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देश की सुरक्षा से समझौता नहीं, इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े आरोपियों की जमानत अर्जी दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की


दिल्ली हाईकोर्ट ने आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में दो आरोपियों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है. कोर्ट ने साफ कहा कि करीब 12 साल से जेल में रहने के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया जा सकता क्योंकि बाहर आने पर उनके फिर से ऐसी गतिविधियों में शामिल होने का खतरा बना हुआ है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान में बैठे इंडियन मुजाहिदीन के नेताओं के संपर्क में भी थे और उन्होंने जिहादी सामग्री फैलाने के साथ-साथ बम बनाने की ट्रेनिंग भी दी थी. यह मामला मोहम्मद साकिब अंसारी और वकार अजहर से जुड़ा है, जिन्होंने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जमानत की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी.

यह है पूरा मामला 

दिल्ली पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपी इंडियन मुजाहिदीन के राजस्थान मॉड्यूल का हिस्सा थे और दिल्ली में आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे. जांच के दौरान उनके पास से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, IED बनाने का सामान, हथियार और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए थे. कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपियों के खिलाफ सबूत मजबूत हैं. उनके पास से जो सामान मिला, उससे बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता था जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

बड़े आतंकियों से जुड़े थे आरोपियों के लिंक

दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपियों के संबंध इंडियन मुजाहिदीन के कुख्यात आतंकी रियाज भटकल जैसे बड़े ऑपरेटिव से थे. वे फर्जी पहचान पत्र, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और कोड भाषा का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी गतिविधियां और भी संदिग्ध हो जाती हैं.

लंबी समय तक जेल भी नहीं बनी राहत का आधार

दिल्ली हाई कोर्ट में आरोपियों की ओर से दलील दी गई थी कि वे करीब 12 साल से जेल में हैं इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ लंबी कैद जमानत का आधार नहीं बन सकती खासकर जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो.

कोर्ट ने क्यों ठुकराई जमानत

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा आरोपी आतंकी संगठन के सक्रिय सदस्य रहे हैं. उनके पास से खतरनाक विस्फोटक सामग्री बरामद हुई. वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. उनके फरार होने का भी खतरा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि दोनों आरोपी पढ़े-लिखे हैं, जिनमें से एक इंजीनियरिंग का छात्र था, लेकिन इसके बावजूद वे आतंकी गतिविधियों में गहराई से शामिल रहे. कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की गतिविधियां इतनी गंभीर हैं कि उन्हें जमानत देना समाज और देश दोनों के लिए खतरा हो सकता है.

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