त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ के अचानक निधन की खबर से उनके पैतृक जिले बागपत में शोक की लहर दौड़ गई है. उनके शव के पुलिस मुख्यालय में मिलने की सूचना मिलते ही परिजनों और गांववासियों में कोहराम मच गया. महज 10 दिन पहले ही वे परिवार से मिलने बड़ौत आए थे और पूरी तरह स्वस्थ नजर आ रहे थे.
अनुराग धनखड़ मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले थे. उनके छोटे भाई रविराज धनखड़ बड़ौत के गांधी रोड पर रहते हैं, जबकि बड़े भाई विवेक दिल्ली में रहते हैं. घटना की सूचना मिलते ही बड़े भाई विवेक त्रिपुरा रवाना हो गए. पूरे परिवार में शोक व्याप्त है.
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10 दिन पहले परिवार से की थी मुलाकात
परिजनों ने बताया कि अनुराग धनखड़ अपनी पत्नी कल्पना के साथ 10 जुलाई को बड़ौत आए थे. उन्होंने परिवार के साथ समय बिताया, भोजन किया और देर तक बातचीत की. उनके ममेरे भाई एवं बिजरौल के पूर्व प्रधान उपेंद्र तोमर ने बताया कि मुलाकात के दौरान अनुराग पूरी तरह सामान्य थे. उनके व्यवहार से किसी तरह के तनाव या परेशानी का कोई संकेत नहीं मिला था.
शिक्षा से लेकर आईपीएस तक का सफर
अनुराग धनखड़ ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा बड़ौत के जनता वैदिक इंटर कॉलेज से प्राप्त की थी. इसके बाद उन्होंने केनरा बैंक में फील्ड ऑफिसर के रूप में नौकरी की और यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखी. वर्ष 1994 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हुआ और उन्हें त्रिपुरा कैडर मिला. अपनी ईमानदार कार्यशैली और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्होंने पूरे देश में पहचान बनाई थी.
स्थानीय लोगों का दुख
बिहारीपुर गांव के उनके पड़ोसी अमित ने गहरे दुख के साथ कहा कि अनुराग हमेशा गांव और परिवार से जुड़े रहते थे. उनका अचानक इस तरह चले जाना किसी सदमे से कम नहीं है.
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