवतारा किसके साथ?

दिल्ली के पंचांग के अनुसार 11 सितंबर को अमावस्या सुबह करीब 8 बजकर 56 मिनट तक रही. इसके बाद प्रतिपदा शुरू हुई. पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र दोपहर करीब 1 बजकर 16 मिनट तक है. फिर उत्तरा फाल्गुनी आता है. चंद्रमा शाम करीब 7 बजकर 8 मिनट पर सिंह से कन्या राशि में प्रवेश करेगा.

भारत का जन्म नक्षत्र पुष्य है. पुष्य से पूर्वा फाल्गुनी क्षेम तारा बनता है. यह अपने हित और सुरक्षा को बचाने के अनुकूल माना जाता है. लेकिन उत्तरा फाल्गुनी शुरू होते ही प्रत्यरि तारा आता है. यह सहमति के बीच विरोध, देरी या कठिन शर्त का संकेत देता है.

पुतिन के कृत्तिका नक्षत्र से पूर्वा फाल्गुनी परम मित्र तारा है. बाद में उत्तरा फाल्गुनी जन्म तारा बनता है. रूस के श्रवण नक्षत्र से यही क्रम मित्र और परम मित्र तारा का है.

यानी दिन का ताराबल रूस और पुतिन के लिए तुलनात्मक रूप से सहज है. भारत को भी बातचीत का रास्ता मिलता है, लेकिन दोपहर बाद शर्तें उसके लिए कठिन हो सकती हैं.

बैठक का सही समय आधिकारिक रूप से उपलब्ध हुए बिना इसे अंतिम भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता.

तो क्या पेट्रोल का झटका रुक जाएगा?

तुरंत नहीं… पेट्रोल और डीजल की कीमत केवल Russian Crude से तय नहीं होती. इसमें Brent Crude, डॉलर के मुकाबले रुपया, Refining Cost, Freight, Insurance, केंद्र और राज्यों के Tax तथा तेल कंपनियों का फैसला शामिल होता है.

PM मोदी फिर भी तीन अहम चीजें हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं-सप्लाई की गारंटी, भुगतान का सुरक्षित रास्ता और लंबी अवधि की कीमत पर बातचीत.

बैठक के बाद जारी बयान में तीन शब्द खोजने होंगे-Long-term Supply, Price Formula और Payment Mechanism.

इनमें से कोई बात आधिकारिक बयान में आती है तो रूस की बुध दशा और पुतिन की बुध-शुक्र अवधि का संकेत जमीन पर उतरता दिखाई देगा. अगर केवल दोस्ती और Energy Cooperation की पुरानी भाषा दोहराई गई, तो समझना होगा कि असली सौदा अभी बंद कमरे से बाहर नहीं आया है.

108 डॉलर का तेल भारत के दरवाजे पर खड़ी महंगाई है. पुतिन उसके हाथ में एक चाबी लेकर दिल्ली आए हैं. लेकिन वह चाबी मुफ्त नहीं देंगे.

PM मोदी का बड़ा दांव केवल तेल मांगना नहीं है. उन्हें ऐसी कीमत और भुगतान की शर्त निकालनी है, जिसमें रूस को बाजार मिलता रहे और भारत को सांस लेने की जगह.

आज की मुलाकात की असली परीक्षा नेताओं की तस्वीरों में नहीं होगी. वह रूस से आने वाले अगले तेल कार्गो के बिल में दिखाई देगी.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.



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