नवरात्रि के पहले दिन जौ बोए जाते हैं और नौ दिनों तक उनकी देखभाल की जाती है. इस दौरान निकलने वाले हरे अंकुर देवी उपासना के साथ नई ऊर्जा और जीवन के विकास का प्रतीक माने जाते हैं.

घटस्थापना में जौ बोने के लिए चौड़े मिट्टी के पात्र का प्रयोग किया जाता है. मिट्टी पृथ्वी तत्व से जुड़ी है और इसी में बीज अंकुरित होकर जीवन का रूप लेते हैं.

मिट्टी के पात्र में बोए गए अनाज के बीच कलश स्थापित किया जाता है. इस तरह बीज, मिट्टी, जल और कलश मिलकर प्रकृति, जीवन और देवी शक्ति के प्रति श्रद्धा का प्रतीकात्मक रूप प्रस्तुत करते हैं.

धार्मिक मान्यता के अनुसार जौ को सृष्टि में उत्पन्न होने वाला पहला पौधा माना जाता है. इसलिए नवरात्रि में जौ बोना जीवन के विकास और वृद्धि का प्रतीक माना जाता है.

जौ प्राचीन समय से महत्वपूर्ण अन्न रहा है. घटस्थापना में इसके बीज बोना घर में अन्न, समृद्धि और खुशहाली की कामना से जोड़ा जाता है.

घटस्थापना की विधि में सप्तधान्य यानी सात प्रकार के अनाज का उल्लेख मिलता है. इनमें जौ, तिल, धान, मूंग, कंगनी, चना और गेहूं शामिल हैं.
Published at : 30 Sep 2026 09:32 AM (IST)
